राष्ट्रीय

राष्ट्रीय

समस्या की असल जड़ अनुच्छेद 35-ए

सियासत अक्सर आंखों पर पर्दा डाल देती है और फिर यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि सही क्या है और गलत क्या. अनुच्छेद 35-ए को लेकर यही स्थिति है. 1954 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसके जरिये जम्मू-कश्मीर...

लाठी के बल पर जन सुनवाई की कवायद

पर्यावरण स्वीकृति के लिए जन सुनवाई जरूरी है, सो ऐसा करना शासन-प्रशासन की मजबूरी है. लेकिन, जिन्हें जन सुनवाई में असल भागीदारी करनी है, उन स्थानीय नागरिकों को बलपूर्वक रोका जा रहा है, उनकी कोई बात तक न...

जान देंगे, जमीन नहीं देंगे

सितंबर 2012 में बनी झारखंड सरकार की ऊर्जा नीति अक्टूबर 2016 में बदल दी गई. इसके प्रावधानों में संशोधन किए गए और रघुवर दास कैबिनेट ने उस पर मुहर लगा दी. इससे पहले सरकार ने कोई सर्वे नहीं कराया और न किस...

पूर्णिया (बिहार) : पुराने योद्धा, नया समीकरण

साल 2014 की मोदी लहर में नीतीश कुमार की लाज बचाने वाले संतोष कुशवाहा इस बार खुद मोदी के भरोसे हैं और 2004 से अब तक भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराने वाले उदय सिंह उर्फ पप्पू ‘पंजा’ निशान लेकर मैदान मे...

सीतामढ़ी (बिहार) : रूठों को मनाना एक बड़ी चुनौती

सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र में आगामी छह मई को मतदान होगा. 10 अप्रैल से इस सीट के लिए नामांकन शुरू हो जाएंगे, जो 18 अप्रैल तक चलेंगे. 22 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. जिले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई...

अररिया (बिहार) मुद्दे-उम्मीदवार गौण, मुकाबले में मोदी

आगामी 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए वोटों का गणित समझने से पहले अररिया के संसदीय इतिहास को जान लेते हैं. अररिया साल 1967 में संसदीय क्षेत्र घोषित हुआ और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया....

बीजद-भाजपा में कांटे की टक्कर

आगामी ११ अप्रैल से चार चरणों में होने वाले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है. स्थानीय निकाय चुनाव में मिली कामयाबी को देखते हुए भाजपा जोश से लबरेज है, दूसरी ओर नव...

2019 के जंग की रणनीति

राज्य में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन उसके बड़े नेता 11 दिसंबर को आए चुनावी नतीजे आज भी भूले नहीं हैं, खासकर मुख्यमंत्री कमल नाथ. हालांकि वह कहते हैं, हमारा हारा हुआ उम्मीदवार भी कांग्रेस सरकार का प्र...

5वीं पारी की तैयारी पर भाजपा भारी

पिछले लगभग चार दशकों से राज्य पर एकछत्र राज करने वाले नवीन पटनायक लगातार पांचवीं बार अपनी सत्ता कायम रखने के लिए मैदान में उतरेंगे. उन्हें चुनौती देने के लिए कांग्रेस और भाजपा एक बार फिर कमर कस कर तैय...

करे कोई, भुगते कोई

कांग्रेस की सरकार नक्सल समस्या के समाधान को लेकर कितनी भ्रमित है, इसका एक जीता जागता उदाहरण है, गोडेलगुड़ा की घटना. इस घटना में दो आदिवासी महिलाओं की मौत को लेकर राज्य के कैबिनेट मंत्री सीआरपीएफ को कठ...

×