2019 के जंग की रणनीति

रमेश कुमार 'रिपु'
Sat, 16 Mar, 2019 15:05 PM IST

राज्य में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन उसके बड़े नेता 11 दिसंबर को आए चुनावी नतीजे आज भी भूले नहीं हैं, खासकर मुख्यमंत्री कमल नाथ. हालांकि वह कहते हैं, हमारा हारा हुआ उम्मीदवार भी कांग्रेस सरकार का प्रतिनिधि है. लेकिन शहडोल, बैतूल एवं रीवा लोकसभा क्षेत्र की समीक्षा बैठक में उनके स्वर बदले हुए थे. उन्होंने कहा, रीवा वाले अगर लोकसभा चुनाव जीतकर न आए, तो वे अपना मुंह भी न दिखलाएं. विधानसभा चुनाव में हमने गुटबाजी का खामियाजा भुगता, लोकसभा में अगर गुटबाजी की खबर आई, तो आपके राजनीतिक भविष्य पर संकट आ जाएगा. दरअसल, गुटबाजी के चलते विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस की सियासी जमीन खिसक गई. रीवा में उसका खाता नहीं खुला. विधानसभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से केवल 12 पर आगे है, जबकि भाजपा की बढ़त 17 सीटों पर है. कांग्रेस की दुविधा यह है कि वह भाजपा से कैसे सीटें छीने. वहीं भाजपा के सामने सवाल है कि 2014 में मिली 27 सीटों पर कब्जा कैसे बरकरार रहे. यानी मिशन 2019का लक्ष्य हर दल साधना चाहता है.

कांग्रेस की नजर खासकर उन सीटों पर है, जहां भाजपा लगातार जीतती रही है. कमल नाथ ऐसी सीटों के लिए ब्रांडिग कर रहे हैं. भोपाल, इंदौर एवं विदिशा लोकसभा सीटें जीतने के लिए वह लगातार बैठक कर रहे हैं. दूसरी ओर भाजपा की नजर भी कांग्रेस के किलों पर है. वह कांग्रेस के गढ़ रहे छिंदवाड़ा, गुना, रतलाम-झाबुआ को फ ोकस कर रही है. विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने विंध्य क्षेत्र को टारगेट किया. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल को हराने का लक्ष्य तय किया गया और भाजपा उसमें सफ ल भी रही. पिछली बार उसने गुना सीट जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था, नतीजतन ज्योतिरादित्य सिंधिया की जीत का अंतर कम हो गया था. भोपाल सीट पर 3.70 लाख वोटों से हारने वाली कांग्रेस ने विधाानसभा चुनाव में हार का अंतर 63 हजार कर लिया.

बसपा के दो प्रत्याशी घोषित

बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डीपी चौधरी कहते हैं, बसपा इस बार कांग्रेस और भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर देगी. गौरतलब है कि बसपा ने राज्य की २६ सीटों पर चुनाव लडऩे का ऐलान किया है. शेष तीन सीटें वह सपा के लिए छोड़ेगी. मध्य प्रदेश में सपा और बसपा से तालमेल के तहत सपा बालाघाट, टिकमगढ़ और खजुराहो से लोकसभा का चुनाव लड़ेगी अन्य 26 सीटों पर बसपा के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे.

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बसपा सतना से अच्छे लाल कुशवाहा और मुरैना से डॉ. राम लाल कुशवाहा को मैदान में उतारेगी. विंध्य और चंबल-मुरैना में बसपा की अच्छी पैठ रही है. लेकिन, बीते विधानसभा चुनाव में विंध्य में उसका खाता नहीं खुला. भाजपा सब पर भारी रही.

मिशन 2019 का लक्ष्य

देखा जाए, तो कांग्रेस 1991 के बाद से लोकसभा चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी. पटवा सरकार के समय कांग्रेस को 40 में से 27 सीटें मिली थीं और भाजपा को 12. सत्ता से बाहर रहने के बावजूद भाजपा ने 1999 में 29 सीटें जीती थीं, तब कांग्रेस को 11 सीटों पर संतोष करना पड़ा था, जबकि दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे. 2004 में भाजपा को 25 और कांग्रेस को चार सीटें मिलीं. 2009 में भाजपा को 16 और कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं. 2014 में भाजपा को 27 और कांग्रेस को दो सीटें मिलीं. जाहिर है, लोकसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस पर भारी रही. मुख्यमंत्री कमल नाथ ने 20 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है. इस समय भाजपा के पास 26 और कांग्रेस के पास तीन सीटें हैं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह कहते हैं, हम पिछले रिकॉर्ड से भी आगे जाएंगे. पार्टी ने जनता के बीच रहकर काम किया है. वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया कहते हैं, कांग्रेस मिशन 2019 पर काम कर रही है. विधानसभा चुनाव में जनता ने हम पर भरोसा किया, हम लोकसभा चुनाव में भी अपनी जीत दर्ज कराएंगे.

सियासत का सूचकांक

तीन हिंदीभाषी राज्यों में भाजपा की हार निश्चित तौर पर उसके लिए एक चेतावनी है. कांग्रेस ने किसानों से कर्ज माफ ी का वादा करके उन्हें अपने पाले में कर लिया, नकद भुगतान पर निर्भर छोटे कारोबारी एवं असंगठित क्षेत्र के मजदूर नोट बंदी के चलते भाजपा के खिलाफ  चले गए. कांग्रेस की सियासत का सूचकांक और न बढ़े, इसीलिए मोदी सरकार ने आम बजट में हर तबके को खुश करने की कोशिश की. दो हेक्टेयर से कम जमीन के मालिक किसानों को सालाना 6,000 रुपये देने का फैसला किया गया, इससे देश के 10 करोड़ किसान लाभांवित होंगे. लेकिन, राहुल गांधी ने पिछले दिनों जम्हूरी मैदान में आयोजित आभार सम्मेलन में कहा, मोदी सरकार ने किसानों को प्रतिदिन औसत 17 रुपये देकर उनका मजाक उड़ाया है. हमने तीन राज्यों में किसानों के कर्ज माफ  किए. अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार आई, तो जीएसटी बंद कर देंगे. कृषि मंत्री सचिन यादव कहते हैं, मोदी सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के बजाय पैदावार बढ़ाने पर जोर दिया. अनाज और दलहन की पैदावार अधिक होने से उनकी कीमत गिर गई. उपभोक्ताओं को लाभ हुआ, लेकिन खेती किसानों के लिए लाभ का धंधा नहीं बनी. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीता शरण शर्मा कहते हैं, आम बजट का लाभ भाजपा को मिलेगा. 14 करोड़ मजदूरों के लिए वृद्धावस्था पेंशन योजना का ऐलान हुआ है, जिसमें केंद्र भी अपनी ओर से राशि देगा. रीयल एस्टेट को राहत मिली है. देश नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है, इसलिए लोग भाजपा को वोट करेंगे.

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पैर जमाने की चाह

कांग्रेस की कोशिश है कि लोकसभा चुनाव से पहले घोषणा पत्र में किए गए 51 प्रतिशत वादे पूरे हो जाएं, ताकि भाजपा को बोलने का मौका न मिले. कांग्रेस ने 971 वचन दिए थे, उसका दावा है कि 497 वचन बिना आर्थिक बोझ के पूरे हो गए. जबकि भाजपा कांग्रेस को उसके अधूरे वचनों पर घेरने की तैयारी में है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव कहते हैं, दो माह में कांग्रेस ने केवल भाजपा शासन की योजनाएं बंद करने का काम किया. अभी तक पेट्रोल-डीजल पर वैट पांच रुपये कम नहीं किया. भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला कहते हैं, शिवराज सरकार ने किसान हित में बहुत काम किए, जबकि कांग्रेस ने कई योजनाएं बंद कर दीं. जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा कहते हैं, सरकार ने जनहित में कई काम किए. मसलन किसानों की कर्जमाफ ी, बेरोजगारी भत्ता, बिजली का बिल आधा, प्रोफेसरों को सातवां वेतनमान, गोशाला स्थापना आदि. भाजपा सरकार ने 15 सालों के दौरान किसानों के नाम पर 10,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया.

विरोधी बयानों से हलचल

सत्ता का कमल कुम्हलाने से भाजपा के बड़े नेता पसोपेश में हैं. वहीं प्रदेश भाजपा कार्यालय में लोकसभा चुनाव की तैयारी बैठक में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने यह कहकर शिवराज सिंह पर निशाना साधा कि हार की वजह से कार्यकर्ता हताश हैं, नेतृत्व में कहीं न कहीं कमी रह गई थी. इस पर शिवराज ने कहा, कार्यकर्ता हताश नहीं हैं, वे विधानसभा चुनाव का बदला लेने को तैयार बैठे हैं. भाजपा रसगुल्ला नहीं है कि कांग्रेस खा जाएगी. दो माह में ही लोग भाजपा सरकार को याद करने लगे हैं. इस दौरान महिलाओं पर अत्याचार के छह हजार 310 मामले सामने आए हैं. 15 दिसंबर से 22 जनवरी तक हत्या के 179 और दुष्कर्म के 410 मामले सामने आए. संगठन महामंत्री राम लाल ने कहा, हार की समीक्षा बैठक अब न करना. जीत का श्रेय सभी लेते हैं, लेकिन हार का ठीकरा दूसरों पर फ ोडऩे से संदेश गलत जाता है. जिसने काम नहीं किया, प्रदेश अध्यक्ष उसे हटाकर दूसरे को पद दें. जो नाराज हैं, उन्हें लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी से जोड़ें.

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टिकट के लिए दांव

अमित शाह की टीम नए चेहरे तलाशने के लिए सर्वे कर रही है. संभावना है कि भाजपा आधी से अधिक सीटों पर नए चेहरे उतारना चाहती है. ताजा फ ीडबैक के अनुसार, भाजपा 10 सीटों पर हार सकती है और 11 सीटों पर कांग्रेस की राह मुश्किल है. सूत्रों के अनुसार, बैतूल से ज्योति धु्रवे, सागर से लक्ष्मी नारायण, विदिशा से सुषमा स्वराज, खजुराहो से नागेंद्र सिंह, बालाघाट से बोध सिंह, मुरैना से अनूप मिश्रा, होशंगाबाद से राव उदय प्रताप सिंह, शहडोल से ज्ञान सिंह, भोपाल से आलोक संजर, भिंड से भागीरथ प्रसाद, देवास से मनोहर ऊंट वाला, राजगढ़ से रोडमल नागर, धार से सावित्री सिंह और सीधी से रीति पाठक के टिकट कटने की आशंका है. जबकि कांग्रेस पुराने चेहरों के साथ-साथ कुछ नए चेहरे भी उतारेगी. कमल नाथ समीक्षा बैठक में आए संभावित प्रत्याशियों की सूची राहुल गांधी को देंगे. राहुल गांधी की सर्वे टीम की रिपोर्ट और कमल नाथ द्वारा प्रस्तावित नामों के मिलान के बाद कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित करेगी. तभी बसपा-सपा के भी प्रत्याशियों के नाम खुलेंगेे.

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