महेंद्र अवधेश

जलवा @2019

पूरा पैसा वसूल हो गया. जमकर चौके-छक्के लगे. एक से एक झक्कास लंतरानियां, बिंदास बोल. जुबान साफ  करने वाले खुद लजा गए कि क्या बोल गए हम! कहने के मतलब ने इस बार सरे बाजार कई सूरमाओं के कपड़े उतार लिए, सा...

एक दुकान, हर समाधान

अफागर वे मुकदमे जिता सकते हैं, तो देश में व्याप्त बेरोजगारी क्यों नहीं दूर कर देते? अपराधियों का सया क्यों नहीं कर देते? नक्सलियों पर अपना जादू क्यों नहीं चलाते कि वे असलहे छोडक़र तेंदू पत्ते से बीड़ी...

बयान नहीं, बयाना

मेरे दिमाग में तो विकास की कई योजनाएं हैं. वैसे आप क्या चाहते हैं, आदेश करें, मैं तो आपका सेवक हूं. मतदाता की तल्खी के बावजूद उम्मीदवार की विनम्रता बरकरार थी. अगर आपकी पार्टी को बहुमत मिल गया, तो प्रध...

हाशिये पर किसान-कामगार

लोकतंत्र का महापर्व जारी है, सियासत दां गला फाडक़र आम जन के लिए ‘दरियादिली’ की नुमाइश कर रहे हैं. हर तरफ  नित नए ऐलान देखकर जनता भौचक है. लेकिन, किसानों-कामगारों का दर्द अभी तक तारी है, किसी ने उनके जख...

चिकोटी : बसंती को बनवा दो पीएम!

मेरे दिमाग में तो विकास की कई योजनाएं हैं. वैसे आप क्या चाहते हैं, आदेश करें, मैं तो आपका सेवक हूं. मतदाता की तल्खी के बावजूद उम्मीदवार की विनम्रता बरकरार थी. अगर आपकी पार्टी को बहुमत मिल गया, तो प्रध...

जूतागिरी बनाम नेतागिरी

विवेक किसके पास रह गया है? राहुल बाबा को देखो, चौकीदार को ‘चोर’ बताकर फंस गए. बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताय. सुना तुमने, मुंबर्ई के सिक्योरिटी गॉड्र्स ने तहरीर दे दी थाने में. इल्जाम यह कि देश भर...

रंग-ए-लफ्फाजी

आपका भी कोई विरोधी हो सकता है भाई? आप तो लोकप्रिय, जनप्रिय एवं सर्वप्रिय चिंतक हैं देश के, मैंने बटरिंग की और नतीजा पॉजिटिव आया. भइया लाल फूलकर कुप्पा हो गए. भइया लाल पूरे होलियाना मूड में थे. पार्क म...

…. रमंते तत्र शांति!

मैंने छेड़ा, जरूर आप में कोई खोट नजर आती होगी भाभी जी को, अन्यथा एक हाथ से तो ताली भी नहीं बजती. आप अपनी उलझने वाली आदत छोड़ दीजिए. शास्त्रों में कहा गया है, यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता....

सियासी गलियों में वेलेंटाइनी बयार

देश के सियासी गलियारों में मौसमी वेलेंटाइंस की चहलकदमी बढ़ गई है, जहां ‘रोज-चॉकलेट’ नहीं, बल्कि मनपसंद सीट-पद आदि प्रेम की प्रगाढ़ता बढ़ाने के औजार हैं. कोई इस बात पर खुशी से फूला नहीं समा रहा कि ‘काम...

लोकतंत्र का 5वां खंभा

तुम्हीं बताओ मुन्ना, देश की दौलत से ऐश करने, महल-कोठियां बनवाने, जनता को धोखा देने, भाई के हाथों भाई का खून बहाने, कमीशन-रिश्वत खाने और दफ्तरों में सिर्फ गप्पें हांकने वाले लोग जब इस व्यवस्था के खंभे...

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