संध्या द्विवेदी।

‘बुंदेलखंड को गढ्ढे से निकालने के लिए लखनऊ में भी बीजेपी का इंजन लगाना होगा।’ बुंदेलखंड ने प्रदेश के इंजन में अपने 19 विधायकों का योगदान दिया है। क्या अब यह इंजन कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की पटरी से उतरी जिंदगी को फिर से पटरी में लायेगा…? यह बात उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान उरई में 20 फरवरी को हुई शंखनाद रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कही थी। शुरुआत खराब है, 17 किसानों के ट्रैक्टर नीलाम हुए हैं। अभी उनकी और भी संपत्ति कुर्क होने का फरमान सुनाया जा चुका है।

मजेदार बात यह है कि बांदा के सांसद भैरो प्रसाद मिश्र को इस खबर का पता नहीं है। अब जरा मिश्र जी का बयान पढ़ें- उन्होंने कहा, हमें इस विषय में कुछ भी नहीं पता। कल सुबह इस मुद्दे पर बात करेंगे। ठीक है न कल बात करें!

जरा कर्वी के विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को भी सुनें –कर्वी विधायक तो दो कदम और आगे निकलने उन्होंने कहा, यह मामला प्रापर बांदा का है। जब कहा गया कि यह मामला सिर्फ बांदा का नहीं बल्कि चित्रकूट मंडल का है तो उनका कहना था, ‘मैं तो कर्वी का विधायक हूं। चित्रकूट में रहता हूं।’ उनसे जब पूछा गया कि क्या कर्वी चित्रकूट मंडल में नहीं आता तो उनका मिलने की जगह फोन कट गया।

बांदा के जिलाधिकारी योगेश जी ने तो साफ कह दिया कि यह मामला बैंक और किसान के बीच का है। हालांकि ऐसे में सवाल उठता है कि जिला अधिकारी को सरकार अक्सर यह निर्देश क्यों जारी करती है कि किसानों से कर्ज वसूली मामले पर नजर रखें?

किसान कर्ज माफी का मुद्दा उत्तर प्रदेश चुनाव में इस बार भी बड़ा मुद्दा बना था। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रैलियों में वादा किया ‘अगर भाजपा की सरकार प्रदेश में बनी तो पहली मंत्रिमंडल की बैठक में कर्ज माफ होगा।’ लेकिन प्रदेश को मुखिया मिले सात दिन भी नहीं बीते और बुंदेलखंड के 17 किसानों का ट्रैक्टर कुर्क करने की खबर आ गई। यह किसान बांदा, महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर के हैं।

डिजीटल इंडिया का बेहतरीन उपयोग करते हुए ट्रैक्टर की ई-नीलामी की गई है। ऐसा नहीं है कि ट्रैक्टर की नीलामी के बाद कुर्की रुक जाएगी। अभी तो बकाया कर्ज राजस्व विभाग वसूलेगा। घर की दूसरी संपत्ति जैसे जमीन आदि के जरिये।

उधर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश के किसानों का कर्ज केंद्र नहीं माफ करेगा। वजह बताई कि केंद्र दूसरे राज्यों के साथ भेदभाव की नीति नहीं अपना सकता। हां, राज्य चाहें तो अपने संसाधनों का उपयोग  कर कर्ज माफ कर सकते हैं। यानी अब गेंद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पाले में है।

बुंदेलखंड के समाजसेवक आशीष सागर दीक्षित सवाल पूछते हैं-‘अगर केंद्र उत्तर प्रदेश का कर्ज नहीं माफ कर सकता था तो क्या इस बात से प्रधानमंत्री अनभिज्ञ थे? किस हैसियत से उन्होंने चुनावी रैलियों में यह घोषणा की कि भाजपा की सरकार बनते ही पहली मंत्रिमंडल की बैठक में वह प्रदेश के किसानों का कर्ज माफ कर देंगे।’ आशीष सागर चित्रकूट मंडल के 10 विधायकों से भी सवाल पूछते हैं कि अब तक कोई विधायक सामने क्यों नहीं आया? क्यों कोई बयान नहीं आया? 19 में से 10 विधायकों से सवाल पूछने की वजह यह है कि मरने वाले किसान चित्रकूट मंडल के हैं। और 10 विधानसभा सीटें इस मंडल में आती हैं।

 

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