राजनीति

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पूर्णिया (बिहार) : पुराने योद्धा, नया समीकरण

साल 2014 की मोदी लहर में नीतीश कुमार की लाज बचाने वाले संतोष कुशवाहा इस बार खुद मोदी के भरोसे हैं और 2004 से अब तक भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराने वाले उदय सिंह उर्फ पप्पू ‘पंजा’ निशान लेकर मैदान मे...

सीतामढ़ी (बिहार) : रूठों को मनाना एक बड़ी चुनौती

सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र में आगामी छह मई को मतदान होगा. 10 अप्रैल से इस सीट के लिए नामांकन शुरू हो जाएंगे, जो 18 अप्रैल तक चलेंगे. 22 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. जिले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई...

अबकी बार किसकी सरकार

मोदी ने जो कहा, सो किया नवादा के डेंटल ओरल सर्जन डॉ. रमेश कुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन ने कई अहम मुकाम हासिल किए. स्वच्छ भारत मिशन, सबको आवास और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना...

विपक्षी एकता हुई निजी महत्वाकांक्षाओं का शिकार

मजबूत विपक्ष मजबूत लोकतंत्र की एक आवश्यक शर्त है. सिर्फ इसलिए नहीं कि सत्ता पर अंकुश बनाए रखना जरूरी है. इसलिए भी कि सत्ता से सवाल करते रहने का काम भी विपक्ष का ही है. लेकिन, भारतीय लोकतंत्र में आम तौ...

वोट चाहिए मुसलमान नहीं!

साल 2015 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद एक इंटरव्यू में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था, हम सेक्युलरिज्म के कुली बनते-बनते थक चुके हैं. ओवैसी की यह प्रतिक्रिया इस सवाल पर आई थी कि उनक...

चुनावी बिसात पर सजने लगे मोहरे

झारखंड में मुख्य मुकाबला यूं तो महागठबंधन और एनडीए के बीच है, लेकिन ‘जनमत’ नामक मोर्चा नया गुल खिलाने की तैयारी में है, जिसमें झारखंड नामधारी दलों का जमावड़ा है तथा जिसके प्रत्याशी सिर्फ वोट काटने के...

भाजपा की राह आसान नहीं

दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए किसी भी पार्टी को कुछ राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन करना जरूरी है. भाजपा को अगर फिर से सत्ता में वापसी करनी है,  तो उसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं ओ...

राजनीति की विषकन्याएं

लोकसभा चुनाव से पहले अगर मीडिया में नेताओं की ‘सेक्स सीडीज’ की बाढ़ आ जाए, तो चौंकिएगा नहीं. क्योंकि, विरोधियों को विषकन्याओं के जरिये फंसाने का नया ट्रेंड अब राजनीति का अहम हिस्सा बन गया है. ओपिनियन...

फंस गया राम मंदिर

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या प्रकरण में मध्यस्थों के जरिये हल खोजने की सलाह देते हुए तीन सदस्यीय पैनल गठित कर दिया है, लेकिन पेंच यह है कि इस कार्य में तकरीबन तीन महीने का समय लग सकता है, क्योंकि संबंधित...

अबकी बार किसकी सरकार

बेजोड़ हैं नरेंद्र मोदी हड्डियों को जोडऩे में माहिर डॉ. भुवन सिंह का मानना है कि देश को जोड़े रखने की ताकत केवल नरेंद्र मोदी में है. सारी दुनिया ने देख लिया कि मोदी पहले किसी को छेड़ते नहीं हैं और कोई...

बुद्धिजीवी वर्ग मोदी के साथ

वक्त बदलता है, धारणाएं बदलती हैं. बात बहुत पुरानी नहीं है, 2014 के चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को भाजपा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने जा रही थी, उस समय अकादमिक जगत ने उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ...

साफ होगा पीके का पत्ता

कहावत है, बड़ा कौर भले खाए, लेकिन बड़ा बोल न बोले. प्रशांत किशोर यही भूल कर गए. एनडीए में शामिल होने का फैसला जदयू द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया था, जिस पर सवाल उठाने का कोई तुक बनता, लेकिन ‘पीके’ जोश...

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