कुंदन कुमार

एमवाई समीकरण की परीक्षा

मुंबई एवं दिल्ली में भवन निर्माण कार्य से संबद्ध मजदूर घर नहीं लौटे हैं. अधिकांश घरों में केवल महिलाएं एवं बुजुर्ग नजर आते हैं. 17वीं लोकसभा के लिए अपना प्रतिनिधि चुनने की जिम्मेदारी इन्हीं महिलाओं एव...

रंजीता की राह के रोड़े

कोसी का पानी कांग्रेस के लिए खारा होता जा रहा है. इसलिए इस बार उसे यहां अपनी दाल गलाने में दिक्कत पेश आ रही है. सुपौल की जनता का मिजाज कांग्रेस की सांसद रंजीता रंजन के प्रति 2019 में फिलहाल तो दोस्तान...

भाजपा के लिए नाक का सवाल बना अररिया

साल 2014 में इस इलाके की सभी सीटों पर भाजपा उम्मीदवार मैदान में थे. 2009 के लोकसभा चुनाव तक, जब भाजपा एवं जदयू के बीच गठबंधन था, तब भी भाजपा सीमांचल की चारों सीटों पर जरूर लड़ती थी. लेकिन, 2014 में मो...

पूर्णिया (बिहार) : पुराने योद्धा, नया समीकरण

साल 2014 की मोदी लहर में नीतीश कुमार की लाज बचाने वाले संतोष कुशवाहा इस बार खुद मोदी के भरोसे हैं और 2004 से अब तक भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराने वाले उदय सिंह उर्फ पप्पू ‘पंजा’ निशान लेकर मैदान मे...

अररिया (बिहार) मुद्दे-उम्मीदवार गौण, मुकाबले में मोदी

आगामी 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए वोटों का गणित समझने से पहले अररिया के संसदीय इतिहास को जान लेते हैं. अररिया साल 1967 में संसदीय क्षेत्र घोषित हुआ और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया....

हिंदुत्व के सहारे भाजपा

किशनगंज से सिर्फ एक बार छोड़, कोई गैर मुस्लिम लोकसभा चुनाव जीत नहीं सका. जबकि अररिया और कटिहार से 1998 से 2009 तक भाजपा उम्मीदवार ही जीतते रहे. 2014 में मोदी की प्रचंड लहर के बावजूद सीमांचल में मात खा...

एमवाई समीकरण की प्रयोगशाला बना अररिया

अररिया लोकसभा क्षेत्र को एमवाई समीकरण की प्रयोगशाला माना जाता है. वाई (यादव) अगर एम (मुस्लिम) के साथ गए, तो लालटेन जलेगी और अगर हिंदुत्व की बयार के साथ रहे, तो कमल खिलेगा. वोटों का अंकगणित उतना ही रोच...

भाजपा की राह आसान नहीं

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के असर से सीमांचल का इलाका प्रभावित नहीं हुआ और भाजपा तीन में से एक भी सीट नहीं बचा पाई. नतीजे बता रहे थे कि यह नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने का इफेक्ट था. 2014 मे...

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