व्यापमं मामला: नकलची छात्रों का एडमिशन रद्द

ग्वालियर।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नकलची छात्रों को जोर का झटका लगा है। व्यापमं घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने 700 छात्रों को फर्जी तरीके से एडमिशन लेने का दोषी पाया है। कोर्ट ने 2008 से 2012 तक के सभी नकलची छात्रों के एडमिशन रद्द कर दिए हैं। इस फैसले से ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के 35 छात्र प्रभावित होंगे।

व्यापमं घोटाले से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट डेट्स की उस याचिका की सुनवाई कर रहा था जिसमें मप्र हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मप्र हाईकोर्ट के फैसले पर मोहर लगाई। कोर्ट ने 2008 से 2012 तक 700 गलत तरीकों से एडमिशन पाए। इससे एमबीबीएस छात्रों को तगड़ा झटका लगा है। सीजेआई जेएस खेहर की 3 सदस्यीय पीठ ने यह फैसला लिया है।

व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) मध्यप्रदेश में उन पोस्ट पर भर्तियां या एजुकेशन कोर्स में एडमिशन करता है,  जिनकी भर्तियां मध्यप्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन नहीं करता। पीएमटी, पीईटी, पीएटी और कई सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं व्यापमं संचालित कराता है।

घोटाले की बात उस वक्त सामने आई जब अनुबंधित शिक्षक, यातायात पुलिस, सब इंस्पेक्टरों की भर्ती परीक्षा के अलावा मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में ऐसे लोगों को पास किया गया, जिनके पास एग्जाम में बैठने तक की काबिलियत नहीं थी।

पीएमटी में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां

सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले में मेडिकल की प्रवेश प्रक्रिया रद्द करने का फैसला सुनाया है, वह व्यापमं के तहत सबसे बड़ा घोटाला था। व्यापमं की ओर से हुई पीएमटी में गड़बड़ी के सिलसिले में कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं, लेकिन जुलाई 2013 में यह घोटाला बड़े रूप में तब सामने आया जब इंदौर क्राइम ब्रांच ने डॉ. जगदीश सगर की गिरफ्तारी की।

उसे मुंबई के पॉश होटल से गिरफ्तार किया गया था। उसके इंदौर स्थित घर से कई करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई थी। पुलिस के मुताबिक, एमबीबीएस डिग्री रखने वाले सगर ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने 3 साल के दौरान 100 से 150 छात्रों को मेडिकल कोर्स में गलत तरीके से प्रवेश दिलाया था।

व्यापमं फर्जीवाड़े में हुई एसआईटी की जांच में यही सामने आया था कि फर्जीवाड़ा दलालों और रैकेटियरों ने शुरू किया है। दलालों और रैकेटियरों ने पहले ऐसे छात्रों को फर्जीवाड़े के लिए तैयार किया जो किसी भी कीमत पर सफलता पाना चाहते थे। इसके बाद इनके लिए सॉल्वर का इंतजाम किया गया था।

व्यापमं फर्जीवाड़े को मुरैना और भिंड के ग्रामीण छात्रों तक मेडिकल कॉलेज के कुछ छात्र, डॉक्टर और इनसे जुड़े कुछ लोग ले गए थे। डॉक्टर जगदीश सगर ने सबसे पहले ग्वालियर अंचल में पीएमटी फर्जीवाड़ा शुरू किया। भिंड और मुरैना के कई छात्रों को इस फर्जीवाड़े में फंसाया। अंचल में इसकी बदनामी हो गई तो इंदौर में डेरा डाला और वहां से फर्जीवाड़े का रैकेट चलाने लगा।

गजराराजा मेडिकल कॉलेज में दबदबा रखने वाले डॉक्टर दीपक यादव ने डॉक्टर जगदीश सागर के फर्जीवाड़े को आगे बढ़ाया। इसके संपर्क में उत्तरप्रदेश के अच्छे सॉल्वर थे, इसलिए उसका काम जल्दी आगे बढ़ गया। संतोष चौरसिया और ज्ञानेंद्र त्रिपाठी दीपक के लिए उत्तरप्रदेश से सॉल्वर का इंतजाम करते थे। इसके बाद वे छात्र भी तलाशने लगे। इसके अलावा शैलेंद्र निरंजन, सुधीर कश्यप, विशाल यादव और हरिज्ञान विमल भी दीपक यादव से जुड़कर अपना फर्जीवाड़े का कारोबार चलाते रहे।

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