पीएम बनने के लिए केंद्रीय मंत्री का षड्यंत्र

डॉ. मनीष कुमार
Wed, 15 May, 2019 13:52 PM IST

राजनीति का खेल भी अजीबोगरीब है. पूरे देश में हर पार्टी चुनाव प्रचार में जुटी है और ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश कर रही है. लेकिन, हर पार्टी के भीतर भी कांटे की भिडं़त जारी है. दुनिया के सामने भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी हैं, लेकिन पार्टी के भीतर ही उनकी राह में रोड़े बिछाने वालों  की कमी नहीं है. यह बात और है कि कोई खुलकर दावेदारी नहीं ठोंक रहा, लेकिन चोरी-छिपे वह हर काम कर रहा है, जिससे नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को पटखनी दी जा सके. ओपिनियन पोस्ट को ऐसी ही एक हैरतअंगेज जानकारी मिली है. हैरतअंगेज इसलिए, क्योंकि इसमें तंत्र-मंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है. विषकन्याओं एवं असामाजिक तत्वों के जरिये तांत्रिकों को धमकाया और ब्लैकमेल किया जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री तंत्र-मंत्र के जरिये प्रधानमंत्री बनने की जुगत में हैं. हैरानी की बात यह है कि तंत्र-मंत्र का यह षड्यंत्र भारतीय जनता पार्टी के आठ लोकप्रिय नेताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, जिनमें बड़े-बड़े राज्यों के दो मुख्यमंत्री भी शामिल हैं.

दिल्ली के लुटियन इलाके की एक बड़ी सी कोठी में पिछले तीन महीने से तंत्र-मंत्र का महाअनुष्ठान चल रहा है. भारतीय राजनीति का एक बड़ा चेहरा अपने घर पर पूजा-पाठ करा रहा है, ताकि वह देश का अगला प्रधानमंत्री बन सके. यह अनुष्ठान इसलिए चल रहा है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की पहली पंक्ति के एक वरिष्ठतम नेता करीब छह महीने पहले एक तांत्रिक से मिले थे. वहां उनकी जन्म कुंडली देखी गई. उक्त तांत्रिक बहुत बड़े साधक माने जाते हैं. वह किसी का भी भूत, वर्तमान एवं भविष्य बता सकते हैं. यही वजह है कि उनके दरवाजे पर बड़े-बड़े राजनेता और उद्योगपति लाइन लगाए खड़े रहते हैं. उक्त तांत्रिक ने इस वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री को बताया कि ग्रह नक्षत्र इस हिसाब से बैठे हैं कि चुनाव के बाद कुछ भी हो सकता है. कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है. मंत्री महोदय को 2014 में भी किसी तांत्रिक ने उनके प्रधानमंत्री बनने का योग बताया था. उस बार भी कई महीने तक तंत्र-मंत्र और पूजा-साधना का दौर चला था. लेकिन, मोदी लहर में तांत्रिक का हर मंत्र बेअसर रहा. तब दिल पर पत्थर रखकर इस नेता ने नरेंद्र मोदी का नेतृत्व न सिर्फ स्वीकार कर लिया, बल्कि पिछले पांच सालों तक हर आदेश का पालन भी किया. लेकिन, अंदर ही अंदर वह जलते भी रहे. इस दौरान ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिनमें कहा जा सकता है कि मंत्री जी की काफी बेइज्जती हुई. चूंकि वह नेता बड़े हैं, इसलिए महत्वाकांक्षा भी बड़ी होना स्वाभाविक है. अगर कोई नेता प्रधानमंत्री बनने की हसरत रखे, तो उसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि देश की लीडरशिप चाहने वाला नेता मानसिक तौर पर कम से कम इतना कमजोर नहीं होना चाहिए कि वह जनता के बीच जाने के बजाय तंत्र-मंत्र करने लग जाए, अपनी ही पार्टी के नेताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए जादू-टोना करना शुरू कर दे. हम जानबूझ कर मंत्री जीका नाम नहीं लिख रहे, क्योंकि चुनाव के दौरान यह खुलासा एक अलग राजनीतिक विवाद पैदा कर सकता है. लेकिन, हमें यकीन है कि इस रिपोर्ट के अंत तक पहुंचते-पहुंचते आपको मंत्री जीऔर हर संबंधित शख्स के बारे में आईडिया हो जाएगा.

भारतीय जनता पार्टी के उक्त नेता केंद्रीय कैबिनेट के वरिष्ठतम सदस्य हैं. वह उन पांच-सात नेताओं में शामिल हैं, जो नरेंद्र मोदी के समकक्ष हैं. भाजपा के सभी सर्वोच्च पदों पर रह चुके हैं. ऐसे वरिष्ठ नेता में अगर प्रधानमंत्री पद की चाहत हो, तो उसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन, उसके लिए जनता का समर्थन जरूरी है. समस्या यह है कि वह वरिष्ठ नेता तो हैं, लेकिन उन्हें जनता का समर्थन हासिल नहीं है. वह अपने ही राज्य की राजनीति में बेअसर हो चुके हैं. वह न तो भीड़ जुटा सकते हैं और न ओजस्वी भाषण दे पाते हैं. लेकिन, 2014 में जब यह विवाद चल रहा था कि नरेंद्र मोदी अगर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे, तो उनके नाम पर गठबंधन के लिए क्षेत्रीय पार्टियां तैयार नहीं होंगी. कई वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक यह थ्योरी दे रहे थे कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि भाजपा खुद बहुमत नहीं ला सकती और अगर बाहर से समर्थन की जरूरत पड़ी, तो क्षेत्रीय पार्टियां किसी दूसरे नेता का नाम आगे कर देंगी. इस कैंपेन का असर यह हुआ कि नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए थे.

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इसी दौरान भाजपा के इस वरिष्ठ नेता ने तांत्रिकों से सलाह ली, जिन्होंने जन्म कुंडली देखकर बताया कि उनका प्रधानमंत्री बनना तय है. उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा अकेले ही बहुमत हासिल कर लेगी, इसलिए इस नेता ने खुद को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए पूजा-पाठ कराया, जो तकरीबन छह महीने तक चला था. उसके लिए बनारस से पंडितों को बुलाया गया था, कई अनुष्ठान भी हुए थे. लेकिन, जब नतीजे आए, तो सारे किए-धरे पर पानी फिर गया. देश में मोदी के नाम पर आई आंधी से विपक्ष के साथ-साथ भाजपा के अंदर मोदी का विरोध करने वाले नेताओं की साख नेस्तनाबूद हो गई. कई वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया गया और कई हाशिये पर चले गए. यह वरिष्ठ नेता एक मंत्रालय में बैठकर मोदी के डाउनफॉलका इंतजार करने लगे. करीब एक साल पहले जब चुनावी सर्वे आने शुरू हुए, तो फिर ऐसा लगने लगा कि भाजपा की सीटें घटेंगी, 200 के अंदर सिमट जाएंगी. एक बार फिर मंत्री जीके मन में लड्डू फूटने लगे. बड़े से बड़े तांत्रिकों की तलाश शुरू हो गई. एक बहुत बड़े तांत्रिक से संपर्क साधा गया. तांत्रिकों की खोज से लेकर बातचीत करने तक की जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी के एक प्रवक्ता ने निभाई, जो इन मंत्री महोदय के काफी करीब माने जाते हैं.

सोचने वाली बात यह है कि अगर तंत्र-मंत्र से ही कोई शख्स देश का प्रधानमंत्री या मंत्री बन सकता, तो हमारे यहां बड़े से बड़े तांत्रिकों की कोई कमी है क्या? तो फिर हर सरकार और हर मंत्रालय में तांत्रिक ही विराजमान होते. विडंबना देखिए, देश का एक जिम्मेदार मंत्री किस तरह अंधविश्वास के जाल में फंसा हुआ है. यही वजह थी कि काफी गहन खोज के बाद एक बड़े तांत्रिक से संपर्क साधा गया और उसे मंत्री जीके बंगले पर बुलाया गया. इस तथाकथित बड़े तांत्रिक ने मंत्री जी की जन्म कुंडली देखी और फौरन उसमें राजयोग होने की पुष्टि कर दी. इस तांत्रिक को बताया गया कि 2014 में भी ऐसा दावा किया गया था, लेकिन नतीजा कुछ और निकला. इस पर तांत्रिक ने कहा कि पिछली बार नक्षत्रों की जो दशा थी, उसमें विरोधी पक्ष यानी नरेंद्र मोदी की जन्म कुंडली ज्यादा मजबूत थी. फिर तांत्रिक ने 2019 की दशा के बारे में विस्तार से बताया और तंत्र-मंत्र के जरिये सारी बाधाएं दूर कर देने का दावा किया. तांत्रिक ने बताया कि पिछली बार जो भूल हुई थी, इस बार नहीं होगी. तांत्रिक ने सुझाव दिया कि कुछ पूजा तो मंत्री जी की दशा सुधारने के लिए की जाएंगी, लेकिन तंत्र-मंत्र का एक लंबा अनुष्ठान भारतीय जनता पार्टी के चुने हुए वरिष्ठ नेताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाएगा. इस योजना पर सहमति बन गई और तांत्रिक को आठ ऐसे नेताओं की लिस्ट दी गई, जो प्रधानमंत्री बनने की राह में रोड़ा पैदा कर सकते हैं. मतलब यह कि इस लिस्ट में पांच सबसे लोकप्रिय नाम तो हैं ही, साथ ही दो वर्तमान मुख्यमंत्रियों एवं एक पूर्व मुख्यमंत्री के नाम भी शामिल हैं. कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. इसमें और भी कई ट्विस्ट हैं, जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे.

तंत्र-मंत्र का यह अनुष्ठान मंत्री जी को चुनाव जिताने के लिए तो किया ही जा रहा है, लेकिन इसका असल मकसद भारतीय जनता पार्टी के आठ वरिष्ठ नेताओं को नुकसान पहुंचाना है, ताकि मंत्री जी प्रधानमंत्री बन सकें. नोट करने वाली बात यह है कि इन आठ नेताओं में से तीन मोदी सरकार में मंत्री भी हैं. तीनों ऐसे मंत्री हैं, जो भविष्य में प्रधानमंत्री बन सकते हैं. मंत्री जीके निशाने पर तीन बड़े क्षेत्रीय नेता भी हैं, जिनमें से दो बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री हैं, जिनके बारे में माना जा रहा है कि वे भविष्य में भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार बन सकते हैं. दोनों ही नेता लोकप्रिय हैं. तीसरा क्षेत्रीय नेता एक बड़े राज्य का पूर्व मुख्यमंत्री है. मंत्री जीने इन्हीं आठ नेताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लिया. शर्मनाक बात तो यह कि नुकसान सिर्फ राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक और शारीरिक रूप से भी पहुंचाने की योजना है. जब तांत्रिकों ने अपना षड्यंत्र शुरू किया, तो एक समस्या पैदा हो गई. तांत्रिक ने बताया कि मोदी सरकार के एक मंत्री और एक मुख्यमंत्री के खिलाफ अनुष्ठान करना मुश्किल हो रहा है. उसने कहा कि वह मुख्यमंत्री स्वयं ही तंत्र-मंत्र में माहिर हैं, इसलिए उन्हें हानि पहुंचाना कठिन है. फिर भी वह (तांत्रिक) कोशिश करेगा. लेकिन, बड़ी समस्या मोदी सरकार के मंत्री को लेकर थी. तांत्रिक ने बताया कि उक्त मंत्री किसी सुरक्षा कवच के अंदर है. कोई बड़ा तांत्रिक उसकी रक्षा करने के लिए तप कर रहा है. अब यहां सवाल यह उठता है कि देश की राजनीति में किस तरह की मानसिकता वाले लोग शीर्ष तक पहुंच गए हैं. वे दुनिया को दिखाने के लिए ऊंची-ऊंची बातें करते हैं, लेकिन उनकी मानसिकता मध्यकालीन संस्कारों वाली है. यह इस देश का दुर्भाग्य है कि तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत और अंधविश्वास में आस्था रखने वाले लोग मंत्री बन रहे हैं और प्रधानमंत्री बनने का सपना देखते हैं. तांत्रिक एवं उसके सहयोगी जो कुछ कर रहे हैं, वह तो उनका व्यवसाय है, लेकिन देश का एक वरिष्ठ मंत्री ऐसे कर्मकांडियों को सच मान बैठे, तो इस पर आश्चर्य नहीं, बल्कि घृणा होती है. बहरहाल, तांत्रिक से पूछा गया कि आखिर वह कौन हो सकता है, जिसने एक मंत्री को सुरक्षा कवच दे रखा है. उस तांत्रिक की भी तलाश हुई. मंत्री जीके तांत्रिक ने ही उसके बारे में बताया. नाम और पता दिया. साथ ही यह भी कहा कि वह तंत्र-मंत्र में काफी निपुण है, इसलिए उसका कुछ बिगाड़ा नहीं जा सकता.

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मंत्री जी को लगा कि अगर वह तांत्रिक, जिसने उनके विरोधी को सुरक्षा कवच दे रखा है, उनके लिए काम करे, तो प्रधानमंत्री बनने का सपना सच हो सकता है. मंत्री जीके चहेतों ने उस तांत्रिक से संपर्क साधा, बातचीत की और उसे मंत्री जी के सामने पेश किया. मंत्री जी ने उस तांत्रिक को मोटी रकम का प्रलोभन दिया, भविष्य में हर काम कराने का आश्वासन दिया. लेकिन, उस तांत्रिक ने साफ-साफ मना कर दिया. बातचीत के दौरान मंत्री जी की जुबान से कुछ ऐसी बातें निकल गईं, जिनसे वह तांत्रिक नाराज हो गया. इसके बाद एक और घटना हुई, जो वाकई शर्मनाक है. मंत्री जी से बातचीत खत्म होने के बाद तांत्रिक को धमकियां मिलने लगीं. बताया जाता है कि उस तांत्रिक के दफ्तर में जाकर कुछ गुंडों ने उत्पात मचाया और उसकी जिंदगी तबाह करने की धमकी दी. यही नहीं, उसके चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी दी गई. उसके दफ्तर में गुंडे तेजाब की बोतलें भी लेकर गए थे. धमकी देने वालों में एक महिला और दो पुरुष थे. उस तांत्रिक ने फौरन कुछ पुलिस अधिकारियों से बात की. चूंकि मंत्री जीका मामला था, इसलिए कोई शिकायत तो दर्ज नहीं कराई, लेकिन अपनी जान-पहचान के पुलिस वालों से मिलकर उसने मामले को रफा-दफा करने के लिए कहा.

पुलिस ने जब इन गुंडों की पहचान की, तो हैरान करने वाली जानकारी मिली. पता चला कि धमकी देने पहुंचे गुंडों के साथ एक विषकन्या भी थी, जो सुपारी लेकर लोगों को ब्लैकमेल करने में माहिर है. पुलिस ने दबिश दी, तो विषकन्या के साथ आया एक गुंडा पकड़ में आ गया और दूसरा गुंडा विषकन्या के साथ लाजपत नगर (दिल्ली) स्थित एक फ्लैट में रंगे हाथों पकड़ा गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह फ्लैट किम (बदला हुआ नाम) नामक एक महिला का है, जहां से वह जिस्मफरोशी का धंधा करती है. पुलिस ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ तो लिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. सूत्रों के मुताबिक, महिला को मंत्री जीका वरदहस्त प्राप्त है. इसलिए पुलिस ने उसे छोड़ दिया. ओपिनियन पोस्ट को मिली जानकारी के मुताबिक, मंत्री जी के घर में तंत्र-मंत्र का अनुष्ठान बाकायदा जारी है. उस विषकन्या को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह किसी तरह दबाव डालकर उस तांत्रिक को मंत्री जीके लिए अनुष्ठान करने को तैयार करे. इससे साबित होता है कि राजनीति का खेल कितना गंदा है. किस तरह नेता अपनी ही पार्टी के नेताओं को जान-माल का नुकसान पहुंचा कर पद पाना चाहते हैं. इस घटना से एक बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ कि क्या राजनीति इतने निम्न स्तर पर पहुंच गई है कि बड़े नेताओं ने वेश्याओं और विषकन्याओं का इस्तेमाल शुरू कर दिया है? जो महिलाएं जिस्मफरोशी के धंधे में लिप्त हैं, उनके बड़े नेताओं से रिश्ते होना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि देश की राजनीति के लिए कलंक है. सवाल यह भी है कि जब वह महिला एक गैर पुरुष के साथ रंगे हाथों पकड़ी गई, तो उसे छोड़ क्यों दिया गया? और, किसके आदेश पर छोड़ा गया? उस विषकन्या को छुड़वाने और उसे एक तांत्रिक पर दबाव डालने की जिम्मेदारी देने का मतलब तो यही है कि प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले उक्त मंत्री जीके रिश्ते विषकन्याओं से भी हैं. यह राजनीति का घिनौना चेहरा है. प्रजातंत्र में प्रधानमंत्री बनने का एक ही रास्ता है और वह है जनता के बीच लोकप्रिय होना, चुनाव जीतकर लोकसभा में बहुमत लाना. जो नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लेता है, उसे प्रधानमंत्री तो क्या, मुखिया-सरपंच तक बनने का अधिकार नहीं है. ऐसे लोगों का पर्दाफाश जरूरी है. हमने इस रिपोर्ट के जरिये यह साबित करने की कोशिश की है कि देश में कितनी घटिया मानसिकता वाले लोग राजनीति के शीर्ष तक पहुंच चुके हैं और वे देश-समाज को घुन की तरह सड़ाने-गलाने में जुटे हैं. ऐसे लोगों को सार्वजनिक जीवन से बाहर किया जाना चाहिए. यह कहानी सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की नहीं है, अमूमन हर पार्टी में स्तरहीन नेताओं की भरमार है, जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए तांत्रिकों एवं विषकन्याओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे नेता देश और समाज के लिए न सिर्फ कलंक हैं, बल्कि प्रजातंत्र के लिए भी खतरनाक हैं.

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राजनेताओं का तांत्रिक कनेक्शन

भारतीय राजनीति में तांत्रिकों का प्रभाव बहुत पहले से रहा है. तांत्रिक चंद्रास्वामी को कभी किंग मेकरकहा जाता था. कई राजनेताओं के साथ उनके घनिष्ठ संबंध थे. इंदिरा गांधी के कई करीबियों के साथ चंद्रास्वामी के नजदीकी संबंध थे और कई मौकों पर वे उनकी (चंद्रास्वामी) सहायता लिया करते थे. इंदिरा गांधी के बारे में भी कहा जाता है कि वह तंत्र-मंत्र में विश्वास करती थीं और अपने राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए उन्होंने चंद्रास्वामी की सहायता ली थी. इंदिरा गांधी के बाद जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तो वह भी चंद्रास्वामी की शरण में गए. यही नहीं, पीवी नरसिम्हा राव और प्रमुख समाजवादी नेता चंद्रशेखर के भी चंद्रास्वामी के साथ खास संबंध थे और इन लोगों ने कई मौकों पर उनकी सहायता ली थी. हाल में कई ऐसी चौंकाने वाली खबरें आई हैं, जिनमें नेताओं के तांत्रिकों के साथ कनेक्शन की बात सामने आई है. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी भी आध्यात्मिक गुरुओं एवं तांत्रिकों के संपर्क में रहती हैं. राजीव गांधी से शादी के बाद उन्होंने देवरहा बाबा से आशीर्वाद लिया था और लगातार उनके संपर्क में रही थीं. राहुल गांधी के बारे में भी ऐसी खबरें हैं. यहां तक कि राहुल गांधी ने जब संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगाया था, तो भाजपा के एक नेता ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने किसी तांत्रिक के कहने पर ऐसा किया था. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के संबंध भी तांत्रिकों से हैं. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वह विंध्याचल के तांत्रिक गुरु पगला बाबा से मिलने गए थे और घंटों तक उनके साथ पूजा की थी. इसके पहले जब लालू यादव चारा घोटाला में फंसे थे और राजनीतिक रूप से हाशिये पर चले गए थे, तो उन्होंने तांत्रिक गुरु पगला बाबा का आशीर्वाद लिया था और उनसे तंत्र-मंत्र भी कराए थे. उनका बेटे तेज प्रताप यादव भी तांत्रिक बाबा की शरण में गए और बताया जाता है कि उन्हीं की सलाह पर उन्होंने अपनी पत्नी के खिलाफ मोर्चा खोला था. इसी तरह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी तंत्र-मंत्र का सहारा लेने का आरोप लगा था. ऐसी खबर थी कि नीतीश ने अपने राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए एक तांत्रिक झप्पी बाबा का सहारा लिया. नीतीश के बारे में यह खबर आने पर लालू ने कहा भी था कि वह सबसे बड़े तांत्रिक हैं. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया भी तांत्रिक की  शरण में गई थीं. जब वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं, तो राजनीतिक परेशानियों से निपटने के लिए उन्होंने मध्य प्रदेश के दतिया स्थित पीतांबरा पीठ में तांत्रिक अनुष्ठान कराया था. इस तरह भारतीय राजनीति में कई ऐसे नेता हैं, जो अपने फायदे और विरोधियों को नुकसान पहुंचाने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान का सहारा लेते रहे हैं और अब भी ले रहे हैं.

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