दूषित होता है ट्रेन का खाना

ओपिनियन पोस्ट
Fri, 21 Jul, 2017 16:29 PM IST

नई दिल्‍ली।

क्‍या आपको पता है कि ट्रेन में सफर के दौरान आप जो भोजन खरीदते हैं वह कितना दूषित होता है। डिब्बाबंद और बोतलबंद चीजों को एक्सपायर होने के बावजूद भी बेचा जा रहा है। अनधिकृत ब्रैंड की पानी की बोतलें बेची जा रही हैं। रेल परिसरों में साफ सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। ट्रेन में बिक रहीं चीजों का बिल न दिए जाने और फूड क्वॉलिटी में कई तरह की खामियों की भी शिकायतें हैं।

शुक्रवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की ओर से संसद में रखी गई रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ट्रेन में परोसा जाने वाला खाना इंसानों के खाने लायक नहीं है। कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि दूषित खाद्य पदार्थों, रिसाइकिल किया हुआ खाद्य पदार्थ और डब्बा बंद व बोतलबंद वस्तुओं का उपयोग उस पर लिखी इस्तेमाल की अंतिम तारीख के बाद भी धड़ल्ले से किया जा रहा है।

सीएजी और रेलवे की संयुक्‍त टीम ने 74 स्टेशनों और 80 ट्रेनों का दौरा कर जायजा लिया जहां रेलवे की खामियों का पता चला। टीम की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार पेय पदार्थों को तैयार करने के लिए नल से सीधे अशुद्ध पानी लेकर उसका इस्तेमाल किया जा रहा था। कूड़ेदान ढके नहीं हुए थे और उनकी नियमित अंतराल पर सफाई नहीं हो रही थी।

खाने की चीजों को मक्खी,  कीड़ों और धूल से बचाने के लिए उन्हें ढककर नहीं रखा जा रहा था। इसके अलावा, ट्रेनों में चूहे,  कॉकरोच का आना जाना आम बात है, जो खाने को प्रदूषित करते हैं। कुल मिलाकर ट्रेन का खाना इंसानों के खाने के योग्‍य नहीं है।

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नहीं है कोई ब्लू प्रिंट

भारतीय रेल प्रशासन जरूरी बेस किचन,  ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीनें जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावशाली कदम उठाने में नाकाम रहा। सात रेलवे जोन्स में कैटरिंग सर्विस के लिए प्रावधानों का ब्लूप्रिंट ही नहीं तैयार किया गया। इसके अलावा, पॉलिसी में बार-बार बदलाव करने से यात्रियों को कैटरिंग सर्विस मुहैया कराने वाले मैनेजमेंट पर बेतरतीब रहने का संकट छाया रहता है।

गौरतलब है कि भारतीय रेलवे दुनिया में चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। भारतीय रेल के पास 70,000 से अधिक पैसेंजर कोच और 11,000 से अधिक इंजन हैं। 2015-16 के आंकड़े के अनुसार 13, 313 पैसेंजर ट्रेन हर दिन लगभग 7, 000  स्टेशनों के बीच पटरी पर दौड़ती हैं, जिनमें लगभग 2 करोड़ 20 लाख लोग सफर करते हैं। कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद हम और आप ट्रेन का खाना खाने से पहले एक बार जरूर सोचेंगे।

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