नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद बड़ी बड़ी मुश्किलें झेलने के बावजूद देश की आम जनता को उम्‍मीद है कि उससे भविष्‍य में देश को बड़ा फायदा होने जा रहा है, जबकि तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं कि नोटबंदी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ है क्‍योंकि ज्‍यादातर पुराने नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली के दावे पर भरोसा करें तो नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

वित्त मंत्री ने आंकड़े पेश किए जिसके हिसाब से नोटबंदी के बाद राजस्व बढ़ा है। उन्‍होंने कहा है कि कई क्षेत्रों में कारोबार भी बढ़ा है और खेती को भी कोई नुकसान नहीं हुआ है। नए नोट जारी करने का काम काफी आगे बढ़ चुका है,  कहीं से अशांति की कोई खबर नहीं है। रिजर्व बैंक के पास बहुत अधिक मात्रा में नोट उपलब्ध हैं, मुद्रा का बड़ा हिस्सा बदला जा चुका है और 500 रुपये के और नए नोट जारी किए जा रहे हैं।

वरिष्‍ठ पत्रकार मुकेश पंडित की मानें तो इस फैसले को प्रमाणित करने के लिए भारत में जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए। जब देश में नोट के लिए लोगों ने इतनी लंबी लाइनें लगाई हैं तो एक बार जनमत संग्रह के लिए भी लाइनें लग सकती हैं। पश्चिमी देशों में बड़े फैसले लेते वक्त जनमत संग्रह कराए जाते हैं।

उनकी फेसबुक वाल पर इस संदर्भ में आंकड़ों के साथ जनमत के मुद्दे पर जोर दिया गया है, जिसके मुताबिक, ब्रिटेन ने 23 जून को यूरोपीय संघ से अलग होने के प्रश्न पर जनमत संग्रह कराया। स्कॉटलैण्ड एक स्वतंत्र देश बने या नहीं, इसे लेकर 18 सितंबर 2014 को स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह हुआ। ग्रीस को बैलआउट पैकेज के लिए भी जनमत संग्रह हो चुका है। संवैधानिक सुधार पर इटली ने जनमत संग्रह कराया। यहां रिजल्ट की बात नहीं, प्रश्न बड़े फैसलों में जनता की भागीदारी का है।

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वित्त मंत्री ने कहा, “बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ी है। 19 दिसंबर तक प्रत्यक्ष कर संग्रह में 14.4 प्रतिशत,  अप्रत्यक्ष कर संग्रहण में 26.2 प्रतिशत की वृद्धि। केंद्रीय उत्पाद शुल्क की वसूली की वृद्धि 43.3 प्रतिशत और सीमा शुल्क वसूली की वृद्धि 6 प्रतिशत हो गई।”

नोटबंदी से किसानों को हुए फायदे पर वित्मंत्री ने कहा, ‘रबी की बुवाई पिछले साल से 6.3 प्रतिशत अधिक हुई है। जीवन बीमा क्षेत्र का कारोबार बढ़ा है, पेट्रोलियम उपभोग में वृद्धि हुई है। इसी तरह पर्यटन उद्योग और म्युचुअल फंड योजनाओं में निवेश बढ़ा है।’

वित्तमंत्री ने कहा, ‘नए नोट जारी करने का सबसे अहम दौर पूरा हो गया है,  अब स्थिति में काफी सुधार हो रहा है। आरबीआई के पास पर्याप्त करेंसी है। आने वाले कुछ सप्ताहों में स्थिति में सुधार होगा।’

वित्त मंत्री ने कहा,  ‘नोटबंदी पर आलोचक गलत साबित हुए। नोटबंदी का एकाध तिमाही में आर्थिक वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था। हालात इतने बुरे नहीं जितना कि कहा जा रहा था।’