विवादों की प्रेतछाया में ‘पद्मावती’

ओपिनियन पोस्ट
Tue, 02 Jan, 2018 16:01 PM IST

विजय माथुर।

फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर राजस्थान के राजपूत संगठन और पूर्व राजघराने जिन तेवरों के साथ विरोध पर उतर आए हैं, उसके पीछे ‘आग का दरिया’ साफ नजर आता है। फिल्म में रानी पद्मावती को गलत ढंग से पेश किए जाने का आरोप लगाते हुए रजवाड़ों की उग्रता पूर्व शासकों की आंखों में कौंधती नजर आती है। जयपुर राज परिवार की पद्मिनी देवी और दीया कुमारी ने फिल्म निर्माता भंसाली पर वचन भंग का आरोप जड़ते हुए दो टूक लफ्जों में कह दिया कि, ‘प्रदर्शन से पहले उन्हें फिल्म हमें दिखानी थी, लेकिन भंसाली वादे से मुकर गए हैं। हमें फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ का अंदेशा है। इसलिए राजस्थान में इस फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा।’ राजपूत समुदाय के संगठन करणी सेना के नेता महिपाल सिंह मकराना और मेरठ के राजपूत नेता ठाकुर अभिषेक सोम हिंसा की नई पटकथा लिखने पर तुले हैं। दोनों नेताओं ने फिल्म की नायिका दीपिका पादुकोण की नाक काटने और भंसाली की गर्दन कलम करने की पांच करोड़ी इनामी मुनादी कर फिल्म इंडस्ट्री में दहशत पैदा कर दी है। फिल्म में पद्मावती का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री दीपिका पादुकोण इन कसैले मंसूबों से स्तब्ध हैं। उनका कहना है, ‘विवाद ने जिस तरह का मोड़ लिया है, मैं हैरान हूं।’ उधर, फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली का दावा है, ‘फिल्म में लोगों की भावना को आहत करने वाला कोई प्रसंग ही नहीं है।’ फिल्म देख चुके वरिष्ठ पत्रकार और भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष वेद प्रकाश वैदिक भी भंसाली के दावे की तस्दीक करते नजर आते हैं कि ‘पूरी फिल्म में कहीं भी ऐसी बात नहीं है जिससे दूर-दूर तक अंदेशा हो कि पद्मावती का चरित्र चित्रण आपत्तिजनक ढंग से किया गया है।’ उनका कहना है कि इस फिल्म में पद्मावती को शौर्य और चातुर्य की मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वैदिक घूमर नृत्य पर दर्ज कराई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए कहते हैं कि, ‘नृत्य के समय महाराजा रतनसिंह के अतिरिक्त किसी भी पुरुष की उपस्थिति दर्ज नहीं है और सीनैरियो में नृत्य बहुत ही संयत और मर्यादित है।’ बहरहाल, फिलहाल तो फिल्म का प्रदर्शन सेंसर बोर्ड द्वारा उठाई गई कुछ दस्तावेजी खामियों की वजह से निर्धारित समय से करीब एक पखवाड़े के लिए टल गया है। इस बीच सूत्रों का दावा है कि, ‘सेसर बोर्ड ने फिल्म सर्टिफिकेशन का फैसला गुजरात चुनावों के मद्देनजर 68 दिन के लिए टाल दिया है।’ उधर, प्रख्यात फिल्म गीतकार जावेद अख्तर ने नए ढंग से ज्ञानार्जन किया है कि, ‘फिल्मों को इतिहास मत समझिए और इतिहास को भी फिल्म के नजरिये से मत देखिए।’ फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर इनकार कर दिया कि, ‘अभी फिल्म को सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं मिला है। ऐसे में कोर्ट के दखल की जरूरत नहीं है।’ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि, ‘फिल्म को सर्टिफिकेट देने के लिए सेंसर बोर्ड के कई मानदंड होते हैं। इसके खिलाफ शिकायत पर विचार करने के लिए फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेंट ट्रिब्यूनल भी है।

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विरोध, विवाद और एक्शन की आंच में झुलसती फिल्म पद्मावती अतिरेक वाले सिनेमा की संज्ञा पाकर मनोरंजन चक्र की सरहदों से बाहर धकेली जा रही है। विरोध की वितंडा इस बात को लेकर है कि, ‘रानी को फिल्म में नाचते हुए क्यों दिखाया गया है? विवादों का दायरा बढ़ा तो इस बात को लेकर कि, ‘आक्षेपों की भाषा इतनी लुंज-पुंज कैसे हो गई कि स्त्री सम्मान की खातिर कोई स्त्री की नाक काटने को उतारू हो जाए? विश्लेषक कहते हैं कि विरोध की आग ने मर्यादाओं का ही जौहर कर दिया? विरोध की उग्रता अब महल-किलों के कपाट बंद करती हुई ‘भारत बंद’ के आह्वान की दिशा में बढ़ रही है। विरोध को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों में बराबर की जुगलबंदी है। यह स्थिति जातीय समीकरणों की पैदाइश है जो गुजरात के आसन्न चुनावों से और ज्यादा रपटीली हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में राजपूत समुदाय की 7 प्रतिशत की भागीदारी है जिनकी संख्या 40 से 45 लाख के दरमियान मानी गई है। सियासत में भी राजपूतों का दखल अच्छा-खासा है यानी राजपूत समुदाय से तीन सांसद और 25 विधायक हैं।

विवाद के अग्निकुंड की आग भड़कने का सूत्रपात कैसे हुआ ? सूत्रों की बात करें तो पिछली 27 जनवरी को जब जयपुर के जयगढ़ किले में फिल्म पद्मावती की शूटिंग चल रही थी, वहां करणी सेना के लोग दखलंदाजी करने पहुंच गए। शुरुआत धक्का-मुक्की से हुई और नौबत निर्माता-निर्देशक संजय भंसाली के साथ मारपीट तक पहुंच गई। घटना से स्तब्ध भंसाली जयपुर से ताम-झाम उठाकर महाराष्ट्र के कोल्हापुर पहुंच गए तो भी वे विवादों की सरहदों से नहीं निकल पाए। 14 मार्च को वहां पहुंचे तकरीबन 40-50 लोगों ने पेट्रोल बम से हमला कर फिल्म का सेट ही फूंक दिया। कोढ़ में खाज का काम किया, 26 सितंबर की घटना ने जब एक न्यूज चैनल ने स्टिंग दिखाकर राख में दबी चिंगारी को फिर भड़का दिया। इस स्टिंग आपरेशन में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी और करणी सेना के मुंबई संयोजक उम्मेद सिंह को दिखाया गया था। स्टिंग का दावा था कि, ‘दोनों ने औरंगजेब और राजपूत महिला पर बनने वाली फिल्म का विरोध न करने की एवज में डेढ़ करोड़ रुपये मांगे थे। हर रोज नित नए विवाद की गिरफ्त में फंसती फिल्म पद्मावती के समर्थन में जुटे इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने मुंबई में प्रेस कान्फ्रेंस बुलाकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी से अनुरोध किया है कि, ‘भंसाली को धमकी देने वालों की भर्त्सना की जाए। उन्होंने कहा कि कानून भंग करने वालों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया जाए। प्रेस कान्फ्रेंस की अध्यक्षता कर रहे फिल्म निदेशक अशोक पंडित ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि फिल्म निर्माता को अभिव्यक्ति की आजादी दी जाए।’ उधर, महिला सशक्तीकरण से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता आभासिंह का कहना है कि ‘प्रचार के लिए जितनी बयानबाजी हो रही है, वो भर्त्सना के योग्य है।’ उन्होंने सवाल किया कि, ‘देश के कितने लोग घूमर नृत्य को जानते हैं, इस फिल्म के जरिये राजस्थान का लुप्तप्राय: घूमर नृत्य क्या पूरी दुनिया के सामने नहीं आएगा? एफटीआईआई के चेयरमैन रह चुके अभिनेता गजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि, ‘जब संजय भंसाली ने स्पष्ट किया है कि फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं है, जिससे लोगों की भावना आहत हो ? मुझे लगता है फिल्मकार अपने शब्द दे रहा है तो समाज को उस पर भरोसा कर मौका दिया जाना चाहिए।’

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उधर, राजस्थान के फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर भी विवाद को लेकर घबराए हुए हैं और फिलहाल इसकी स्क्रीनिंग के मामले में बैकफुट पर आ गए हैं। इस बीच फिल्म का एक नया पोस्टर भी जारी हुआ है। नए पोस्टर में दीपिका के चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि संभवत: यह फिल्म का क्लाइमेक्स सीन होगा लेकिन फिलहाल तो यह हकीकत में ‘क्लाइमेक्स सीन’ बना हुआ है। हालांकि सवाल अब भी वही है कि भंसाली के भव्य सिनेमा को देखने की चाहत रखने वाले दर्शक क्या इसे स्क्रीन पर देख पाएंगे?

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