सरदार पटेल की जयंती पर एकता के लिए दौडे देशवासी

ओपिनियन पोस्ट
Tue, 31 Oct, 2017 11:40 AM IST

ओपिनियन पोस्‍ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को एकजुट करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत को नजरअंदाज करने के लिए पूर्ववत सरकारों पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने ध्यानचंद स्टेडियम में देश के पहले उपप्रधानमंत्री पटेल की जयंती पर रन फॉर यूनिटी को हरी झंडी दिखाते हुए कहा, “भारत विविधता से भरा देश है। एकता में अनेकता हमारी विशेषता है।” पीएम मोदी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववत सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, “पहले के लोगों ने सरदार पटेल के योगदान को भुलाने और खत्म करने का भरसक प्रयास किया।”

उन्होंने कहा, “लेकिन देश के लोग और युवा पटेल का और देश के निर्माण में उनके योगदान का सम्मान करते हैं।” पीएम मोदी ने पटेल के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा, “सरदार पटेल ने अपनी कुशलताओं और दृढ़ता का इस्तेमाल कर विभाजन के बाद उपजी समस्याओं से देश को बचाया।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने सुनिश्चित किया कि भारत छोटी-छोटी रियासतों में बंटा ना रहे।” पीएम मोदी ने जोर देकर कहा, “हमारे देश को एकजुट रहना चाहिए। जो भारत पटेल ने हमें दिया, उसकी एकता को बरकरार रखने की जिम्मेदारी सभी भारतीयों की है।”
पीएम मोदी ने कहा, “इसलिए सभी पीढ़ियों को जानना चाहिए कि पटेल ने एकता को कैसे बनाए रखा। हम उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रहे हैं।”

बता दें कि अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई से लेकर एकीकृत भारत के निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल का अहम योगदान रहा है। लौह पुरुष के नाम से मशहूर सरदार पटेल ने युवावस्था में ही राष्ट्र और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया था। इस ध्येय पथ पर वह नि:स्वार्थ भाव से लगे रहे। 31 अक्टूबर 1875 को उनका जन्म हुआ था और वे साल 1950 में 15 दिसम्बर के दिन दुनिया से रुखसत हुए थे।

READ  'मोदी जी अपने चमचों को रोकिए मेरे परिवार पर कचरा न फेंके, जाँच करवाओं, गलत हूँ तो मुझे जेल भेजो' ... राहुल गांधी

सरदार पटेल पेशे से वकील थे और पूरी लगन और ईमानदारी से वकालत करते थे। एक बार जब वह जज के सामने जिरह कर रहे थे, तभी उन्हें एक टेलीग्राम मिला, जिसे उन्होंने देखा और जेब में रख लिया। तार में उनकी पत्नी के निधन की सूचना थी। उन्होंने पहले अपने वकील धर्म का पालन किया, उसके बाद घर जाने का फैसला लिया।

वे 1917 में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े। उनके लिए राष्ट्र हमेशा से ही सर्वोपरि था। देश को आजाद करने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे राजनीति के साथ-साथ कूटनीति में भी माहिर माने जाते थे।

×