‘भारत’ कुमार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार

ओपिनियन पोस्ट
Sat, 05 Mar, 2016 15:42 PM IST

नई दिल्ली। भारत कुमार के नाम से मशहूर अभिनेता, निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार को 2015 के 47वें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जाएगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यह जानकारी दी। केंद्र सरकार की ओर से उनके नाम की घोषणा होने के बाद उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया में खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार मिलने पर मैं बेहद आनंद महसूस कर रहा हूं। मैंने दिल से देशभक्ति पर फिल्में बनाई है। इस पल मुझे अपनी फिल्म का गीत याद आ रहा है – भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनता हूं।

बॉलीवुड की कई हस्तियों ने उन्हें फोन करके और सोशल मीडिया पर बधाई दी है। उनके नाम के चयन के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने भी उनसे बातचीत की और उन्हें बधाई दी। इस साल लता मंगेशकर, आशा भोंसले, सलीम खान, नितीन मुकेश और अनूप जलोटा की पांच सदस्यीय ज्यूरी ने फाल्के पुरस्कार के लिए मनोज कुमार के नाम की सिफारिश की। उन्हें पुरस्कार के रूप में एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये नगद और एक शॉल प्रदान किया जाएगा।

78 वर्षीय मनोज कुमार का नाम इस पुरस्कार के लिए कई सालों से लिया जा रहा था। लेकिन इस साल उनके नाम पर अंतिम मुहर लगी। वह वर्ष 1957 से वर्ष 1995 तक फिल्मों में सक्रिय रहे। उन्होंने कई देशभक्ति की भावनाओं वाली फिल्में बनाई। इसलिए उनका नाम भारत कुमार पड़ा। फिल्म उपकार के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1992 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। 60 और 70 के दशक में मनोज की फिल्मों को खूब सफलता मिली थी।

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उन्होंने हरियाली और रास्ता, वो कौन थी, हिमालय की गोद में, दो बदन, उपकार, पत्थर के सनम, नील कमल, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान और क्रांति जैसी यादगार फिल्में बनाई। उन्होंने देशभक्ति वाली फिल्मों का निर्माण व निर्देशन ही नहीं किया बल्कि उसमें अभिनय भी किया। कहा जाता है कि क्रांति बनाते समय पैसे की तंगी के चलते उन्होंने अपना घर तक गिरवी रख दिया। फिल्म जब रिलीज हुई तो सुपर डुपर हिट साबित हुई।

उनका जन्म जुलाई 1937 में अविभाजित भारत के एबटाबाद में हुआ था। दिल्ली के हिंदू कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने फिल्­मों में प्रवेश करने का निर्णय लिया। वर्ष 1960 में उन्हें कांच की गुड़िया नामक फिल्म में पहली बार शीर्ष भूमिका निभाने का मौका मिला। उनकी दो बदन नामक फिल्म को राज खोसला के निर्देशन, मनोज कुमार के अभिनय और रवि के बेहतरीन संगीत तथा शकील बंदायूनी के अमर गीतों के लिए याद किया जाता है।

वर्ष 1965 में शहीद फिल्म से उनकी देशभक्ति के हीरो की छवि बनी। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें जय जवान, जय किसान नामक नारे पर आधारित फिल्म बनाने के लिए कहा था। इस पर उन्होंने उपकार नाम से यादगार फिल्म बनाई।

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