विशेष

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पितृ दोष और श्राद्ध क्या है : श्रीश्री रविशंकर

पितृ दोष क्या है पितृ दोष वह है जब एक आत्मा अपने पुत्रों या पुत्रियों के बारे में अच्छी भावनाएं नहीं रखती। इसका एक उपाय है जिसे ‘तर्पण’ कहते हैं। जो स्वर्गवासी हो गए हैं, उन्हें हम तिल अर्पण करते हैं...

श्राद्ध को लेकर नई पीढ़ी के मन में उठते 10 सवालों के जवाब 

लोपामुद्रा 1- श्राद्ध क्या है? श्राद्ध प्रथा वैदिक काल के बाद शुरू हुई और इसके मूल में वायु पुराण के इस श्लोक की भावना है : ‘मेरे वे पितर जो प्रेत रूप हैं तिलयुक्त जौ के पिंडों से तृप्त हों, साथ...

स्वाधीन भारत की राष्ट्रभाषा होगी हिंदी : सुभाष चंद्र बोस

हिंदी प्रेमियों, बड़ी खुशी के साथ इस नगर में हम लोग आपका स्वागत करते हैं। जो सज्जन कलकत्ते से वाकिफ हैं, उनको यह बताने की जरूरत नहीं है कि कलकत्ते में पांच लाख हिंदी भाषा भाषी रहते हैं। शायद हिंदुस्तान...

हिन्दी दिवस- सौ देशों ने लगाया हिंदी का जयकारा

राकेश चंद्र श्रीवास्तव सौ देशों के माध्यम से 18-20 अगस्त 2018 तक मॉरीशस में 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर पूरे विश्व का दर्शन हुआ। यह कोई मेला नहीं बल्कि महाकुंभ था। पूर्णत: अनुशासित, व्यवस्थित...

विपक्ष को आत्ममंथन की जरूरत, 2019 में BJP -मनोज तिवारी

निशा शर्मा। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन में इस बार ABVP ने चार सीटों में से तीन सीटें अपने खाते में कर ली हैं। छात्र संघ चुनावों के रिजल्ट आते ही यह खबरें बनने लगीं कि 2019 में क्या बीजेपी की ज...

जब भैंस मर गई और मुझे अटल जी को लेकर भागना पड़ा

सुनील वर्मा पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्‍न अटल बिहारी वाजपेयी का देहावसान 94 साल की उम्र में हुआ। लेकिन इस बात को कम ही लोग जानते हैं कि वाजपेयी का अपने जीवनकाल में सबसे लंबा, गहरा और करीबी रिश्‍ता...

जिन्दगी हाशिये पर- अंगूठा चूसने से जिन्दगी के चुस जाने तक

आजमगढ़ के सुदूर पश्चिमोत्तर इलाके में स्थित मेरे गांव सम्मौपुर के एक कुलीन परिवार में अपने पिता के तीसरे सुपुत्र के रूप में जन्मे सूर्यभान मौर्य का अर्थवान नाम ही मुख-सुख के चलते ‘सुभान’ और फिर भोजपुरी...

अटल बिहारी वाजपेयी- समय से आगे युग से परे

जवाहरलाल कौल। अटल बिहारी वाजपेयी स्वतंत्र भारत के एक ऐसे राजनेता थे जो राजनीति के सामान्य दायरे में समा नहीं सकते थे क्योंकि आज जो राजनीति का स्वरूप बन गया है वह लेनदेन या सौदेबाजी का है। राजनीति भी ए...

श्रद्धांजलि- अलविदा सर वी.एस.नॉयपॉल

विजय शर्मा। उपन्यासकार, यात्रा वृत्तांतकार सर विद्याधर सूरजप्रसाद नॉयपॉल (सर वी. एस. नॉयपॉल) ट्रिनिदाद के एक छोटे से स्थान छगुआनास में 17 अगस्त 1932 को पैदा हुए थे। उनकी मां का नाम द्रोपती कपिलदेव (‘क...

प्रसंग- हिंदी के ध्वजवाहक व्यास

राकेश चन्द्र श्रीवास्तव अब जब अगस्त 2018 के तीसरे सप्ताह में मॉरीशस में 11वां विश्व हिंदी सम्मेलन होने जा रहा है और पूरे देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा और हलचल तेज है, ऐसे समय में हिंदी और रा...

डगमगाई दिल्ली की सल्तनत !

निशा शर्मा। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं। सभी पार्टियां चुनावों के परिणामों को खुद के हक में करने के लिए भरपूर कोशिश कर रही हैं। कोई भी पार्टी ये नहीं चाहती कि उसका उठाया कोई कद...

लोकसभा चुनाव 2019- चुनौती बहुमत की

वीरेंद्र नाथ भट्ट नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के असफल होने के तुरंत बाद राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी की घोषणा से देश में 2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर सरग...

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