विशेष

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किसान चाची ने दिखाई जीने की राह

परिवार को दो वक्त की रोटी कैसे मयस्सर हो, इस उधेड़बुन में राजकुमारी देवी ने परंपरागत खेती छोडक़र जो नया रास्ता अख्तियार किया, वह न केवल उनके लिए राम-बाण साबित हुआ, बल्कि अनेक दीगर किसानों-महिलाओं की भी...

सूचना का अधिकार कानून-2005 जानने का अधिकार, जीने का अधिकार

ओपिनियन पोस्ट इस अंक से अपने पाठकों के लिए सूचना के अधिकार कानून पर लगातार जानकारियां प्रकाशित करेगा. पहले अंक में हम आपको सूचना के अधिकार कानून से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब से रूबरू करा रहे हैं. अ...

प्रयागराज ये कुंभ अतुलनीय है

प्रयागराज में ऐतिहासिक कुंभ का आयोजन हो रहा है. देश-विदेश से आए असंख्य श्रद्धालुओं-पर्यटकों की मौजूदगी ने इस भव्य आयोजन को चार चांद लगा दिए हैं. आस्था और विभिन्न संस्कृतियों के इस महा-समागम को हमेशा य...

बीच का रास्ता

युवा लेखक जब प्रकाशक के यहां पहुंचा तो प्रकाशक दो-तीन बड़े सरकारी अधिकारियों से घिरा हुआ था जो अपनी किताबें छपवाने के लिये उसके पास आये थे. लेखक को आधे घण्टे इंतज़ार करना पड़ा. इस प्रकाशक से उसे उसके...

मिसाल बना कांटी गांव

पर्यावरण को लेकर प्रत्येक देशवासी चिंतित है. हर कोई अपने अपने तरीके से समाज को प्रदूषण मुक्त बनाने का प्रयास कर रहा है. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से पंद्रह किलोमीटर दूर स्थित कांटी गांव की आबादी तकर...

कैसे-कैसे पिता

विजय शर्मा आपके बच्चे आपके बच्चे नहीं हैं। वे जीवन की खुद के प्रति लालसा के पुत्र-पुत्रियां हैं। वे आपके द्वारा आए पर आपसे नहीं आए और हालांकि वो आपके साथ हैं पर फिर भी आपके नहीं हैं।’ खलील जिब्रान की...

मॉडन इंडियन- भारत माता की जय

अमीश। मैंने शशि थरूर की बेहतरीन पुस्तक ‘एन इरा आॅफ डार्कनेस’ पढ़ी थी, जो उस भयावहता का अध्ययन है जिसका नाम ब्रिटिश राज था। और मुझे अपने अंदर एक जाना-पहचाना गुस्सा उमड़ता महसूस हुआ; वैसा जैसा मैंने बहुत...

सोशल-  क्या भारत को राम की सबसे ऊंची प्रतिमा की जरूरत है ?

निशा शर्मा। गुजरात में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा सरदार पटेल की बनी है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि अयोध्या में श्रीराम की प्रतिमा बनेगी जो ऊंचाई में सरदार...

मोटरगाड़ी से धंधा कबाड़ का

सत्यदेव त्रिपाठी। उस दिन घर में बैठा था कि दो आवाजें एक साथ आर्इं- कबाड़ खरीदने की गुहार और मोटरगाड़ी का हॉर्न। जितनी सुबह थी, बनारस जैसे अलमस्त शहर में किसी आने-जाने वाले- वो भी गाड़ी से- की उम्मीद कम ह...

साहित्य- रचनाओं के सूत्रधार पशु-पक्षी

विजय शर्मा। साहित्य में पशु पक्षियों को पात्र बनाकर रचनाएं हुई हैं, जो हमें मानवीय संवेदनाओं, मनोभावों और तत्कालीन राजनीतिक व सामाजिक व्यवस्था के एक नए रूप से अवगत कराती हैं। हैदराबाद और डाल्टनगंज में...

सब कुछ के लायक, फिर भी हाशिये पर

सत्यदेव त्रिपाठी। बनारस रहने चले जाने के बाद जब पहली बार मुम्बई आया, तभी से हर बात पे सुमिरनी की तरह एक नाम सुनता रहा- राहुल… मालिया में से कोई सामान उतरवाना है, तो ‘सुबह राहुल आएगा, उतार देगा’&...

चेतन भगत- सद्गुरु, कोई उत्साह तोड़ दे तो खुद को फिर से प्रेरित कैसे करूं

आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी सद्गुरु ‘यूथ  एंड ट्रुथ’ श्रृंखला के तहत युवाओं से उनके व्यावहारिक जीवन की स्थितियों और समस्याओं पर लगातार बातचीत करते रहे हैं। उनके समाधान सुझाते रहे हैं। इस...

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