सुनील वर्मा।
सरकार ने सीबीआई के नए मुखिया के नाम का आधिकारिक रूप से गुरुवार को ऐलान कर दिया। दिल्ली पुलिस कमिश्नर आलोक वर्मा नए सीबीआई निदेशक होंगे । सीबीआई निदेशक के लिए पैनल में शामिल सभी 6 वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों के नाम पर स्क्रीनिंग कमेटी ने लंबे विचार विमर्श के आलोक वर्मा के नाम पर मुहर लगा दी है। लेकिन वे गणतंत्र दिवस के बाद अपना पदभार संभालेंगे । उनके नाम को प्रधानमंत्री समेत तीन सदस्यीय कॉलेजियम ने मंजूरी दी है। आलोक वर्मा की सीबीआइ में यह पहली नियुक्ति है। इसके पहले उन्होंने कभी सीबीआइ में काम नहीं किया था। लेकिन दिल्ली पुलिस के विजलेंस विभाग के अनुभव को देखते हुए उन्हें भ्रष्टाचार की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी का प्रमुख बनाया गया है। वर्मा अगले दो सालों तक सीबीआइ के निदेशक रहेंगे।
आपको बता दें कि सीबीआई में वरिष्ठता के आधार पर निदेशक को नियुक्त करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर भी 17 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी जिस पर अब 20 जनवरी को सुनवाई होगी। हालाँकि पीएमओ ने वर्मा के नाम का एलान कर दिया है । बताया जा रहा है कि कॉलेजियम के के तीनो सदस्यों ने सीबीआई में वर्मा की नियुक्ति को सर्व सम्मति से उनकी बेदाग छवि और वरिष्टता को ध्यान में रखते हुए हरी झंडी दी ।
सूत्रों ने बताया कि कॉलेजियम ने केंद्र सरकार की तरफ से भेजे गए 45 नामों में से अंतिम 6 में नामो पर विमर्श के बाद वर्मा के नाम को मंजूरी दी है । अभी तक गुजरात कैडर के 1984 बैच के आइपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना फिलहाल अस्थायी तौर पर सीबीआई निदेशक का कामकाज देख रहे हैं । अस्थाना अभी सीबीआइ में एडिशनल डॉयरेक्टर हैं। केंद्र में उनकी डीजी रैंक नहीं है, इसलिए उन्हें अभी निदेशक नहीं बनाया जा सकता था । वे फरवरी में प्रमोशन मिलने पर ही डीजी रैंक में आ सकते हैं। 31 दिसंबर को सीबीआइ डॉयरेक्टर अनिल सिन्हा के सेवानिवृत होने से दो दिन पहले सीबीआइ में दूसरे नंबर पर व निदेशक पद के प्रबल दावेदार रूपक दत्ता को हटाकर स्पेशल सेक्रेटरी इंटरनल सिक्योरिटी में भेज दिया गया था। उस समय चर्चा शुरू हो गई थी कि उन्हें जान-बूझकर इसलिए हटाया गया ताकि सीबीआइ में राकेश अस्थाना नंबर तीन से दो पर आ सकें। सिन्हा के सेवानिवृत होते ही अस्थाना को अस्थायी तौर पर निदेशक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसी मसले पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। उनकी मांग है कि सीबीआइ में वरिष्ठता के आधार पर निदेशक नियुक्त किया जाए।
पैनल के पास मौजूद सूची में दिल्ली पुलिस आयुक्त आलोक कुमार वर्मा सबसे वरिष्ठ होने के नाते सीबीआइ निदेशक के बड़े दावेदार थे। बेदाग छवि वाले वर्मा को अगर निदेशक बनने से सरकार पर कोई सवाल खड़ा नहीं होगा। 1979 बैच के आईपीएस अलोक कुमार वर्मा जिन्होंने 1 मार्च 2016 को भीमसेन बस्सी के सेवानिवृत्त होने पर दिल्ली पुलिस के कमिश्नर का कार्यभार संभाला था सीबीआई मुखिया के रूप में पेनल की पहली पसंद थे । बता दें कि सीबीआई के निदेशक का पद 2 दिसंबर से खाली पड़ा था ।
1979 बैच की तेलंगाना कैडर की अरूणा बहुगुणा जो हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी की निदेशक के पद पर कार्यरत हैं उनके नाम की भी चर्चा थी । इनके अलावा 1981 बैच के अधिकारी और महाराष्ट्र पुलिस के डीजी सतीश माथुर भी सीबीआई निदेशक बनने की दौड़ में शामिल थे । 1980 बैच की तमिलनाडु कैडर की महिला आईपीएस अर्चना रामसुंदरम के नाम पर भी सीबीआई निदेशक के रूप में विचार किया गया । अर्चना रामसुंदरम इस वक्त सशस्त्र सीमा बल की महानिदेशक के रूप में कार्यरत है और देश में किसी अर्द्धसैनिक बल के सर्वोच्च पद पर विरासित होने वाली पहली महिला पुलिस अधिकारी हैं । अर्चना रामसुंदरम 2014 में उस समय सुर्खियों में आई थी जब केंद्र ने सीबीआई में एडिशनल डायरेक्टर के रूप में प्रतिनियुक्ति दी थी, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने जब सर्वोच्च न्यायालय में जब उनकी प्रतिनियुक्ति को चुनौती दी थी जिसके बाद अर्चना को क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का मुखिया बनाया गया।
1979 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस कृष्ण चौधरी अभी आईटीबीपी के महानिदेशक पद पर तैनात हैं । वे आरपीएफ के मुखिया भी रह चुके है। सीबीआई निदेशक के रूप में उनके नाम पर भी विमर्श हुआ ।

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