गुस्से में संन्यासिन प्रज्ञा सिंह ठाकुर

ओपिनियन पोस्ट
Mon, 13 Jun, 2016 14:31 PM IST

डॉ संतोष मानव। संन्यासिन प्रज्ञा सिंह ठाकुर उर्फ स्वामी पूर्ण चेतनानंद गिरी कड़े पहरे में रहती हैं। आठ साल से वह गिरफ्तार हैं और लगभग इतने ही समय से देश के विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। भोपाल के पंडित खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल में दो साल से उनका इलाज चल रहा है। इससे पहले मुंबई के अस्पताल में थीं। डॉक्टरों व परिजनों के अलावा दूसरा कोई उनसे मिल-बोल नहीं सकता। साध्वी यदा-कदा ही अखबारों की सुर्खियां बनती हैं। मई में वह अचानक कई दिनों तक सुर्खियों में रहीं तो इसके कारण थे। दरअसल, उन्होंने उस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोला था जो पिछले कई माह से संतों की सेवा में ही लगे हैं। संत भी चौहान की प्रशंसा करते हैं।
मालेगांव बम विस्फोट कांड और मध्य प्रदेश के देवास जिले के संघ कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या की आरोपी हैं साध्वी। मालेगांव बम विस्फोट कांड में नाम आने के बाद उन्हें पहली महिला हिंदू आतंकवादी कहा गया था। हालांकि नए अतिरिक्त आरोप पत्र में एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने कहा है कि साध्वी के खिलाफ मालेगांव कांड में लिप्त होने के कोई सबूत नहीं हैं लेकिन कोर्ट का फैसला आना बाकी है।

नाराजगी की वजह
हुआ यूं कि उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ शुरू होते ही उन्होंने कुंभ स्नान व महाकाल के दर्शन की इच्छा जताई। इसके लिए उन्होंने देवास कोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने चार मई को सरकार से कहा कि साध्वी को एंबुलेंस व पुलिस सुरक्षा में उज्जैन ले जाया जाए पर सरकार ने चुप्पी साध ली। पुलिस की ओर से कोर्ट में कहा गया कि भोपाल से साढ़े आठ सौ जवान उज्जैन में हैं। पुलिस बल की कमी है। साध्वी की सुरक्षा को खतरा है। ऐसे में उन्हें उज्जैन ले जाना ठीक नहीं होगा। कोर्ट को यह जवाब चुपचाप भेज दिया गया। इसी बात से वह नाराज हो गर्इं। उनके सहयोगियों ने कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई। वहीं साध्वी ने 16 मई से अन्न त्याग दिया। दवा लेना भी बंद कर दिया। कहा कि अगर उज्जैन नहीं ले जाया गया तो 21 मई को रात आठ बजे के बाद प्राण त्याग देंगी। इसी के साथ अस्पताल में पहरा और सख्त कर दिया गया। अनशन के 24 घंटे के अंदर ही साध्वी की हालत खराब हो गई।
उधर, 17 मई को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने मुख्यमंत्री से पूछा- साध्वी के बारे में क्या करना है। मुख्यमंत्री का जवाब था- इन बातों के लिए मंत्रिमंडल की बैठक नहीं होती। इस पर अलग से बात हो सकती है। इस बीच कोर्ट ने फिर कहा कि साध्वी को उज्जैन ले जाया जाए। अब सरकार को चिंता होने लगी। 18 मई को दिन में उन्हें भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच डॉक्टरों की टीम के साथ उज्जैन ले जाया गया। भोपाल से तीस पुलिसकर्मी साथ गए। वहीं उज्जैन में सौ पुलिसकर्मियों के पहरे में रही। उन्होंने भारी संख्या में जुटे मीडिया कर्मियों के सामने भोपाल व उज्जैन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर प्रशंसा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्र भक्त हैं। देश के लिए सोचते हैं। उन्हें संतों का समर्थन है। मुख्यमंत्री ने बहुत दुख दिया। उन पर विश्वास नहीं। वे संत विरोधी हैं। उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। वे संत भक्त होते तो मैं आठ साल से जेल में नहीं रहती। उन्होंने कहा कि मैं आतंकवादी नहीं हूं। ठीक से जांच करवाओ। मैं गुनहगार तो सरेआम गोलियों से भून देना। जिन्होंने झूठे आरोप लगाए, फंसाए, उन्हें ठाकुरजी सजा दे चुके हैं। जो बच गए उन्हें भी सजा मिलेगी।
उनके संगठन ने 18 मई की शाम उज्जैन में रुद्रसागर स्थित जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति के कैंप में प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया था। पुलिस ने इसे रोकने का प्रयास किया पर साध्वी नहीं मानी। उसी शाम उन्होंने अनशन तोड़ा। 19 को क्षिप्रा स्नान व महाकाल के दर्शन किए। इसी दिन देर शाम फिर भोपाल के अस्पताल पहुंचा दी गई। हालांकि उनके महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर भी विवाद हुआ। कहा गया कि वह कैसे गर्भगृह में गर्इं। मंदिर प्रशासन ने कहा कि वह साध्वी हैं इसलिए जा सकती हैं। इसके उलट कलेक्टर ने कहा कि मंदिर प्रशासन ने नियम तोड़े हैं, उन पर कार्रवाई होगी। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि साध्वी को कैंसर है। दो दिन के अनशन व दवा छोड़ देने के कारण उनकी हालत खराब हो गई। तीन व्यक्तियों के सहयोग से वह चल पा रही थी। एक-दो दिन और देर होती तो उनकी जान पर बन आती।

READ  अखिलेश ने क्यों बर्खास्त किए अपने दो मंत्री ?

कौन हैं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर
साध्वी मूलत: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के लहार तालुका की रहने वाली हैं। उनके पिता आयुर्वेद के डॉक्टर थे जो परिवार सहित गुजरात में सूरत के पास बस गए। साध्वी के निकट सहयोगी व उनकी छोटी बहन के पति भगवान झा कहते हैं कि साध्वी दस साल ही गुजरात में रहीं। उनका अधिकतर समय मध्य प्रदेश में गुजरा है। प्रज्ञा सिंह ठाकुर पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय थीं। 2007 में अवधेशानंद गिरी से दीक्षा लेकर संन्यासिन हो गर्इं। उन्होंने जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति के नाम से अपना संगठन भी बनाया जिसकी वह प्रमुख हैं और इंदौर के अरविंद जैन सचिव। 

×