अभिषेक रंजन सिंह, नईदिल्ली।

रविवार (19 मार्च) को लखनऊ स्थित स्मृति उपवन में बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस तरह प्रदेश में भाजपा का चौदह वर्षों का राजनीतिक वनवास भी खत्म हो गया। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। राज्यपाल रामनाइक ने मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। साथ ही दो उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को भी शपथ दिलाई गई। योगी टीम में 22 कैबिनेट मंत्रियों समेत कुल 44 मंत्रियों ने शपथ ली।

इस शपथ ग्रहण समारोह पर न केवल देश की मीडिया, बल्कि विदेशी मीडिया की नजरें भी टिकी थीं। दुनियाभर के तमाम अखबारों में उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुईं। पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश के तमाम अखबारों में अलग-अलग शीर्षक से खबरें और विशेष आलेख प्रकाशित हुए। पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी अखबार डॉन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत से यह साबित हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की लहर अब भी बरकरार है। अखबार लिखता है कि एक कट्टर हिंदूवादी छवि के नेता योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा और आरएसएस के उस नीति का हिस्सा है, जिसमें भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अवधारणा है। पाकिस्तान के अन्य अंग्रेजी एवं उर्दू अखबारों की भी कमोबेश यही राय है। हालांकि, फ्राइडे टाइम्स जैसे कुछ अखबारों का यह भी कहना है कि भारत के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिली बड़ी जीत के पीछे कहीं न कहीं विपक्षी पार्टियों का एकजुट नहीं होना भी था।

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वहीं बांग्लादेश के भी लगभग सभी अखबारों में भी उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ी खबरें पहले पन्ने पर प्रकाशित हुईं। बांग्लादेश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार ‘ द डेली स्टार’ में ‘भगवा लहर की वापसी’ शीर्षक से एक आलेख प्रकाशित है, जिसमें उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिली बड़ी जीत का विश्लेषण किया गया है। अखबार लिखता है कि प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में 325 सीटों पर भाजपा की कामयाबी इस बात का सबूत है कि पार्टी को राज्य में सभी वर्गों के मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ है। वहीं बांग्लादेश न्यूज के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस बार मुसलमानों ने भी भाजपा को वोट दिया है। कई अखबारों का यह भी मानना है कि योगी आदित्यनाथ की छवि एक कट्टरवादी हिंदू नेता की है, लेकिन अपने भाषणों में उन्होंने जिस तरह सभी लोगों को साथ लेकर चलने की बात कही है, उसके सकारात्मक नतीजे निकाले जाने चाहिए। द डेली स्टार अपने आलेख में यह भी लिखता है कि इसमें किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री क्यों बनाया गया। बल्कि हिंदुत्व की राजनीति भाजपा और आरएसएस के लिए कोई पहली और नई बात नहीं है।