पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादियों के कैंप पर भारतीय सेना की ओर से किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से नवाज शरीफ सरकार और पाक सेना के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला पाक सेना के नवाज सरकार को दिए उस अल्टीमेटम का है जिसमें सरकार को पांच दिन का वक्त देते हुए कहा गया है कि वह इस बात की जांच करे कि 3 अक्टूबर को सेना और सरकार के बीच हुई बैठक की खबर लीक कैसे हुई। यह खबर द डॉन के रिपोर्टर सिरिल अलमीडा ने ब्रेक की थी। सेना के इस अल्टीमेटम को देखते हुए इस बात की आशंका बढ़ती जा रही है कि पाकिस्तान में फिर से सैन्य तख्तापलट हो सकता है और सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ नवाज सरकार को बेदखल कर सत्ता पर कब्जा जमा सकते हैं।

यह आशंका इसलिए भी है कि राहिल शरीफ अगले महीने रिटायर होने वाले हैं और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान जिस तरह से पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ चुका है, ऐसे में नवाज शरीफ उन्हें सेवा विस्तार देंगे इसकी संभावना कम ही है। यह बात जगजाहिर है कि आतंकवादियों का पालन पोषण पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई किस तरह से करती है। नवाज शरीफ की पार्टी के नेता सेना पर इस बात का ठीकरा फोड़ चुके हैं कि आतंकवादियों को समर्थन देने के चलते ही पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ता जा रहा है वहीं सेना इसके लिए नवाज सरकार की कूटनीतिक विफलता को दोषी मान रही है। सेना और सरकार के बीच 3 अक्टूबर को हुई बैठक में इन्हीं मुद्दों पर टकराव हुआ था जिसके बाद से दोनों के रिश्ते और बिगड़ गए हैं। ऐसे में राहिल शरीफ के पास सैन्य तख्तापलट का सटीक बहाना है।

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ऐसा कर वह यह जता सकते हैं कि नवाज सरकार हर मोर्चे पर विफल रही जिसकी वजह से पाकिस्तान दुनिया से कटता जा रहा है। वैसे भी राहिल शरीफ ने सेना प्रमुख बनने के कुछ महीनों बाद से ही सरकार पर अपना दबदबा बढ़ाना शुरू कर दिया था। जानकार तो यह भी कहते हैं कि सेना की सहमति के बगैर नवाज सरकार कोई फैसला नहीं ले पाती। अब जबकि राहिल शरीफ के रिटायरमेंट का समय आ गया है तो नवाज शरीफ के लिए यह मुफीद मौका है कि वह अपनी पसंद का सेना प्रमुख चुन कर सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करें। वहीं, दूसरी तरफ राहिल शरीफ देश के हालात का हवाला देते हुए तख्तापलट का पुराना नुस्खा आजमा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो नवाज शरीफ पाकिस्तान के पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जो दो बार सैन्य तख्तापलट के शिकार होंगे। इससे पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर देश छोड़ने को मजबूर कर दिया था। वैसे भी पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट का इतिहास काफी पुराना है।

सेना और सरकार में बढ़ा तनाव

पाक सेना और नवाज सरकार में  ‘द डॉन’ अखबार में छपी खबर को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया हैं। 14 अक्टूबर को हुई कॉर्प्स कमांडर की बैठक में सेना और सरकार के बीच का तनाव साफ नजर आया। इस बैठक में खबर के लीक होने को लेकर सेना ने प्रधानमंत्री कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया। सेना ने नवाज सरकार को 5 दिनों का वक्त देते हुए कहा है कि सरकार इस बात की जांच करे कि 3 अक्टूबर को हुई बैठक की सारी जानकारी सिरिल अलमीडा को कैसे पता चली। सेना ने कहा है कि ‘द डॉन’ में छपी खबर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इतना ही नहीं उन्होंने सिरिल अलमीडा की इस खबर को झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। हालांकि सेना ने यह साफ नहीं किया कि कैसे कोई झूठी और मनगढ़ंत खबर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है।

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तीन बार खबर की जांच की – अलमीडा

‘द डॉन’ के संपादक ने इस रिपोर्ट का समर्थन करते हुए कहा था कि तथ्यों की कई बार जांच कर इसकी पुष्टि की जाती है। वहीं अलमीडा ने अपने स्तंभ ‘ए वीक टू रिमेम्बर’ में लिखा है कि बैठक की खबर छापने से पहले कुछ भी चूक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि खबर छापने से पहले उन्होंने उसे तीन बार क्रॉस चेक किया था। उन्होंने लिखा है कि सेना और सरकार के बीच टकराव की खबर तो उन्हें बैठक के दिन यानी तीन अक्टूबर को ही मिल गई थी मगर क्रॉस चेक करने के बाद उसे छह अक्टूबर को प्रकाशित किया गया। इस खबर के छपने के बाद नवाज सरकार ने अलमीडा पर देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था मगर पाकिस्तानी मीडिया के भारी विरोध और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते यह रोक हटा ली गई।