राष्ट्रपति को घूस देने पर सैमसंग प्रमुख गिरफ्तार

ओपिनियन पोस्ट
Fri, 17 Feb, 2017 16:51 PM IST

दुनिया की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में शुमार दक्षिण कोरिया की सैमसंग के मालिक और ग्रुप चीफ जेवाई ली को राष्ट्रपति को रिश्वत देने के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। दो कंपनियों के विलय में सरकार का समर्थन हासिल करने के लिए दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्यून हेई को चार करोड़ डॉलर (करीब 260 करोड़ रुपये) की घूस देने का ली पर आरोप है। पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति के खिलाफ इस स्कैंडल के कारण महाभियोग चलाया गया था। हेई लंबे समय से ली की मित्र भी हैं।

ली के खिलाफ गबन, विदेशों में संपत्तियों को छुपाने और झूठे साक्ष्य देने के आरोपों की भी जांच हो रही है। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पिछले महीने ली को गिरफ्तार करने के अभियोजकों के पहले प्रयास को खारिज कर दिया था और कहा था कि ली की गिरफ्तारी को न्यायसंगत ठहराने के लिए सबूतों का अभाव है। इसके बाद अभियोजन पक्ष के वकीलों ने अदालत के समक्ष घूस लेने समेत कई अन्य सबूत भी पेश किए थे। इसके बाद गुरुवार को अदालत ने ली को गिरफ्तार करने की इजाजत दी। हालांकि जज ने सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रेसीडेंट पार्क सांग-जिन को गिरफ्तार करने की मांग को खारिज कर दिया।

अभियोजन पक्ष के वकील ने सैमसंग मुखिया के खिलाफ मुकदमे की शुरुआत के लिए 10 दिन का वक्त मांगा है। मुकदमे की शुरुआत के बाद अदालत को तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा। सैमसंग और ली ने इस मामले में कुछ भी गलत करने से इनकार किया है। ली को गिरफ्तार किए जाने के बाद कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि भविष्य में अदालती कार्यवाही के दौरान पूरा सच निकलकर सामने आए।’

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देश को हिलाकर रखने वाले इस घोटाले में कथित भूमिका को लेकर ली से कई बार पूछताछ की गई। सैमसंग प्रमुख की गिरफ्तारी कंपनी के लिए एक झटका है, जिसकी दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका है। सैमसंग दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी है। गैलेक्सी नोट 7 में आ रही खराबियों के बाद वापसी से कंपनी पहले ही मुश्किल में है। अगर ली को सजा हुई तो सैमसंग के बिजनेस पर असर पड़ेगा।

एक और केस में सैमसंग प्रमुख पर आरोप है कि उन्होंने प्रेसीडेंट की करीबी के फाउंडेशन को करीब 1.7 अरब रुपये की मदद की। बताया गया कि ये रकम नेशनल पेंशन फंड के सपोर्ट में है। लेकिन असल में ये 2015 में सैमसंग की दो संस्थाओं के मर्जर के लिए दी गई थी।

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