अजय विद्युत
स्थान- नोएडा सेक्टर 15 मेट्रो स्टेशन। दिन- सोमवार। तारीख- 10 जुलाई। समय- 9.20 सुबह। अपने काम पर जाने के लिए यात्रियों की लंबी कतार लगी थी एक गेट पर। वहीं दूसरे गेट पर सुरक्षाकर्मी जैसे यात्रियों के इंतजार में खड़ा था। हैरान होने की बात नहीं है। वहां यात्रियों की जांच के लिए तो सुरक्षाकर्मी मौजूद था। लेकिन सामान की जांच करने वाली मशीन को संचालित करने के लिए सुरक्षाकर्मी नहीं था। अमूमन स्टाफ की कमी से ऐसा हो जाता है। चूंकि सुबह के वक्त काम पर जाने वाले लगभग सभी यात्री कम से कम एक झोला बैग अपने पास रखते ही हैं इसलिए कोई उस गेट से नहीं गुजर रहा था।
यात्रियों की कतार लगातार लंबी होती जा रही थी। काम पर जाने की जल्दी में सब थे। उधर दूसरा गेट बिल्कुल सूना। क्या वाकई स्टाफ की कमी के कारण यात्रियों को इतनी मुसीबत उठानी पड़ रही है या मामला कुछ और है- ‘ओपिनियन पोस्ट’ ने सच्चाई जानने की कोशिश की। अपना बैग उस मशीन में डाल दिया जिससे यात्री गुजर रहे थे और खुद दूसरे गेट से बिना सामान निकलने का मन बनाया। सिक्यूरिटी गार्ड ने रोक दिया- ये नियम के खिलाफ है। सामान लेकर जाना है तो आपको लाइन लगानी होगी। संवाददाता- लेकिन इस मशीन से सिर्फ बैग जाएगा, मैं दूसरे गेट से जाऊंगा। उधर से एक भी आदमी नहीं जा रहा। बिल्कुल खाली है। सिक्यूरिटी गार्ड- लेकिन यह गलत है। आप नियम तोड़ रहे हैं। संवाददाता- ठीक है। फिर मोबाइल से फोटो खींची जिसमें एक गेट पर यात्रियों की भारी भीड़ और ठीक बगल में दूसरे गेट पर एक भी यात्री नहीं।
तभी दो तीन सुरक्षाकर्मी आए और यहां फोटो खींचना मना है कहते हुए मोबाइल हाथ से छीन लिया। आईकार्ड दिखाने को कहा और उसे भी अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने कहा कि आपने नियम तोड़कर फोटो खींची और सुरक्षाकर्मियों से भी कहासुनी कर अराजकता पैदा की है। जिसका सीसीटीवी फुटेज है। छह कैमरे लगातार रिकार्डिंग कर रहे हैं।
पर यहां तो कहीं नहीं लिखा है कि फोटो खींचना मना है- यह कहने पर उन्होंने पीछे गैलरी में थोड़ा घुसकर एक बोर्ड दिखाया जिस पर कई निर्देश चित्रित थे जिनमें एक फोटो न खींचने को लेकर था। स्थान ऐसा था जिसके सामने से यात्री नहीं गुजरता था यानी उस पर किसी की नजर पड़ने की कोई संभावना नहीं थी।
दूसरे गेट पर सामान की जांच करने वाली मशीन पर कोई क्यों नहीं है। इस पर सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि मशीन ठीक नहीं है। लेकिन मशीन पर हरा बल्ब जल रहा है जिससे लगता है कि मशीन चालू है- तब सुरक्षाकर्मियों ने जवाब दिया कि स्टाफ नहीं है।
इसी दौरान दूसरे गेट पर एक सुरक्षाकर्मी आया और सामान की जांच करने वाली मशीन को चालू कर दिया। आधे यात्री उस गेट से निकल गए और इस तरह से यात्रियों की जो बढ़ती भीड़ थी वह एकदम बिल्कुल छंट गई।
अभी तक तो मशीन भी खराब थी और स्टाफ भी नहीं था, ये अचानक कैसे मशीन ठीक हो गई और स्टाफ भी प्रकट हो गया- जवाब में सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि आपने जो हंगामा किया उसके कारण महत्वपूर्ण काम में लगा हमारा एक आदमी अपना काम छोड़कर यहां सामान जांच करने आ गया।
थोड़ी देर बाद देखा कि जो सुरक्षाकर्मी आया था वह जा चुका था। और सामान जांच करने वाली मशीन का हरा बल्ब भी अब नहीं दिख रहा था क्योंकि मशीन के आगे बोर्ड लगा दिया गया था- नॉट इन वर्क।
यह साफ हुआ कि पीक आवर्स में मेट्रो यात्रियों की भीड़ के बावजूद मेट्रो प्रशासन लापरवाही दिखाता है और उसकी आरामतलबी की वजह से ही गेट पर लंबी कतारें लग जाती है। मेट्रो प्रशासन को पूरे मामले की जांच करनी चाहिए और इसके लिए बहुत कुछ नहीं करना है केवल मेट्रो स्टेशन के एंटरेंस प्वाइंट का दस जुलाई को सुबह 9.20 से 9.40 तक बीच मिनट का सीसीटीवी फुटेज चेक करना है। यात्रियों की सहूलियत के सारे दावों और प्रशासन की लापरवाही की कलई खोलने के लिए इतना काफी है।
इस बारे में मेट्रो प्रशासन का पक्ष जानने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) के अधिकारी अनुज दयाल से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की है। अत: वही कोई टिप्पणी कर सकता है।

सीआईएसएफ के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर डिप्टी कमांडेंट मंजीत सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि अगर मशीन सुचारू रूप से कार्य न कर रही हो तो हम उसे चालू नहीं करते हैं। हमें पूरे मामले की जानकारी भेज दें तो हम बता पाएंगे कि वहां किन स्थितियों में ऐसा हुआ।

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