कश्‍मीर के सांबा में मिली सुरंग का राज

जम्मू।

आतंकी किस तरह भारत में घुसपैठ कर उपद्रव करते हैं, उसका खुलासा जम्मू कश्मीर के सांबा जिले में मिली 20 मीटर लंबी सुरंग से हुआ है। सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ ने इस सुरंग का पता लगाया है। माना जा रहा है कि इसका इस्तेमाल आतंकी भारत में घुसने के लिए करते थे। बीएसएफ डीआईजी धर्मेंद्र पारीक ने सुरंग मिलने की पुष्टि की है। ये सुरंग रामगढ़ सेक्टर में मिली है।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर और उसके पहले मार्च में भी इंटरनेशनल बॉर्डर पर सुरंग मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बीएसएफ की स्पेशल टीम ने इनका पता लगाया था। बीएसएफ की एंटी टनल एंड डिटेक्टिंग टीम सोमवार को रामगढ़ सेक्टर में सर्चिंग कर रही थी। इसी दौरान उसे एक जगह पर कुछ शक हुआ। जांच के दौरान वहां 20 मीटर लंबी सुरंग मिली। इसका एक सिरा भारत और दूसरा पाकिस्तान में था। यह इंटरनेशनल बॉर्डर पर लगी फेंसिंग के नीचे से गुजर रही थी।

ये टनल ढाई फीट चौड़ी और ढाई फीट ऊंची है। बीएसएफ डीआईजी धर्मेंद्र पारीक ने यह जानकारी मीडिया को दी। पारीक ने कहा कि शक है कि इस टनल का इस्तेमाल आतंकवादी भारत में घुसने के लिए करते थे। उन्होंने कहा कि ये टनल पूरी तरह तैयार नहीं थी। पाकिस्तानी रेंजर्स की जानकारी के बिना इस तरह की टनल नहीं बनाई जा सकती। पारीक ने कहा कि फ्लैग मीटिंग के दौरान हम इस टनल का मुद्दा पाकिस्तानी रेंजर्स के सामने उठाएंगे।

पिछले साल आरएसपुरा में भी मिली थी टनल

पिछले साल मार्च में भी बीएसएफ ने आरएसपुरा सेक्टर में एक सुरंग का पता लगाकर पाकिस्तान की साजिश को नाकाम कर दिया था। अखनूर सेक्टर में भी यही हुआ था। आरएसपुरा सेक्टर में मिली सुरंग 22 फीट लंबी थी। इसे बनाने के लिए लेटेस्‍ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद बीएसएफ ने कहा था कि बिना पाकिस्तानी रेंजर्स की मदद के इस तरह की टनल बनाना नामुमकिन है। बीएसएफ ने तब पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ मीटिंग में इस हरकत को लेकर विरोध दर्ज कराया था।

बीएसएफ ने साफ कहा था कि इस तरह की हरकतों का भारत करारा जवाब देगा। पिछले साल दिसंबर में बीएसएफ को जम्मू के चमलियाल में 80 मीटर लंबी और 2X2 फीट की एक सुरंग मिली थी। तब बीएसएफ ने कहा था कि सांबा सेक्टर में मारे गए तीन आतंकियों ने इसी का इस्तेमाल किया था। बीएसएफ के डीजी केके शर्मा ने कहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पैरा मिलिट्री फोर्स के पास आतंकी घुसपैठ की पुख्ता जानकारी थी। इसलिए आतंकियों का पता लगाना और उन्हें काबू करना मुमकिन हो पाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *