नई दिल्‍ली। नोटबंदी और कालेधन पर नकेल लगाने के प्रयासों को सबसे ज्‍यादा पलीता उन बैंक मैनेजरों ने लगाया है, जो अब भी सेटिंग के व्‍यापार में लगे हैं। वे कैश की कृत्रिम किल्‍लत दिखाकर नए नोट गलत हाथों में दे रहे हैं और आम जनता परेशान है। इतनी बड़ी जिम्‍मेदारी संभालने वाले ये देशद्रोही आखिर कैसे गिरफ्त में आ रहे हैं, यह जानना रोचक होगा। शायद यही वजह है कि भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार की ओर से किए जा रहे तमाम प्रयास अब भी नाकाफी साबित होते दिख रहे हैं।

हालांकि,  नोटबंदी जैसा कड़ा कदम उठाकर सरकार ने काफी हद तक कालाधन रखने वालों पर नकेल कस दी है। लेकिन कई जगहों पर कालेधन को सफेद करने का काम बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से अब भी जारी है।

ऐसे ही एक मामले में सोमवार को सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक टीम ने राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित एक्सिस बैंक के दो मैनेजरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान शोभित सिन्हा और विनीत सिन्हा के तौर पर हुई है। इन दोनों पर 40 करोड़ रुपये के कालेधन को सफेद करने का आरोप है। दोनों मैनेजरों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

एक मैनेजर को दिल्ली से आई प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने छापा मारकर लखनऊ से गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने लखनऊ में एक जगह से कथित रिश्वत के भुगतान के तौर पर बैंकरों को दी गई सोने की एक छड़ जब्त की है।

READ  ये लाइन नहीं आसां...

कालधन सफेद करने के आरोपी ये दोनों मैनेजर बदले में सोना लेते थे। ईडी ने इस मामले में कुछ और लोगों की संलिप्तता के भी संकेत दिए हैं। ईडी ने कहा है कि जल्द ही कुछ और लोग भी गिरफ्तार हो सकते हैं।

वहीं, एक्सिस बैंक ने इस बारे में बयान जारी कर कहा कि बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की है और संबंधित संस्थाओं के साथ सहयोग कर रही है। यह बैंक कॉपरेरेट प्रशासन के उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है और स्थापित आदर्श आचार संहिता से अपने कर्मचारियों के किसी भी विपथन को कतई बर्दाश्त नहीं करता।

एक्सिस बैंक के मुताबिक, इस विशेष मामले में बैंक ने कथित आरोपी कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया तथा जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार,  इस मामले में अनेक लोगों और व्यापारियों के बैंक खाते एजेंसी की जांच के दायरे में हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने दोनों आरोपियों तथा अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस की एफआईआर के आधार पर आपराधिक शिकायत दर्ज की है। यह मामला दिल्ली पुलिस के समक्ष तब आया था, जब कुछ समय पहले दो व्यक्तियों को 3.5 करोड़ रुपये मूल्य के नए नोटों के साथ पकड़ा गया था।

इस मामले में आयकर विभाग भी हरकत में आया और उसने बैंक की शाखा का सर्वे किया तथा बाद में दोनों आरोपियों के रिहायशी परिसरों की भी तलाशी ली गई।