मिशन 2019 के लिए क्या हो पायेगा महागठबंधन ?

ओपिनियन पोस्ट
Fri, 17 Mar, 2017 16:53 PM IST

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नई दिल्ली। यूपी चुनाव के बाद जहां जानकारों को 2019 के लिए बीजेपी की राह आसान दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विरोधी पार्टियों के लिए चिंतन करने का वक्त आ गया है। या यूं कहें कि उनके लिए आत्ममंथन का वक्त हाथ से निकलता जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर का यह कहना कि इस वक्त कांग्रेस अकेले मोदी को नहीं हरा सकती और राहुल गांधी को वही करना चाहिए जो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2004 में किया था। यानी यूपीए के तहत विविध मुद्दों से जुड़ी पार्टियों को एकजुट करने का काम किया था, वैसा ही कुछ इस वक्त राहुल गांधी को तुंरत करना चाहिए , और 2019 के लिए एक महागठबंधन की तैयारी करनी चाहिए । अय्यर के कथन पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने बयान जारी कर कहा है कि ‘सौ लंगड़े मिलकर भी एक पहलवान नहीं बन सकते।’
गौरतलब है कि अय्यर ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि कांग्रेस को ज़मीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है और इसके लिए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के दिए गए उस भाषण को याद किया जो उन्होंने 1936 में लखनऊ कांग्रेस में दिया था। उन्होंने कहा था ‘हम आम जनता से संपर्क खो चुके हैं और उनसे मिलने वाली ऊर्जा से अछूते रह गए हैं, हम सूख रहे हैं और कमज़ोर पड़ रहे हैं और इस तरह हमारी संस्था अपनी ताकत खोते हुए सिमटती जा रही हैं।’ अय्यर ने कहा कि सबको मिलकर चलने वाले रास्ते को दोबारा पकड़ने के लिए चुनावों में लड़ना और उसे जीते जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए नेहरू का 1936 का विश्लेषण और सोनिया गांधी के 2004 में अपनाए गए यथार्थवाद रवैये को जोड़ना होगा। मौजूदा हालात में कांग्रेस को पार्टी में समावेश न करके गठबंधन में विभिन्न पार्टियों के समावेश पर विचार करना होगा।
मणिशंकर अय्यर ने यह भी साफ किया कि कांग्रेस में राहुल गांधी की जगह कोई नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि ‘यह हमारी पार्टी पर निर्भर करता है कि हम किसक़ो चुनेंगे, हमारी पार्टी में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कि राहुल के खिलाफ खड़ा होना चाहता है, यदि कोई है तो खड़े हो जाएं, देखेंगे क्या होता है।’
अय्यर ने कहा पार्टी के संगठन में बड़े बदलावों की जरूरत है। युवा नेताओं को महासचिव पद पर और अनुभवी नेताओं को कार्यसमिति में जगह देनी होगी और इसके अलावा क्षेत्रीय नेताओं को मजबूत करना होगा। अय्यर ने कहा कि पंजाब की जीत मजबूत क्षेत्रीय नेता की जीत है, इससे हमें सीख लेनी होगी।
जब अय्यर से पूछा गया कि क्या आज अकेले कांग्रेस सक्षम है बीजेपी को रोकने में तो जवाब मिला – ‘यह सवाल करने की क्या जरूरत है। आंकड़े देख लीजिए, साफ नज़र आता है। मूर्ख ही होगा जो कहेगा कि आज के दिन मोदी को अकेले हम हरा सकते हैं, लेकिन बुद्धिशाली होगा जो कहेगा कि 2019 में हम जीत सकते है और हम जीत जाएंगे।’
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सी पी जोशी ने इस बीच कहा कि पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी पहले ही शुरू कर चुकी है और भाजपा को ‘कड़ी चुनौती’ देगी। जोशी ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पूरा राजनीतिक विमर्श बदल गया है और नई चुनौतियां सामने आ गई हैं, जिनके लिए पार्टी को देश भर में अन्य पार्टियों से तालमेल करना होगा ताकि भाजपा का मुकाबला किया जा सके। ये प्रयोग सफल होंगे और बिहार इसका उदाहरण है। इसमें सपा और बसपा को भी साथ लाने की कांग्रेस कोशिश करेगी।
जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने भी कहा है कि जब तक देश के तमाम राजनीतिक दल भाजपा को हराने के लिए एक मंच पर नहीं आते हैं तब तक प्रधानमंत्री मोदी को हराना संभव नहीं है।
यूपी में क्षेत्रीय दलों की पराजय के बाद विपक्षी महागठबंधन के आसार तो साफ नजर आ रहे हैं पर इसका चेहरा कौन होगा ये साफ नहीं हो पा रहा है । कांग्रेस राहुल गांधी के अलावा किसी और चेहरे पर शायद ही राजी होगी लेकिन जदयू ने साफ स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही महागठबंधन का चेहरा हो सकते हैं और मोदी को टक्कर देने के लिए सबसे मजबूत प्रधानमंत्री उम्मीदवार भी।

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