साल नया… ख्वाब नया…

…नया साल से सबको कुछ न कुछ अपेक्षा रहती ही है। मेरी आशा तो यह रहेगी कि नये साल में रामचंद्र श्रृंखला की तीसरी किताब प्रकाशित हो जाए जिसे मैं लिख रहा हूं। व्यक्तिगत तौर पर इस वक्त मेरा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट यही है। जहां तक देश का सवाल है तो आर्थिक सुधार हो रहा है, गरीबी कम हो रही है। ये मोमेंटम मोटे तौर पर नब्बे के दशक से ही बनना शुरू हो गया था। दिशा एकदम सही है। मैं चाहूंगा कि 2018 में विकास की रफ्तार तेज हो और वह आम आदमी की जिंदगी में भी दिखाई दे। शार्ट टर्म में तो उतार चढ़ाव होता रहता है लेकिन आप लांग टर्म में मेरे हिसाब से देखें तो देश सही दिशा में जा रहा है।
…न्यू ईयर इव पर मैं बाहर कहीं पार्टी करने नहीं जाता। हर जगह इतनी भीड़ हो गई है कि आप कहां बैठेंगे और फिर हर चीज इतनी महंगी भी हो जाती है उस दिन। इसलिए पिछले कई सालों से मैंने न्यू ईयर इव पर पार्टी देना ही बंद कर दिया है। घर पर ही रहता हूं। पार्टी करनी ही है तो किसी और दिन कर लेंगे। लेकिन नया साल तो आप अपने घर में परिवार के साथ भी अच्छे से मना सकते हैं। या दोस्तों के साथ उनके घर पर भी मना सकते हैं। बाहर जाने की क्या जरूरत है।
…हाल की बात बताता हूं। मेरे घर में एक महिला काम करती थीं। अब काफी बुजुर्ग हैं। चार बच्चों हैं उनके तीन लड़कियां एक लड़का। वह गांव से आई थीं और काफी कठिनाई से लोगों के घर काम कर बच्चों को अंग्रेजी में पढ़ाया। उनकी बेटी मुझसे मिलने आई थी। वह बैंक में काम करती है। बड़े आत्मविश्वास से मिली। आप सोच नहीं सकते कि उससे मिलकर कितना अच्छा लगा हमारे पूरे परिवार को। यह लगा कि प्रगति हो रही है। जिस महिला के पति ने छोड़ दिया, घरों में काम करती है, उसकी बेटी बैंक में काम कर रही है। गजब की हिंदी अंग्रेजी बोल रही थी। मैं तो कहूंगा कि हम मां सरस्वती की पूजा करें, ज्ञान के पीछे भागें, जिंदगी तभी आगे बढ़ती है। ओपिनियन पोस्ट के पाठकों से भी मैं कहना चाहता हूं कि बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर जरूर ध्यान दें। इसी से इन्सान आगे बढ़ता है। अब तो हर माह मुलाकात होती रहेगी। नया साल शुभ हो!
-अमीश

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