एनआईए टीम पर हमला करने वाला निहाली गांव है हथियार तस्करी के लिए बदनाम

सुनील वर्मा
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के भोजपुर थाना इलाके के जिस नहाली गांव में एनआईए और यूपी एटीएस की टीम पर गांव वालों ने घेरकर फायरिंग व जानलेवा हुआ था वह हथियारों की तस्‍करी के लिए बदनाम है। इस हमले में मेरठ क्राइम ब्रांच के सिपाही तहजीब समेत कई लोग घायल हो गए थे।

अारएसएस के प्रदेश प्रमुख रविन्द्र गुंसायी जिनकी हत्या की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है
अारएसएस के प्रदेश प्रमुख रविन्द्र गुंसायी जिनकी हत्या की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है

बता दें कि एनआईए की टीम पंजाब के लुधियाना में हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख रविंदर गोसाई की हत्या के मामले से जुड़े आरोपी मलूक की तलाश में नहाली गांव आई थी। रविंदर गोसाई की हत्या के मामले से जुड़ा आरोपी मलूक नहाली गांव का कुख्‍यात हथियार तस्‍कर है।
स्‍थानीय पुलिस को इस बात की खबर थी कि यह गांव हथियारों की तस्‍करी के लिए बदनाम है इसके बावजूद एनआईए की टीम आधी अधूरी तैयारी के मलूक को गिरफ्तार करने पहुंची और गांव वालों ने पुलिस को दौड़ा दिया। फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और पुलिस के आला अधिकारी स्थिति पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं।
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नहाली गांव किस कदर बदनाम है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगल-बगल के गांव वालों की तो छोड़िए स्थानीय पुलिस भी इस गांव के अंदर दाखिल होने से पहले चार लोगों से बात करती है। इजाजत मिलने पर ही पुलिस और दूसरे लोग इस गांव में दाखिल होते हैं। ये ही वजह थी कि जब सुबह-सवेरे एनआईए और यूपी एटीएस गांव में दाखिल हुई तो उन्हें गांव वालों के विरोध का सामना करना पड़ा.
सूत्रों का कहना है कि पुलिस बेशक रात के अंधेरे में भी गांव में दाखिल न हो पाती हो, लेकिन जुर्म की दुनिया का हर छोटा-बड़ा अपराधी यहां दिन के उजाले में बेखौफ होकर आता है और जो सामान खरीदना होता है उसे लेकर चला जाता है। स्‍थानीय लोगों ने बताया की निहाली गांव में दाखिल होने के लिए एक आम रास्ता है तो खेतों की ओर से दो और भी रास्ते हैं।
खास बात ये है कि तीनों ही रास्तों पर गांव के बुजुर्ग बारी-बारी से पहरा देते हैं। इनकी निगाह से बचकर कोई भी गांव के अंदर दाखिल नहीं हो सकता है।
स्‍थानीन प‍ुलिस के एक अधिकारी की मानें तो नाहली गांव के हर घर से हथियारों की सप्लाई होती है। अगर देशी तमंचा चाहिए तो किसी और घर से मिलेगा, बिहार और एमपी मेड पिस्टल चाहिए तो वो किसी दूसरे घर में मिलेगी। खास बात ये भी है कि जिस घर से आपने पहली बार हथियार खरीदा है तो जरूरी नहीं कि दूसरी बार भी उसी घर से आपको हथियार मिल जाए। थोड़े-थोड़े वक्त पर हथियारों का अड्डा बदल दिया जाता है।
स्‍थानीय सूत्रों के मुताबिक हथियारों का तस्कर मलूक कोई छोटा तस्कर नहीं है। कहा जाता है कि अवैध रूप से आपको जो भी हथियार चाहिए वो आॅन डिमांड सिर्फ मलूक ही उपलब्ध करा सकता है। देशी तमंचे से लेकर एके-47 की तस्करी तक में मलूक का नाम आ चुका है। लेकिन मलूक इतना शातिर है कि वह कभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ता है। एक बार अपने ही एक साथी की हत्या के आरोप में मलूक जेल गया था। लेकिन गवाह की कमी के चलते वह रिहा हो गया। कोई भी मलूक के खिलाफ मुंह नहीं खोलता है। ये ही वजह है कि अभी तक मलूक के खिलाफ तीन जिलों में सिर्फ 8 मामले ही दर्ज किए गए हैं।
सूत्र बताते हैं कि बिहार और मध्य प्रदेश में बनी पिस्टल की बड़ी सप्लाई मलूक करता है। दिल्ली-एनसीआर ही नहीं हरियाणा, यूपी, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखण्ड में भी मलूक पिस्टल की सप्लाई करता है। कहा जाता है कि गांव में भी अपराधी सीधे हथियार खरीदने पहुंचते हैं। कुछ मामलों में मलूक एके-47 भी सप्लाई कर चुका है. जिसकी जांच चल रही है।
कहा जाता है कि मलूक को पूरे नाहली गांव का सर्पोट है। मलूक ही गांव के लड़कों को रोजगार करने में मदद करता है। मलूक ने अपने धंधे में भी गांव के लड़कों को शामिल कर लिया है। गांव के घर-परिवार में भी मलूक मदद करता है। ये ही वजह है कि जब भी पुलिस मलूक को पकड़़ने या पूछताछ करने के लिए जाती है तो पूरा गांव इकट्ठा हो जाता है। ऐसे में पुलिस जरा सी भी सख्ती दिखती है तो गांव वाले पुलिस के विरोध में आ जाते हैं। तीन दिसम्बर की सुबह भी ये ही हुआ जब एनआईए और यूपी एटीएस मलूक को पकड़कर ले जाने लगी तो गांव वालों ने उन पर पत्थर फेंकने के साथ ही फायरिंग भी शुरु कर दी। लेकिन अगर स्‍थानीय पुलिस एनआईए को इस हकीकत से अवगत कराती तो शायद ऐसी दुर्गति न होती।

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