संध्या द्विवेदी।

‘जिस पार्टी के नाम पर लगातार डराया गया, उस पार्टी को वोट देकर अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय ने भरोसा जताया है। अब ये भरोसा कायम रहे, इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की है।’ ऑल इंडिया वुमेन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का यह बयान अयोध्या मसले पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में आया। उन्होंने कहा मैंने कभी बाबरी मस्जिद के लिये कोई आंदोलन नहीं चलाया। मुझे इस देश की अदालत और संविधान पर पूरा भरोसा है। इसलिये कोर्ट का जो भी फैसला होगा इस मसले पर हमे कुबूल होगा।

शाइस्ता अंबर से जब कोर्ट के बाहर इस मसले पर फैसला करने की बात पर उनकी राय पूछी गई तो उन्होंने कहा, ‘मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कोर्ट ने कुछ ऐसा कहा है। इस बात के आगे पीछे जरूर और भी कई बातें रही होंगी। बहरहाल, मैंने चाहती हूं कि कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुनाये।’

उत्तर प्रदेश की बात करें तो यह स्पष्ट है कि मुस्लिम समुदाय ने उन लोगों के खिलाफ जनादेश दिया है जो भाजपा के नाम पर इस समुदाय के बीच डर बनाये रखना चाहते थे। मुस्लिम वोट की राजनीति करना चाहते थे। इसलिये अब भाजपा की सरकार को इस जनादेश का सम्मान करना चाहिये। इस भरोसे को मजबूत बनाना चाहिये। अयोध्या जैसे संवेदनशील मसलों पर संविधान सम्मत और कोर्ट सम्मत फैसले लेकर आगे बढ़ना चाहिये।

दरअसल 21 मार्च को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की तरफ से कहा गया था कि दोनों पक्ष अयोध्या मसले को कोर्ट के बाहर सुलझा लें तो ठीक रहेगा। सुप्रीम ने कोर्ट ने कहा था यह धर्म और आस्था से जुडा मसला है। इसलिये इसे कोर्ट से बाहर सुलझाना चाहिये। साथ ही यह भी कहा था कि अगर दोनों पक्षों में बात नहीं बनत है तो फिर कोर्ट दखल देगा।

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