सरकार बदली पर नहीं रुकी गैंडों की हत्या

ओपिनियन पोस्ट
Mon, 04 Jul, 2016 12:41 PM IST

अनिरुद्ध यादव ।

विधानसभा चुनाव में घुसपैठ व एक सींग वाले गैंडे की हत्याओं के मुद्दे के बलबूते सत्ता पर काबिज होने वाली भारतीय जनता पार्टी का नजरिया भी इस मसले पर स्पष्ट नहीं दिख रहा है। कांग्रेसी सरकार में तो गैंडों की हत्याएं रुकी नहीं, नई सरकार में भी इसका सिलसिला जारी है। तस्करों ने सात जून को काजीरंगा में ऐसे समय गैंडे की हत्या की जब भाजपानीत गठबंधन सरकार की वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्म, मंत्री केशव महंत और मंत्री अतुल बोरा जैसे दिग्गज मंत्री काजीरंगा नेशनल पार्क में मौजूद थे। तमाम सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए शिकारियों ने एक गैंडे की हत्या कर दी और उसके सींग काटकर फरार हो गए। तस्करों ने तीन-तीन मंत्रियों की मौजूदगी में गैंडों की हत्या के अपने नापाक मंसूबे को जताते हुए राज्य सरकार की नाकामियों की पोल खोल दी। अब इस मामले को लेकर राजनीति तेज हो गई है।
वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्म ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि ये हत्याएं कांग्रेस करवा रही है। वहीं असम प्रदेश कांग्रेस समिति (एपीसीसी) के उपाध्यक्ष व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया ने वन मंत्री के इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ‘हम इस मामले में राजनीति करना नहीं चाहते मगर मंत्री के बयान से ऐसा लगता है कि गैंडों की हत्या विरोधी दल करा रहे हैं। राज्य की पूर्व कांग्रेस सरकार ने गैंडों की हत्या की सीबीआई जांच कराने की घोषणा की थी। साथ ही इसे रोकने के लिए कई तरह के उपाय भी किए मगर इस मामले में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने किसी भी तरह का सहयोग नहीं किया। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ओर से ऐसा कुप्रचार किया गया कि गैंडों की हत्या रोकने के लिए सरकार की ओर से कुछ भी नहीं किया। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि यदि उसकी सरकार आई तो गैंडों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी। हम चाहते हैं कि चुनाव के समय सत्ताधारी दल ने जो वादा किया था, उसे पूरा करे।’
असम चुनाव में जीत का सेहरा बांधने वाली भाजपा पर अभी से सवाल उठने शुरू हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि असम में गैंडों की हत्या का सिलसिला बदस्तूर जारी है। तमाम सुरक्षा के दावों के बीच आए दिन शिकारी गैंडों की हत्या कर रहे हैं। पिछले एक-डेढ़ महीने के भीतर शिकारियों ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान व राष्ट्रीय मानस पार्क में पांच गैंडों की हत्या कर दी और सींग लेकर फरार हो गए। काजीरंगा के घोड़ियालमारा में शिकारी 2 मई को एक वयस्क नर गैंडे की हत्या कर उसका सींग लेकर फरार हो गए। यह गैंडा सतिया को बारोईआती चापरी इलाके में पिछले एक महीने से विचरण कर रहा था। डिवीजनल वन अधिकारी सुभाशीष दास ने बताया कि विश्वनाथ चारिआली जिले में पार्क के पास बारोईआती चापरी इलाके में गैंडे का शव मिला। फिर 5 मई की रात शिकारियों ने मानस पार्क रेंज के भुइयापाड़ा में एक गैंडे की हत्या कर दी और उसका सींग निकाल कर फरार हो गए।
इससे पहले ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस विलियम जब अपनी पत्नी केट के साथ काजीरंगा आए थे तो उसी समय शिकारियों ने तमाम सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए शाही परिवार के आने से एक दिन पहले और उनके जाने के एक दिन बाद दो गैंडों की हत्या कर पार्क प्रशासन की लापरवाही की पोल खोलकर रख दी। नेशनल पार्क के बुढ़ापहाड़ रेंज से गैंडे के शव को बरामद किया गया। घटना रात के वक्त अंजाम दी गई। पार्क अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल से एके-47 के 88 खाली कारतूस बरामद किए गए। इससे साफ है कि गैंडे को मारने के लिए एके-47 जैसे हथियार का इस्तेमाल किया गया।
बता दें कि प्रिंस विलियम और केट मिडलटन दो दिन पहले ही काजीरंगा के भ्रमण पर आए थे। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान गैंडे के शिकार पर रोक लगाने के उपायों के बारे में बातचीत भी की थी। काजीरंगा नेशनल पार्क और वन्य प्राणियों के कल्याण में लगी संस्था आरण्यक के सचिव बी. तालुकदार का मानना है कि शिकारी जानते थे कि पार्क प्रशासन इस वक्त शाही परिवार के स्वागत में जुटा हुआ है। इसी का लाभ उठाते हुए शिकारियों ने गैंडों की हत्या कर दी। दूसरा कारण यह भी है कि गैंडों की सुरक्षा के लिए पार्क प्रशासन पुलिस पर अधिक निर्भर हो गया जो नहीं होना चाहिए था। इन गैंडों सहित चालू वर्ष में तस्करों ने अब तक आठ गैंडों की हत्या कर दी है। पिछले साल 16 गैंडे मारे गए थे।
पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के चहेते पूर्व वन मंत्री रकीबुल हुसैन के कार्यकाल में तकरीबन 200 से अधिक गैंडों की हत्या हुई। 2014 में 33 गैंडों की हत्या की जा चुकी है। इसके अलावा 2013 में सूबे के उद्यानों से शिकारियों ने 40 गैंडों को मार कर सींग निकाल लिए। बुढ़ापहाड़ वनांचली में अवैध शिकारियों ने 11 अन्य गैंडों की हत्या कर दी। एक के बाद एक गैंडों की हत्याओं से ऐसा लगता है कि वन विभाग ने शिकारियों को खुली छूट दे रखी है। एक सींग वाला गैंडा असम की अमूल्य धरोहर है। इसकी वजह से काजीरंगा अभ्यारण्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशेष रूप से जाना जाता है। काजीरंगा के अलावा राज्य के राष्ट्रीय मानस उद्यान और पवितरा भी एक सींग वाले गैंडे की शरणस्थली हैंं। इन सभी उद्यानों में सुरक्षा के सरकारी दावे के बीच गैंडे की हत्याएं जारी हंै।
काजीरंगा राजधानी गुवाहाटी से 194 किलोमीटर दूर है। गुवाहाटी से राजमार्ग-37 से यहां पहुंचा जा सकता है। एक सींग वाले भारी भरकम गैंडे के विचरण को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। अफ्रीका के जंगलों जैसे दलदल जमीन, ऊंची-ऊंची झाड़ियों वाली घास, सरकंडे के साथ कम गहरे तालाब यहां की विशेषताएं हैं। यह उद्यान 858.98 वर्ग किमी में फैला हुआ है। 2012 की जनगणना के अनुसार इस उद्यान में 2505 के स्थान पर 2186 गैंडे ही पाए गए। वन विभाग की ओर से जारी 15 मार्च, 2015 की गणना के अनुसार काजीरंगा में गैंडों की संख्या 2401 संख्या है। मादा गैंडे का आकार और वजन नर से कुछ कम होता है। अपने जीवनकाल में मादा गैंडा आठ से दस बच्चों को जन्म देती है।

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शिकारी ऐसे बनाते हैं निशाना
गैंडे की हत्या के पीछे तस्करों का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। उन्हें इसके लिए विदेशी मदद भी मिलती है। शिकारी गैंडे की हत्या ज्यादातर रात के समय ही करते हैं। शिकारी पहले गैंडे को गोली मारते हैं। जब भारी भरकम गैंडा जमीन पर गिर जाता है तो शिकारी धारदार हथियार से कीमती सींग काटकर फरार हो जाते हैं। इसके अलावा जब भारी बरसात से उद्यान में बाढ़ आती है तो गैंडे अभ्यारण्य से बाहर निकल आते हैं। इसका फायदा उठाते हुए पहले से घात लगाकर बैठे तस्कर मौका मिलते ही गैंडे को मार डालते हैं। कभी-कभार ऐसा देखा गया है कि गैंडा जिंदा ही रहता है और शिकारी सींग काटकर फरार हो जाते हैं। शिकारी अक्सर दलों में आते हैं। कई बार उनकी वन्य सुरक्षा कर्मियों के साथ मुठभेड़ भी हो जाती है। मुठभेड़ में कई वन्य सुरक्षाकर्मी भी अपनी जान गवां चुके हैं।

सुरक्षा कर्मियों की भी मिलीभगत
गैंडों की हत्या में वन्य सुरक्षा कर्मियों की भी मिलीभगत सामने आती रही है। गिरफ्तार शिकारियों से पूछताछ में सामने आया है कि गैंडों की हत्या में काजीरंगा की पहरेदारी करने वाले जवान भी शामिल हैं। इसी कड़ी में 2 मई को चार शिकारियों के साथ चार वन सुरक्षा कर्मियों को पुलिस हिरासत में लिया गया। 5, 7 और 8 मई को अलग-अलग क्षेत्रों में गैंडा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस व एसटीएफ की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में शिकारियों के खिलाफ अभियान चला रखा है। जखलाबंधा पुलिस बल ने कोठारी अंचल में अभियान चलाकर तीन और एसटीएफ व वन विभाग के सुरक्षा कर्मियों ने 7 मई की रात हारमोजी अंचल से चार गैंडा शिकारियों को गिरफ्तार किया। गैंडे की हत्या करने की करतूत में कुछ भूमिगत उग्रवादी संगठनों के शामिल होने की बात भी सामने आई है। गिरफ्तार तस्करों ने उग्रवादी समूह से होने की बात भी स्वीकार की। इसमें एनएससीएन, कुकी व कार्बी उग्रवादियों की भूमिका संदिग्ध रही है।

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कीमती है गैंडे का सींग
गैंडे का सींग कीमती होता है। यही कारण है कि शिकारी असम के तमाम उद्यानों में गैंडों की हत्या करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार ये सींग 40 लाख से 90 लाख रुपये तक में बेचे जाते हैं। गैंडे का चमड़ा और नाखून भी बहुत महंगे बिकते हैं। चमड़े से महंगे जैकेट, बैग, पर्स वगैरह तैयार किए जाते हैं जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों में बेचे जाते हैं। गैंडों की हत्या रोकने के लिए अब काजीरंगा के चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 

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