उत्तर प्रदेश में जीत का रास्ता तलाश रही भाजपा ने अपने सांसद और विहिप के कार्यकर्ता रहे केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी है। पार्टी को उम्मीद है कि मौर्या गैर यादव पिछड़े और दलित मतदाताओं को जोड़ने के साथ हिंदुत्व के एजेंडे को भी मजबूत करेंगे। रामलला से लेकर गोरखनाथ मंदिर तक घूम रहे मौर्या सवालों के सीधे जवाब देने में न फंसकर अपने तय एजेंडे पर ही बोलते हैं। प्रस्तुत हैं पिछले दिनों लखनऊ भाजपा कार्यालय में मृत्युंजय कुमार से हुई बातचीत के अंश-

2014 को छोड़ दें तो पिछले कई चुनावों से भाजपा तमाम प्रयोगों के बावजूद उत्तर प्रदेश में सफल नहीं हुई। बिहार और दिल्ली ने 2014 की सफलता को धो दिया है। ऐसी स्थिति में अपने लिए क्या चुनौतियां देखते हैं?
जब भी 2017 की बात आती है तो मैं यह बार बार कह रहा हूं और मुझे पूरा विश्वास भी है कि 2017 में भाजपा 2014 दुहराएगी। जो परिस्थितियां उस समय थीं वही परिस्थितियां अभी भी हैं। बिहार और दिल्ली की चर्चा के साथ साथ कुछ और चर्चाएं भी करनी चाहिए। हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर भी है। मुझे यह लगता है कि हम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बूते लगातार बढ़त में हैं। और उत्तर प्रदेश में हमलोग ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करेंगे। लोग सपा बसपा से हर प्रकार से मुक्ति चाहते हैं और प्रदेश के लोग मोदी जी की अगुवाई में विकास करने वाली सरकार चाहते हैं।

नरेंद्र मोदी के नाम पर बिहार में भी चुनाव लड़ा गया था पर नतीजा नहीं आया क्योंकि संगठन ठीक तरीके काम नहीं कर रहा था। यहां भी चुनाव नजदीक है पर संगठन में निचले स्तर की इकाइयों का पूरी तरह गठन भी नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में मोदी के नाम पर बनाई गई हवा को भाजपा कैसे संभाल पाएगी?
देखिए भाजपा की हवा तो चल पड़ी है। प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद जिन क्षेत्रों में मेरा जाना हुआ है, वहां के कार्यकर्ताओं का उत्साह और जनता का समर्थन यह प्रमाणित करता है कि भाजपा का पक्ष 2014 दोहराने को तैयार है।

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कहते हैं कि जहां संगठन होता है वहीं जनता की भावनाओं को समेट पाना संभव होता है। लेकिन अभी यूपी में करीब 19 जिलों में इकाइयां ही नहीं हैं फिर आप कैसे 2014 दोहराने की बात कर रहे हैं?
जल्द ही इस संबंध में आपको खबर मिलेगी। इस पर तेजी से काम चल रहा है और तेजी से हम संगठन का काम पूरा कर लेंगे। बूथों पर भी काम प्रारंभ हो गया है। 1.07 लाख बूथ गठित हो चुके थे। जल्द ही 1.20 लाख बूथ पूरे हो जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी का संगठन पूरी तरीके से तैयार है। संगठन के संबंध में जो घोषणाएं बाकी थीं वो जल्द हो जाएंगी।

सांसदों के साथ बैठक में पीएम बार बार जिस तरीके से बोल रहे हैं, उससे लगता है कि दो साल में भाजपा सांसद अपनी ही सरकार की योजनाओं को नीचे तक नहीं पहुंचा पाए। अब जो सात-आठ महीने बचे हैं, उसमें क्या सांसद इसे लोगों तक पहुंचा पाएंगे?
14 से 24 तक ग्राम उदय से भारत उदय तक अभियान चला था। इस अभियान में हमलोगों ने 35 हजार गांवों तक जाने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम सफल रहा। अब कार्यकर्ताओं का दबाव है कि यूपी की 20 हजार ग्राम सभाओं तक इस अभियान को पहुंचाया जाए। सांसदों ही नहीं, कार्यकर्ताओं और जनता को भी मालूम हो गया है कि भारत सरकार की क्या योजनाएं हैं। अभी एक मई को गांव की गरीब महिलाओं के लिए उज्जवला योजना की शुरुआत हुई। भारत के इतिहास में पहली बार किसी सरकार के द्वारा इस प्रकार का उपहार दिया गया है। मैं खुद गरीब के घर से निकलकर आया हूं और इसका अहसास है कि गांव के किसी गरीब के घर में जब गैस कनेक्शन आता है तो महिलाओं के जीवन में कितना बदलाव आ जाता है। यह योजना सांसदों की अगुवाई में चलनी है। इसलिए आमलोगों तक हमारी योजनाएं पहुंच रही हैं। सिर्फ बातों से नहीं बल्कि जमीन पर पहुंच रही हैं। हमारे राष्ट्रीय राजमार्गांे के निर्माण में काफी तेजी आई है। इस बार के बजट में ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए काफी बेहतर प्रावधान किए गए हैं। विपक्ष के पास इस बार के बजट की आलोचना करने के लिए शब्द नहीं थे।

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पानी को लेकर यूपी के बुंदेलखंड में बेहद खराब स्थिति है। संभवत: लातूर से भी खराब। ऐसे में क्या आपको नहीं लगता कि प्रधानमंत्री को बुंदेलखंड जाना चाहिए था और लोगों से संवाद करना चाहिए था?
प्रधानमंत्री गरीबों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। गरीबों की भलाई के लिए जितना काम नरेंद्र मोदी की सरकार ने दो वर्षांे में करके दे दिया है, कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकारों ने 60 साल में नहीं किया है। बुंदेलखंड की समस्या को भाजपा नेतृत्व गंभीरता से लेता है। वहां पानी की भी समस्या है, वहां रोजगार की भी समस्या है। उत्तर प्रदेश की सरकार से मैंने अपील भी की है कि अगर केंद्र सरकार ने सूखा पीड़ित बुंदेलखंड के लिए पानी उपलब्ध कराने का काम किया है तो उसके लिए इनकार करना उचित नहीं था। मेरी अपील है कि पानी के मुद्दे पर राजनीति न करें। राजनीति करने के लिए ढेर सारे मुद्दे हैं, उस पर राजनीति कर लेंगे। जब बुंदेलखंड पानी की समस्या, किसानों की समस्या से ग्रस्त है, ऐसे में यह कह देना कि वहां पानी की कोई समस्या नहीं है, वहां के लोगों के घावों में नमक छिड़कने जैसा है।

सुना है कि अखिलेश यादव में अपने प्रचार के लिए अमेरिका की दो फर्मां को हायर किया है। खुद नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में इंटरनेट मीडिया के विशेषज्ञों की सेवाएं ली थीं। क्या आप भी किसी न्यू मीडिया के इस्तेमाल या प्रचार के लिए कुछ योजना बना रहे हैं?
देखिए भाजपा का संगठन तंत्र बहुत मजबूत है। तात्कालिक तौर पर मुझे अपने संगठन के कार्यकर्ता के बूते बूथ जीतने पर पूरा विश्वास है। अगर हम बूथ जीतेंगे तो विधानसभा जीतेंगे और विधानसभा जीतेंगे तो उत्तर प्रदेश जीतेंगे। हम इसी अभियान के अंतर्गत अपनी योजना को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए अभी मुझे ऐसी किसी एजेंसी की आवश्यकता नहीं प्रतीत हो रही है। हम कार्यकर्ताओं के भरोसे चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। उत्तर प्रदेश में हमलोगों ने 265 प्लस का लक्ष्य रखा है। सपा जानेवाली है और बसपा आनेवाली नहीं है। बसपा ने सदैव दलितों का इस्तेमाल किया है और भाजपा ने हमेशा दलित समुदाय के उत्थान का कार्य किया है। 