परीक्षा परिणाम में सरकार ने देर से ही सही, कड़ा कदम उठाया है। इस संदर्भ में बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी  से ओपिनियन पोस्ट  संवाददाता की बातचीत के प्रमुख अंश।

खराब रिजल्ट के लिए जिम्मेदार कौन है?
पिछले कुछ वर्षों में सामूहिक नकल की तस्वीर ने बिहार को बदनाम किया था। इस बार कदाचार नहीं चला, जिससे छात्रों की प्रतिभा का मूल्यांकन ठीक से करने का मौका मिलेगा।

टॉपर मेधा शक के घेरे में है। कदाचार मुक्त परीक्षा संभव है तो कदाचार मुक्त मूल्यांकन क्यों नहीं?
विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। सभी स्तरों पर जांच कराई जा रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक सप्ताह के भीतर ही मामले की जांच कर ली जाएगी। चूक की वजह से सरकार की विश्वसनीयता पर दाग लगा है लेकिन एक-दो चूक की वजह से पूरे परीक्षा परिणाम पर सवालिया निशान नहीं लग सकता। फर्जीवाड़े से टॉप किए छात्रों का परिणाम रद्द कर उन पर मुकदमा भी दायर किया गया है।

जाहिर है कि शिक्षा माफिया सक्रिय है, कहां चूक हो गई?
कुछ तो ब्लैक शीप हैं, जिससे पूरी व्यवस्था के साथ खिलवाड़ हो पाया। सरकार के स्तर पर भी भारी चूक हुई है जिससे कदाचार मुक्त परीक्षा की बखिया उधेड़ दी गई। ऐसे नाम जल्द ही सामने आएंगे जिनकी मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा संभव हो पाया। बोर्ड के स्तर पर कुछ अधिकारी गड़बड़ी कर रहे हैं। उनकी पहचान नहीं हो पाई है। बोर्ड के अधिकारी इस मामले में दोषी हैं।

इस रिजल्ट से यह भी तो साबित होता है कि शिक्षकों की कमी झेल रहे बिहार के स्कूलों में पढ़ाई का माहौल नहीं है?
यह कहना गलत है कि बिहार के स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है। शिक्षकों की कमी दूर करने में लगे हैं। जल्द ही स्कूलों में सभी विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। बिहार के स्कूलों में आधारभूत संरचनाओं का भी तेजी से विकास हो रहा है। सभी स्तरों पर सुधार की प्रक्रिया जारी है। मुझे उम्मीद है कि कदाचार मुक्त परीक्षा के बाद छात्रों में पढ़ाई के प्रति रुचि और बढ़ेगी। वे ज्यादा मन से पढ़ेंगे ताकि परीक्षा में अपनी योग्यता के आधार पर उत्तीर्ण हो सकें।

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