नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्‍मृति ईरानी की हवाई उड़ान पर बार-बार लगाम लगा कर उन्‍हें चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन बात उनकी समझ में नहीं आ रही है। अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी छह कैबिनेट समितियों का पुनर्गठन किया, लेकिन संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति यानी सीसीपीए से स्मृति ईरानी को हटा दिया गया है। यह स्‍मृति के लिए एक और चेतावनी है। उन्‍होंने एक औद्योगिक घराने से जुड़े रहे संजय कचरू को अपना निजी सचिव बनाने के मुद्दे को प्रतिष्‍ठा का प्रश्‍न बना लिया, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने ऐसा नहीं होने दिया। ईरानी को यह पहली चेतावनी थी, लेकिन वह समझी नहीं। उन्‍हें लग रहा था कि संघ के बड़े पदाधिकारियों को खुश करने भर से उनका काम चल जाएगा। दरअसल, स्‍मृति ईरानी ने अपने पद को अपना बढ़ा हुआ कद मान लिया। नतीजा यह हुआ कि वह सरकार के वरिष्‍ठ मंत्रियों की भी अनसुनी करने लगीं। पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी से हटाकर उन्‍हें दूसरी चेतावनी दी गई। फिर भी वह सुधरने को तैयार नहीं हुईं। काम के मामले में भी वह प्रधानमंत्री कार्यालय से तालमेल नहीं बिठा पा रही थीं। उन्‍हें कई बार इशारों में समझाने की कोशिश की गई पर दो साल में नई शिक्षा नीति नहीं बन पाई। वह प्रधानमंत्री के विजन की लगातार उपेक्षा करती रहीं, यह मानकर कि उन्‍हें नहीं हटाया जा सकता। वह उत्‍तर प्रदेश में खुद को मुख्‍यमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी देखने लगीं। कपड़ा मंत्रालय भी उनके लिए एक चेतावनी ही रहा।

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ईरानी बतौर मानव संसाधन विकास मंत्री सीसीपीए में शामिल थीं। मोदी सरकार के गठन के तुरंत बाद कपड़ा मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री संतोष गंगवार, संसदीय कार्य राज्य मंत्री के तौर पर इस समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य थे, लेकिन स्मृति ईरानी को वस्त्र मंत्रालय की कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद अब इस समिति में जगह नहीं मिल सकी। कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद ईरानी को छह कैबिनेट समितियों में से किसी में भी जगह नहीं मिल सकी है। हालांकि स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्रियों के साथ दो राज्य मंत्रियों को भी कैबिनेट समितियों का हिस्सा बनाया गया है। नए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति यानी सीसीपीए में जगह दी गई है। नए संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार भी इसमें शामिल किए गए हैं।

मुख्तार अब्बास नकवी, जिन्हें अल्पसंख्यक मामलों में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में पदोन्नत किया गया है, उन्हें सीसीपीए में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री एस.एस. अहलूवालिया और कानून राज्य मंत्री पी.पी. चौधरी को भी इस समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। यह समिति संसद सत्र के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। बीजेपी के सहयोगी दलों में से रामविलास पासवान अकेले नेता हैं जिन्हें इस समिति में शामिल किया गया है।

 सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में कोई बदलाव नहीं

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति यानी सीसीएस और नियुक्ति की मंत्रिमंडलीय समिति एसीसी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सीसीएस में प्रधानमंत्री के साथ गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर रहेंगे। जबकि नियुक्ति की मंत्रिमंडलीय समिति में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहेंगे।

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राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति में सदस्य 11 से बढ़ाकर अब 14 कर दिए गए हैं। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार और स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को इसमें शामिल किया गया है। बीजेपी के सहयोगी दल शिवसेना, टीडीपी, एलजेपी और अकाली दल को भी इसमें नुमाइंदगी दी गई है। टीडीपी से अशोक गजपति राजू, एलजेपी के रामविलास पासवान, अकाली दल की हरसिमरत कौर और शिवसेना से अनंत गीते को इसमें शामिल किया गया है।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति में अब 13 सदस्य

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी सीसीईए में अब 13 सदस्य हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु और संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार को इसमें जगह दी गई है। सीसीईए के तीन विशेष आमंत्रित सदस्य भी हैं। ये हैं पेट्रोलियम मामले को स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ऊर्जा मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य मामलों की स्वतंत्र प्रभार की राज्यमंत्री निर्मला सीतारमण। सीसीईए में बीजेपी के सहयोगी दलों से दो मंत्री हैं। ये हैं नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार आवास पर कैबिनेट समिति में शामिल किया गया है। पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि स्मृति ईरानी जैसे कई कैबिनेट मंत्रियों को इन समितियों में जगह नहीं मिल सकी है। जबकि दो राज्य मंत्रियों- एस.एस. अहलूवालिया और पी.पी. चौधरी को जगह दी गई है। ये प्रधानमंत्री की ओर से राज्य मंत्रियों को ज्यादा महत्व देने की दिशा में एक बड़ा संदेश भी माना जा रहा है।