सार्क सम्मेलन में भी खुराफात से बाज नहीं आया पाक

ओपिनियन पोस्ट
Thu, 04 Aug, 2016 17:42 PM IST

नई दिल्ली। हर बार की तरह इस बार भी सार्क सम्मेलन भारत और पाकिस्तान की तल्खी की भेंट चढ़ गया। इसका अनुमान तो बुधवार को ही लग गया था जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर का पुराना राग अलापते हुए यह कहा कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मामला नहीं है। इस पर पलटवार करते हुए सम्मेलन में हिस्सा लेने गए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को खूब खरी खटी सुनाई। पाकिस्तान को भारत के तल्ख जवाब का अंदेशा पहले से था। इसलिए उसने सम्मेलन में राजनाथ सिंह के भाषण की मीडिया कवरेज पर पाबंदी लगा दी। उनके भाषण के दौरान किसी भी मीडिया वाले को सम्मेलन में जाने नहीं दिया गया।

यही नहीं पाकिस्तानी मीडिया ने उनके भाषण को पूरी तरह ब्लैक आउट कर दिया। किसी भी न्यूज चैनल पर उनका भाषण नजर नहीं आया। यही वजह थी कि भारतीय अधिकारियों द्वारा एयरपोर्ट पर होने वाली उनकी प्रेस कांफ्रेंस टाल दी गई। भारतीय मीडिया को भी राजनाथ सिंह का भाषण रिकॉर्ड करने से रोका गया लेकिन जब नवाज शरीफ ने भाषण दिया तो उनका भाषण सभी चैनलों ने दिखाया। इससे नाराज होकर राजनाथ सिंह वहां लंच के लिए भी नहीं रूके और सीधे भारत लौट गए।

सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले नवाज शरीफ के कश्मीर राग अलापने से दोनों देशों की तल्खी फिर से बढ़ गई। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सम्मेलन स्थल पर सार्क देशों के प्रतिनिधियों की अगुवानी कर रहे पाकिस्तानी गृह मंत्री चौधरी निसार खान से राजनाथ ने ठीक से हाथ भी नहीं मिलाया। वहीं सम्मेलन के बाद आयोजित लंच में राजनाथ ने शिरकत नहीं की और बगैर खाना खाए स्वदेश रवाना हो गए। इस लंच पार्टी के मेजबान निसार खान ही थे। खान भी इस दौरान नजर नहीं आए।

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इस्लामाबाद में हो रहे सार्क सम्मेलन में राजनाथ ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे आतंकवाद पर नकेल कसने की नसीहत दी। राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद आज के वक्त में सबसे बड़ा खतरा और चुनौती है। हाल ही में कश्मीर में मारे गए हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी की ओर इशारा करते हुए राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद का महिमामंडन बंद होना चाहिए और आतंकियों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और आतंकियों की सिर्फ आलोचना करना ही काफी नहीं है, उन पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

राजनाथ ने कहा कि न सिर्फ आतंकियों और उनके संगठनों पर सख्त कार्रवाई की जाए बल्कि उन्हें शह देने वाले व्यक्तियों, संगठनों और देशों पर भी कार्रवाई हो। जो भी देश आतंकियों को शरण देते हैं, उन्हें अलग-थलग किया जाना जाए।

नवाज का कश्मीर राग 

इससे पहले बुधवार को राजनाथ सिंह के पाकिस्तान पहुंचते ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर राग छेड़ दिया। पाक विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कश्मीर में ‘आजादी’ की एक नई लहर है और कश्मीर भारत का अंदरूनी मसला नहीं है। यह आंदोलन कश्मीर के अवाम की तीसरी पीढ़ी की रगों में दौड़ रहा है और आठ जुलाई की घटना के जरिए दुनिया ने खुद इसकी गंभीरता देखी है। उन्होंने हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी के कश्मीर में मारे जाने का जिक्र करते कहा, ‘‘कश्मीरी युवा आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए कुर्बानी के नए अध्याय लिख रहे हैं। गोलियों से उनकी आंखों की रोशनी चली गई लेकिन स्वतंत्रता की आकांक्षा उन्हें गंतव्य की ओर दिशानिर्देशित कर रही है।’’ शरीफ ने पाकिस्तानी राजनयिकों से कहा कि राजदूतों को दुनिया को यह महसूस कराना चाहिए कि कश्मीर भारत की अंदरूनी समस्या नहीं है क्योंकि भारत ने पहले ही स्वीकार किया है कि यह विवादित क्षेत्र है और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे भारत और पाक के बीच विवाद बताया है।

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