केजरीवाल के प्रधान सचिव समेत पांच गिरफ्तार, सिसोदिया ने लगाया बदनाम करने की साजिश का आरोप

ओपिनियन पोस्ट
Mon, 04 Jul, 2016 19:32 PM IST

नई दिल्‍ली। दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार समेत पांच लोगों को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार लोगों में राजेंद्र कुमार के अलावा तरुण शर्मा, संदीप कुमार, दिनेश कुमार गुप्ता और अशोक कुमार शामिल हैं। इन पर कंप्यूटरों की खरीद में 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा आरोप है। इस घोटाले में सीबीआई राजेंद्र कुमार को ‘किंगपिन’ बता रही है। सीबीआई का कहना है कि राजेंद्र कुमार घोटाले के सूत्रधार हैं। उन पर नियमों की अवहेलना करते हुए ठेके देने का आरोप है। सोमवार शाम गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपी मंगलवार को पटियाला कोर्ट में पेश किए जाएंगे।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेंद्र कुमार की नियुक्ति फरवरी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव के रूप में हुई थी। वह 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। दिल्ली में पहली बार सत्ता में आई केजरीवाल सरकार के दौरान भी वह केजरीवाल के सचिव थे। राजेंद्र कुमार ने अपने दोस्त के साथ 2006 में कंपनी शुरू की थी। सीबीआई को शिकायतें मिली थीं कि राजेंद्र कुमार ने अपनी नियुक्ति के दौरान निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया। सीनियर ब्यूरोक्रेट आशीष जोशी ने उनके खिलाफ कथित तौर से भ्रष्टाचार की गतिविधियों में शामिल होने की शिकायत ऐंटी-करप्शन ब्रांच चीफ एसके मीणा को भेजी थी।
राजेंद्र कुमार की गिरफ्तारी पर उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि केंद्र सरकार निचले स्तर पर उतर आई है। यह दिल्ली सरकार को बदनाम करने की साजिश है। दिल्ली सरकार के काम करने वाले अधिकारियों को हटाया जा रहा है। राजेंद्र कुमार की गिरफ्तारी पूरे सीएम दफ्तर को पंगु बनाने के मकसद से की गई है। केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से कदम उठा रही है।
पिछले साल 15 दिसंबर को सीबीआई ने मुख्यमंत्री कार्यालय के करीब राजेंद्र कुमार के दफ्तर में छापा मारा था। छापे के बाद ‘आप’ सरकार और केंद्र सरकार के बीच तीखे आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर चला था। आरोप था कि एक निजी कंपनी को 2007 से 2009 के दौरान पांच ठेकों में कथित तौर पर 9.5 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाया गया। खबरों के मुताबिक प्रधान सचिव राजेन्द्र कंपनी ने एंडेवर बनाकर फायदा पहुंचाया। राजेन्द्र कुमार कुमार ने नियम कायदों को ताक में रखकर अपनी कंपनी को सरकारी ठेका दिया था। एक अन्य अधिकारी आशीष जोशी की शिकायत पर यह जांच की गई थी। दिसंबर में छापे मारे गए थे, तब करीब ढाई लाख रुपये नकद और 3 लाख की विदेशी मुद्रा और फोन में कई रिकॉर्डिंग मिली थी।

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