जाटों के सामने झुकी खट्टर सरकार, कई मांगें मानी

नई दिल्ली। हरियाणा सरकार ने जाटों की कई मांगें मान ली हैं। इसके तहत आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी का वादा भी किया गया है। सरकार 31 मार्च तक विधानसभा में जाट आरक्षण बिल ला सकती है।

इससे पहले सरकार के साथ जाट नेताओं की हुई बैठक में जाट नेताओं ने आरक्षण पर 31 मार्च तक का अल्टीमेटम सरकार को दिया। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेताओं का कहना है कि बातचीत के बाद ही वो आगे की रणनीति तय करेंगे और तब तक आंदोलन स्थगित रहेगा। जाट नेताओं ने तीन अप्रैल को एक बैठक कर आगे की रणनीति तय करने का फैसला किया है। आरक्षण संघर्ष समित के नेता यशपाल मलिक ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार हमारे सुझावों पर गौर करेगी और इस बाबत बिल लेकर आएगी। दरअसल, जाट नेता इसी सत्र में आरक्षण से जुड़े बिल को विधानसभा में लाने की मांग कर रहे हैं। आरक्षण को लेकर हिंसक झड़प में 30 लोगों की जान चली गई थी।

बैठक में जाट नेताओं ने कहा कि सरकार आरक्षण के दौरान दर्ज किए गए मुकदमे वापस ले। इस मसले पर सरकार विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को बैठक में आने से पहले ही जाट समझौते के मूड में थे। यही वजह रही कि सरकार से बातचीत के दौरान जाट प्रतिनिधियों ने सकारात्मक रवैया बनाए रखा। हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद सरकार ने अपना पक्ष नहीं रखा है, लेकिन जाट नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कई बातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार से सकारात्मक बातचीत हुई है और सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी के भी खिलाफ झूठे मामले दर्ज नहीं होंगे। जिस किसी को भी लगे कि गलत मामला दर्ज हुआ है वह कभी भी आधिकारियों से मिल सकता है।

चिंता की जरूरत नहीं – राजनाथ
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हरियाणा में जाटों के आंदोलन दोबारा शुरू होने की आशंका को खारिज करते हुए विश्वास जताया कि इसका कोई समाधान निकाल लिया जाएगा। राजनाथ ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से फोन पर बात की और स्थिति की समीक्षा की। यहां एक समारोह से इतर संवाददाताओं से गृह मंत्री ने कहा, ‘मैंने हरियाणा के मुख्यमंत्री से बात की है। किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह और हरियाणा के मुख्यमंत्री को आगाह किया है कि इस बार पिछली बार की तरह हालात न होने दें।

इससे पहले जाट आरक्षण के मुद्दे पर हरियाणा के मुख्य सचिव और डीजीपी की जाट नेताओं से मुलाकात हुई। पिछली बार की तरह इस बार जाट आरक्षण की आग पूरे राज्य में न फैले इसके लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। सोनीपत में धारा 144 लगा दी गई है। झज्जर, सोनीपत, रोहतक में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जींद के संवेदनशील इलाकों में लोगों को एक समूह में जमा होने पर पाबंदी लगा दी गई है। केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों की 80 कंपनियां (करीब 800 जवानों को) राज्य में भेजी हैं जिन्हें रोहतक और झज्जर जिलों जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जा रहा है। पिछले महीने आंदोलन में ये जिले सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रोहतक रेंज के पुलिस महानिरीक्षक संजय कुमार ने कहा कि हमें पहले ही अर्धसैनिक बल मिल चुका है। पुलिस अलर्ट पर है। हम सभी इंतजाम (कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए) कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों और रोहतक के आसपास तैनाती के लिए राज्य के भीतर से भी अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है। कुमार ने कहा कि हमने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं। हमारे पास पर्याप्त बल हैं और आवश्यकता के हिसाब से तैनाती कर रहे हैं।

जाटों की मांगें
– हरियाणा और केंद्र में ओबीसी में शामिल किया जाए और आरक्षण दिया जाए।
– पिछले महीने हुए आंदोलन के दौरान गोली चलाने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
– मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए।
– आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
– आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों को तुरंत रिहा किया जाए।
– सांसद राजकुमार सैनी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। सैनी ने कहा था कि आंदोलनकारियों को शर्म आनी चाहिए।

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