जकार्ता। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में गुरुवार 14 जनवरी को सात जगहों पर धमाके हुए। इनमें से दो संयुक्‍त राष्‍ट्र दफ्तर के पास मौजूद स्टारबक्स कैफ़े के पास हुए। इन धमाकों में सात लोगों की मौत हुई है, जिसमें 3 पुलिसकर्मी और 4 आम नागरिक हैं। राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इसे आतंकी हमला करार दिया और साफ कहा कि शक की सुई आईएस आतंकियों की ओर है। इसके बाद राष्‍ट्रपति ने कहा कि अब स्थिति नियंत्रण में है।

सीरियल ब्लास्ट को लेकर शहर की पुलिस ने कहा है कि इस आतंकी हमले के पीछे निश्चित रूप से आईएसआईएस का हाथ है। ख़बर ये भी आ रही है है कि 10 से 14 आतंकी इस हमले के पीछे हो सकते हैं। वहीं, जकार्ता पुलिस ने 4 आतंकियों के मारे जाने की बात कही है। इसके साथ ही पुलिस अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए जानकारी दी है कि शहर में हुए आतंकी हमले में चार संदिग्‍ध हमलावरों को गिरफ्तार किया गया है। जकार्ता पुलिस के अनुसार, अब इलाका सुरक्षित है।

घायलों को अस्पताल ले जाते सुरक्षाकर्मी
घायलों को अस्पताल ले जाते सुरक्षाकर्मी

कुछ स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक तीन आतंकियों ने खुद को धमाका कर उड़ा लिया है, जबकि कुछ एक इमारत में छिपे हुए हैं। राजधानी के कुछ इलाकों में अभी भी फ़ायरिंग जारी है और पुलिस ने लोगों से घरों में ही बने रहने की अपील की है। यह हमला पेरिस हमले जैसा ही है। हमलावरों ने भीड़भाड़ वाले इलाके को चुना। इंडोनेशिया पहले भी कई आतंकी हमलों को झेल चुका है।

इंडोनेशिया पर हुए दस बड़े आतंकी हमले

15 अप्रैल 2011- पश्चिमी जावा शहर में एक आत्मघाती हमलावर ने मस्जिद में धमाका किया। इस हमले में हमलावर की मौत हुई और 28 लोग घायल हो गए।

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1 अक्टूबर 2005- बाली के दो शहरों जिमबारन और कुटा में सीरीयल ब्लास्ट और सीरीयल कार ब्लास्ट हुए थे। इस आतंकी हमले में 20 लोगों की मौत हुई थी जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। साथ ही तीनों हमलावर भी मारे गए थे।

28 मई 2005- सुलावेसी के टेनटेना बाजार में 15 मिनट की देर से दो विस्फोट हुए थे। इस हमले में 22 लोगों मारे गए थे जबकि 40 से अधिक घायल हुए थे।

13 नवंबर 2004- सुलावेसी के पोसो शेहर में एक बस में धमाका किया गया था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी जबकि तीन घायल हुए थे।

9 सितंबर 2004-
जकार्ता में ऑस्ट्रेलियाई दूतावास के बाहर एक कार में धमाका किया गया था। इस हमले में हमलावर सहित कम से कम नौ लोगों की मौत हुई थी और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे। जेमाह इस्लामिया ने हमलों की जिम्मेदारी ली थी।

31 दिसंबर 2003-
असेह में एक कॉन्सर्ट के दौरान धमाके किए गए थे। धमाकों ने तीन बच्चों सहित 10 लोगों की जान ली थी जबकि 45 घायल हुए थे। इंडोनेशिया की सेना ने फ्री असेह मूवमेंट को इन हमलों का जिम्मेदाप ठहराया था।

5 अगस्त 2003-
एक आत्मघाती हमलावर ने जेडब्ल्यू मेरियट होटल के बाहर एक कार में धमाका किया था। इस हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी जबकि 150 लोग जख्मी हुए थे। मरने वालों में एक डच व्यापारी, एक दानिश और दो चीनी सैलानी भी शामिल थे।

12 अक्टूबर 2002-
बाली के टूरिस्ट स्पॉट पर भी आतंकी हमला हो चुका है। ये हमला इंडोनेशिया के इतिहास में सबसे खौफनाक हमलों में से एक माना जाता है। इस हमले में कम से कम 202 लोगों की जानें गई थीं, जिसमें 88 ऑस्ट्रेलियाई और 38 इंडोनेशिया के रहनेवाले थे। धमाके में 240 लोग घायल हुए थे। हमले का आरोपी तीन आतंकवादियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में मौत की सजा सुनाई गई थी।

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24 दिसंबर 2000- अल कायदा और जेमाह इस्लामिया ने मिलकर क्रिस्मस ईव पर कई सीरीज ब्लास्ट किए। जकार्ता, पेकानबारू, मेदान, बानडुंग, बातम द्वीप, मोजोकेर्तो, माताराम और सुकाबुमी के गिरजाघरों में धमाके किए गए थे। जिसमें 18 लोगों की जानें गई थीं जबकि कई घायल हुए थे।

21 जनवरी 1985-
इंडोनेशिया के जावा में एक बौद्ध मंदिर में आतंकी हमला किया गया था। इस हमले में किसी की जान नहीं गई थी लेकिन नौ बम धमाकों से 9 स्टूपों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा था। एक नेत्रहीन धर्मवक्ता हुसैन अली अल हबसी को इन धमाकों का दोषी करार दिया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।