अब बसपा महासचिव आरके चौधरी ने छोड़ी पार्टी

ओपिनियन पोस्ट
Thu, 30 Jun, 2016 17:23 PM IST

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को एक और झटका लगा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़ने के बाद अब बसपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मंत्री आर. के. चौधरी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मौर्य की तरह चौधरी ने भी बसपा प्रमुख मायावती पर विधानसभा चुनाव के टिकट बेचने का आरोप लगाया है। मायावती पर इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। अब तक इस तरह के आरोप लगाने वाले ज्यादातर वे नेता होते थे जिन्हें टिकट नहीं मिलता था या फिर पार्टी के छोटे नेताओं की ओर से टिकट बेचने के आरोप बसपा सुप्रीमो पर लगाए जाते थे। मगर इस बार दस दिन के भीतर पार्टी के दो बड़े नेताओं ने इस तरह के आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ी है। इससे मायावती के लिए आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

रीयल एस्टेट कंपनी बन गई बसपा
चौधरी ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में बसपा छोड़ने का एेलान करते हुए आरोप लगाया कि मायावती ने बाबा साहब भीमराव अाम्बेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के आदर्शों से किनारा कर लिया है। वह सिर्फ दौलत कमाने में लगी हैं। ऐसे में वह बसपा में घुटन महसूस कर रहे थे, इसलिये अब वह इसे छोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा अब सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन नहीं रह गई है बल्कि मायावती ने इसे अपनी निजी रीयल एस्टेट कंपनी बना डाला है। वह अब पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनती बल्कि कुछ चाटुकारों के कहने पर उल्टे-सीधे फैसले करती रहती हैं। चौधरी ने कहा कि मान्यवर कांशीराम के अनुयायियों और कार्यकर्ताओं में यह बेचैनी है कि बहनजी पार्टी के भविष्य को अंधकार में झोंक कर धुआंधार कमाई में जुट गई हैं।
पहले भी पार्टी छोड़ चुके हैं चौधरी
चौधरी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। इससे पहले भी वो पार्टी छोड़कर चले गए थे लेकिन 2012 में फिर वापस आ गए थे। चौधरी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार थे।उन्होंने कहा कि पार्टी में सब कुछ बदल गया है। ये वो पार्टी नहीं रही गई जो कांशीराम के ज़माने में हुआ करती थी। चौधरी ने कहा कि वे 11 जुलाई को भावी रणनीति तय करेंगे। सूत्रों की मानें तो चौधरी मोहनलालगंज से टिकट मांग रहे थे लेकिन बसपा सुप्रीमो ने यहां से किसी और को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे खफा होकर ही चौधरी ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर डाला। इससे पहले 22 जून को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और विधानसभा में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी मायावती पर लगभग ऐसे ही आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी।

 

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