फिर भी हड़ताल पर अड़ीं यूनियनें    

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के करीब 33 लाख कर्मचारियों के लिए सरकार ने मंगलवार को सालाना बोनस की घोषणा की, जो पिछले दो वर्षों से बकाया था। सरकार ने ट्रेड यूनियनों की हड़ताल रोकने के लिए मिनिमम वेज एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों को मान लिया है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर बताया कि नॉन एग्रीकल्‍चर वर्कर्स के लिए 350 रुपये रोजाना मिनिमम वेज फिक्‍स किया गया है। अभी मिनिमम वेज 246 रुपये है। बोनस के हकदार ग्रुप सी के कर्मचारी रहेंगे। जेटली ने कहा कि राज्य सरकारें चाहें तो न्यूनतम मजदूरी इससे ज्यादा दे सकती हैं, लेकिन कम नहीं दे सकतीं। इसके बावजूद लेफ्ट ट्रेड यूनियन सीटू ने हड़ताल का फैसला किया है। जेटली ने कहा, ”मेरा मानना है कि हमारे देश में जिम्‍मेदार ट्रेड यूनियने हैं।” देश की करीब 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने 2 सितंबर 2016 को देशव्‍यापी हड़ताल की घोषणा की है।

अरुण जेटली ने कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 2014-15 और 2015-16 का बोनस संशोधित मानदंडों के आधार पर जारी किया जाएगा। यह दो वर्षों से बकाया था। इसके बाद बोनस को सातवें वेतन आयोग के तहत दिया जाएगा। जेटली ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के बारे में केंद्र सरकार राज्य सरकारों को पत्र लिखेगी। कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स और उनकी एजेंसी का रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य है और राज्‍यों को इसे सख्‍ती से लागू कराने को कहा जाएगा।

ट्रेड यूनियंस की स्‍ट्राइक के मसले पर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। इस मीटिंग में जेटली के अलावा श्रम मंत्री बंडारू दत्‍तात्रेय और बिजली मंत्री पीयूष गोयल उपस्थित थे, जहां यूनियन वर्कर्स की हड़ताल रोकने के लिए केंद्र सरकार के एक्‍शन प्‍लान पर चर्चा की गई। मोदी सरकार ट्रेड यूनियनों की हड़ताल की घोषणा से परेशान है। सरकार अर्थव्‍यवस्‍था को रफ्तार देने के लिए कई बड़े सुधार करने की तैयारी में है। ऐसे में वर्कर्स की स्‍ट्राइक से सेंटिमेंट बिगड़ सकता है। बड़े उद्योगपतियों का पक्ष लेने के आरोपों से लड़ रही सरकार को इस हड़ताल से बड़ी किरकिरी झेलनी पड़ सकती है।

ट्रेड यूनियनें पिछले साल सितंबर से न्‍यूनतम मजदूरी बढ़ाने समेत 12 बड़ी मांग कर रही हैं। यूनियनों ने हाल ही में सरकार की ओर से इन्श्‍योरेंस, डिफेंस जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि यह देश की सुरक्षा से समझौता है। आरएसएस से संबद्ध यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने शुक्रवार की हड़ताल से अपने को अलग रखा है। बीएमएस का कहना है कि सरकार ने उनकी कई बड़ी मांगों को मान लिया है।

 

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