न्यूज फ्लैश

विनेश फोगाट ने जीता स्‍वर्ण

एशियाई खेलों में स्‍वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला, 50 किलोग्राम वर्ग में जापान की यूकी को 6-2 से हराया

ओपिनियन पोस्‍ट।

जकार्ता में चल रहे एशियाई खेलों में विनेश फोगाट ने महिला कुश्ती में स्‍वर्ण पदक जीता है। 50 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने जापान की यूकी को 6-2 से हराया। वह एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं। इनके अलावा शूटिंग में दीपक कुमार और ट्रैप स्पर्धा में अखिल श्योरण ने रजत पदक जीता है।AG Logo

भारत ने एशियाई खेलों में अभी तक दो ही स्‍वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। दोनों ही पदक कुश्ती से मिले हैं। इससे पहले रविवार को बजरंग पूनिया ने इन खेलों का पहला स्‍वर्ण पदक दिलाया था। सोमवार को भारत की विनेश जब अपनी बाउट में उतरीं,  तो वह पैर में दर्द की समस्या से जूझ रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी सभी बाउट जीतीं और विरोधी रेसलर को कोई मौका नहीं दिया।

फाइनल मुकाबले में विनेश ने संभल कर शुरुआत की और पहले वह डिफेंसिंग अप्रोच के साथ खेल रही थीं। विनेश फोकस नजर आ रही थीं और जब रेफरी ने उन्हें रक्षात्मक खेल छोड़ पॉइंट्स अर्जित करने के लिए कहा,  तो फिर विनेश ने मैट पर अपनी चपलता दिखाई और जापानी रेसलर पर बढ़त बना ली।

अंकों के लिहाज से विनेश ने अपनी पहली बढ़त 4-0 से बनाई थी। इसके बाद इरी युकी ने 2 अंक अर्जित किए। इस बीच विनेश ने भी 2 अंक लेकर 4 अंकों की अपनी लीड को बरकरार रखा। अंत में मैच का निर्धारित समय पूरा होने के बाद विनेश ने 6-2 के अंतर से ऐतिहासिक स्‍वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

फाइनल में पहुंचने से पहले विनेश ने सेमीफाइन में कोरिया की पहलवान किम को पटखनी दी थी। इस मुकाबले में विनेश ने किम को कोई मौका ही नहीं दिया और बाउट शुरू होते ही कुछ ही पलों में 11 अंक बटोर कर तकनीकी आधार 11-0 से मुकाबला अपने नाम किया था। इस तरह उन्होंने सेमीफाइनल में एकतरफा जीत दर्ज कर स्‍वर्ण पदक के लिए अपनी चुनौती ठोकी।

भारत की ओर से विनेश ने दिन की शुरुआत करते हुए चीन की सुन को हराया। उन्होंने इस जीत के साथ रियो ओलंपिक की अपनी कड़वी यादों को पीछे छोड़ दिया जब चीनी खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबले में पैर में चोट लगने के कारण विनेश मुकाबला हार गई थीं। इस मुकाबले में विनेश ने इस बार विरोधी खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया और उसे 8-2 से हराया।

मुश्किलों से भरा जीवन

बचपन से लेकर एशियन गेम्स में स्‍वर्ण पदक जीतने तक का सफर विनेश के लिए कभी आसान नहीं रहा। उन्होंने न सिर्फ अपनी निजी जिंदगी की कठिनाइयों को पार किया,  बल्कि मजबूत हौसले के साथ आगे बढ़ती रहीं। महज दस साल की उम्र में ही जमीन विवाद के चलते उनके पिता राजपाल की हत्‍या कर दी गई थी। विनेश के जीवन से ताऊ महावीर फोगाट ने इस खालीपन को भरने की कोशिश शुरू की। उन्होंने विनेश को पहलवानी के गुर सिखाने शुरू किए। ताऊ महावीर और विनेश की मेहनत रंग लाई और वह अंतरराष्ट्रीय पहलवान बन गईं।

The following two tabs change content below.
ओपिनियन पोस्ट

ओपिनियन पोस्ट

ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।
ओपिनियन पोस्ट
About ओपिनियन पोस्ट (4584 Articles)
ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।

Leave a comment

Your email address will not be published.


*