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रेडियो ऑन किया तो बजा मौत का डंका

मुआवजा और मामले की जांच कराए जाने की मांग, हैरत में डालते हैं कई सवाल  

उदयपुर।

वैसे तो सभी प्रमुख स्‍थानों पर चेतावनी के जरिये जागरूक किया जाता है‍ कि किसी भी लावारिस वस्‍तु को न छुएं, वह बम हो सकती है। इस चेतावनी पर ध्‍यान न देना एक अधेड़ व्‍यक्ति देवीलाल पर उस समय भारी पड़ गया जब राजस्थान में उदयपुर के गड़िया देवरा गांव में शनिवार 15 जुलाई की रात करीब 11.30 बजे रेडियो ट्रांजिस्टर में विस्‍फोट हो जाने से उसके शरीर के चीथड़े उड़ गए। हालांकि यह ट्रांजिस्‍टर ड्राईक्‍लीनर की दुकान पर कोई रख गया था जो उसे वापस लेने नहीं आया था।

इस मामले में की उच्चस्तरीय जांच और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की जा रही है। इसके अलावा कुछ सवाल ऐसे हैं जो हैरत में डालते हैं। मसलन, देवीलाल के चेहरे पर जिससे छोटे घाव बने वे पदार्थ ट्रांजिस्टर में कैसे आए। ब्लास्ट के समय घर के बाहर खड़ी जिस कार के कांच फूटे,  उसका पता नहीं चल पाया। एफएसएल टीम को रेडियो के कुछ ही टुकड़े मिले। ट्रांजिस्टर रखने वाला अज्ञात कौन था, किसी को पता नहीं। कोई विस्फोटक सामग्री या केमिकल नहीं मिला।

घंटाघर थाना इलाके में कपड़ा प्रेस करने वाले देवीलाल की दुकान पर एक ग्राहक कुछ कपड़े और एक रेडियो रखकर चला गया था। उसके बाद इसे लेने नहीं आया। देवीलाल ने रेडियो का प्लग लगाया तो धमाका हुआ और इसमें देवीलाल की मौत हो गई। बसीठा समाज ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है। समाज का कहना है कि देवीलाल की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

घंटाघर सीआई राजेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि गडिय़ा देवरा निवासी 48 साल के देवीलाल धोबी की पत्नी घर के नीचे ही ड्राइक्लीनर की दुकान पर काम करती है। शनिवार को देवीलाल दुकान गया और साल भर से रखे ट्रांजिस्टर को ऑन किया तो जोरदार धमाका हो गया। आवाज सुन पत्नी दौड़कर वहां पहुंची तो देवीलाल का शरीर क्षत-विक्षत पड़ा था।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि बिजली सप्लाई होते ही रेडियो के अंदर लगे कॉपर बाइंडिंग ट्रांसफार्मर में‍ विस्‍फोट हुआ था। लेकिन धमाका इतना जोरदार था कि ट्रांसफार्मर और रेडियो पर लगे बटन के टुकड़े अधेड़ के चेहरे और सिर में घुस गए थे। तथ्य जुटाने के लिए एफएसएल की टीम भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने लाश का पोस्टमार्टम कराया और परिजन को सुपुर्द किया।

एफएसएल वरिष्ठ वैज्ञानिक अभय प्रताप सिंह ने बताया कि मौके पर विस्फोटक सामग्री या केमिकल नहीं मिला है। कोई वायर शार्ट सर्किट नहीं हुआ है। एमपीयूएटीके सीटीएई महाविद्यालय के इलेक्ट्रिकल विभाग के प्रोफेसर का कहना है कि ट्रांजिस्टर से इतना बड़ा ब्लास्ट नहीं हो सकता कि उसकी आवाज एक किलोमीटर दूर तक जाए और शरीर के चीथड़े उड़ जाएं। बिजली उपकरणों में शॉर्ट सर्किट से स्पार्क हो सकता है।

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