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जानें, तेल में आग की असली वजह

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कहा-एक बड़े आपूर्तिकर्ता के बाजार में अनुपस्थित होने की आशंका से बाजार में घबराहट

ओपिनियन पोस्‍ट।

आम चुनाव नजदीक आने के मद्देनजर पेट्रोल व डीजल के बढ़ते दाम केंद्र सरकार की चिंता का सबब बन गए हैं। तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि क्रूड आयल यानी कच्‍चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे देशों की अर्थव्‍यवस्‍था प्रभावित हो रही है। लेकिन पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्‍वस्‍त किया कि उन्‍हें समस्‍या का समाधान मिल गया है।

दरअसल, क्रूड की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध है। क्रूड की कीमत 86.74 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी जिससे भारत जैसे देश परेशान हैं क्योंकि वे 83-84 प्रतिशत कच्‍चा तेल आयात करते हैं। 4 नवंबर, 2018 से ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हो सकता है, जिसके मद्देनजर ईरान से तेल खरीदने में भारत को भी परेशानी होगी।

इस संदर्भ में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कहा है कि भारत को तेल मिलने में कोई दिक्कत नहीं पेश आएगी। भारत अपनी जरूरत का तकरीबन 15 प्रतिशत तेल ईरान से आयात करता है। इस वर्ष अभी तक 2.5 करोड़ टन क्रूड ईरान से आयात करने का समझौता हो चुका है।

उन्‍होंने कहा कि ईरान से आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में उसकी भरपाई के विकल्प मौजूद हैं। एक बड़े आपूर्तिकर्ता के बाजार में अनुपस्थित होने की आशंका से बाजार में घबराहट है और इसी कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।

प्रधान ने कहा,  ‘ओपेक देशों ने जून, 2018 में कहा था कि वे तेल उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। दूसरी तरफ क्रूड की कीमतों को लेकर अस्थिरता बनी हुई है। यह अस्थिरता आपूर्ति बाधित होने की वजह से नहीं बल्कि बाजार का सेंटिमेंट्स प्रभावित होने की वजह से बनी है। इसके लिए भू-राजनैतिक हालात जिम्मेदार हैं। हमें यह समझना होगा कि क्रूड का स्थिर बाजार सभी के लिए बेहतर है।’

अपने प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देश ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के लागू होने के बढ़ते आसार के बीच भारत ने नाराजगी जताई है। भारत ने तेल उत्पादक देशों के संगठन ‘ओपेक’ पर आरोप लगाया है कि वे वादे के मुताबिक ईरान की आपूर्ति की भरपाई के लिए कच्चे तेल का उत्पादन नहीं बढ़ा रहे हैं तो आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से नहीं बल्कि सेंटिमेंट्स की वजह से क्रूड महंगा हो रहा है।

उधर, भारतीय तेल कंपनियों ने तेजी से ईरान से तेल खरीद के सौदे किए हैं। पिछले वर्ष 2.26  करोड़ टन क्रूड ईरान से खरीदा गया था। इस तरह से देखा जाए तो वर्ष 2017-18 के मुकाबले भारत ईरान से ज्यादा तेल खरीदने का समझौता कर चुका है।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ उपस्थित आईएचएस मार्केट उपाध्यक्ष डैनिएल यर्गिन ने भी संवाददाताओं से कहा कि बाजार के समक्ष धारणा प्रभावित होने की दिक्कत है, आपूर्ति की नहीं। प्रतिबंध लागू होने का समय नजदीक आते जाने के मद्देनजर इस महीने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें चार साल के उच्च स्तर 86.74  डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। हालांकि अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लागू होने का समय बढ़ाए जाने के संकेत के बाद दाम कुछ नरम पड़े हैं।

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