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दो हत्‍यारों को सजाए मौत, एक अन्‍य को उम्रकैद

इन हत्‍यारों ने 18 मार्च 2009 को आईटी एक्जीक्यूटिव जिगिशा घोष और 30 सितंबर 2008 को पत्रकार सौम्या की हत्‍या कर दी थी।  

नई दिल्ली। अदालत के इस फैसले से उन दो महिलाओं को न्‍याय मिला है, जिनकी अलग-अलग समय पर हत्‍या कर दी गई थी। 2009 के जिगिशा घोष मर्डर केस में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दो दोषियों (रवि कपूर और अमित शुक्ला) को फांसी और एक (बलजीत मलिक) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे पूर्व आईटी एक्जीक्यूटिव जिगिशा घोष की हत्या और लूटपाट मामले में तीन लोगों को दोषी ठहराया और कहा कि यह ‘काफी स्पष्ट’ है कि उन्होंने अपराध किया। दोषियों ने जिगिशा के एटीएम कार्ड को सरोजिनी नगर मार्केट से महंगे चश्मे, कलाई घड़ियां और जूते खरीदने के लिए इस्तेमाल किया था।

पुलिस के मुताबिक,  28 वर्षीय जिगिशा एक प्रबंधन कंसल्टेंसी फर्म में ऑपरेशंस मैनेजर के रूप में काम करती थी। 18 मार्च 2009 को उसके कार्यालय की कैब ने उसे सुबह करीब चार बजे दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार स्थित उसके घर के पास छोड़ा जिसके बाद उसका अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई। तीन दिन बाद उसका शव हरियाणा के सूरजकुंड के पास स्थित एक जगह से मिला।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत सिंह मलिक को भादंसं के तहत हत्या, अपहरण, लूटपाट, फर्जीवाड़े और साझा मंशा के अपराधों का दोषी ठहराया था। कपूर को आग्नेयास्त्र के इस्तेमाल के अपराध के लिए शस्त्र कानून के तहत भी दोषी ठहराया गया था। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उन्होंने (आरोपियों) उसकी हत्या की और शव को झाड़ियों में फेंक दिया। पारिस्थितिजन्य साक्ष्य यह स्पष्ट करता है कि यही लोग थे जिन्होंने अपराध किया था।’

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा था कि साक्ष्य से यह काफी स्पष्ट है कि उन्होंने अपराध किया। अपराध की कड़ियां जुड़ती हैं। इसलिए निर्दोषिता की संभावना नजर नहीं आती। रिकॉर्ड में यह साबित हो गया कि घटना के दिन जिगिशा अपेक्षित समय पर घर नहीं पहुंची। इसने कहा कि यह साबित हो गया कि तीनों दोषियों ने जिगिशा का अपहरण किया,  उसकी सोने की चेन,  दो मोबाइल फोन,  दो अंगूठियां और डेबिट व क्रेडिट कार्ड लूटकर उसकी हत्या कर दी।

जिगिशा की हत्या के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से सौम्या विश्वनाथन की हत्या का मामला भी सुलझ गया था जो एक समाचार चैनल में पत्रकार थी। सौम्या की 30 सितंबर 2008 को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वह तड़के अपनी कार में घर लौट रही थी। पुलिस ने दावा किया था कि जिगिशा और सौम्या दोनों की हत्या लूटपाट के लिए की गई थी। सौम्या केस में इन्हीं हत्यारों ने खुलासा किया था कि उन्होंने उसकी हत्या इसलिए की, क्योंकि सौम्या की सेंट्रो उनकी कार से आगे निकल गई थी। हत्यारों ने सौम्या के सिर में गोली मारी थी, जिसकी वजह से कार डिवाइडर पर चढ़ गई। शुरू में पुलिस ने इसे दुर्घटना का मामला समझा, लेकिन जब सौम्या के सिर से गोली निकली तो मामला सुलझ गया।

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