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आस्था अंधी भी होती है, जो जुर्म नहीं देखती

निशा शर्मा।

गुरमीत राम रहीम आज कोई अंजान नाम नहीं है। हालांकि आज से करीब पांच साल पहले नाम नहीं लेकिन उस वह शख्स की शख्सियत अंजान था मेरे लिए, मैं टीवी चैनल के लिए हरियाणा की ऐतिहासिक चीजों पर कार्यक्रम बना रही थी। जिस लिस्ट में डैरा सच्चा सौदा का नाम भी था। वो डेरा जिसके एक जमाने से ही लाखों की संख्या में समर्थक रहे हैं। जो सियासत पर हमेशा हावी होता दिखा, बिना उसके समर्थन के सरकार बनाना जहां मुश्किल होता गया।

ऐसे शख्स के बारे में खूब पढ़ा, यह भी पढ़ा की गुरमीत राम रहीम जो तीसरी बार गद्दी पर बैठे कई विवादों में घिरे रहे हैं। राज्य के कई जिलों को कवर करते हुए मुझे सिरसा पहुंचना था। लेकिन हर जिले में वहां कि धरोहर के साथ-साथ गुरमीत राम रहीम के बारे में भी लोगों के विचार में जानती गई। कई लोग उन्हे ढोंगी बताते थे, तो कई भगवान मानते थे। ढोंगी बताने वाले लोगों का मानना था कि वह बाबा कम सियासतदान, गुंडा ज्यादा है। जब मैंने पूछा कि क्या यौन उत्पीड़न के जो केस उन पर चल रहे हैं वह सच हैं तो उनकी बातें चौंका देने वाली थीं। लोग कहते थे कि यह तो वह केस हैं जो सामने आए हैं, कई केस तो ऐसे हैं जो सामने ही नहीं आए। अगर कोई गुरमीत राम रहीम के खिलाफ बोलना भी चाहे तो वह बोल नहीं पाता है क्योंकि उसे या तो मौत से मारने धमकियां या मौत के घाट उतार दिया जाता है। लोग डर के मारे नहीं बोलते हैं। दूसरा वह पैसे से लोगों का मुंह बंद कर देता है।

आप जाएंगी तो आपको पता भी नहीं लगेगा कि कौन उसका मुलाजिम है, आपकी पल पल की खबर वहां तक पहुंचेगी। यह सब सुनने के बाद मैंने सोचा कि जाने की खबर किसी को नहीं दूंगी। लेकिन जब मैंने वहां से सहयोगी पत्रकार को फोन लगाया तो उसने बताया कि आपको आने से पहले गुरमीत राम रहीम से मिलना तो दूर राम रहीम के मीडिया मैनेजर से बात करनी होगी, तभी वह आपसे मिलेगा। मैंने उसे अगले दिन की मीटिंग फिक्स करने को कहा। अभी मैं सिरसा से करीब 150 किलोमीटर दूर थी। लोगों से जानकारी लेनी फिर शुरु की। जो तारीफ़ कर रहे थे वह सरकार को दोषी बता रहे थे कि बाबा उन्हे अस्पताल की सेवाएं देते हैं, खाना देते हैं लोगों की सेवा करते हैं। अपने प्रवचनों में भी कभी किसी धर्म को बुरा नहीं कहते।

इन्ही बातों समाचार रिपोर्टों, पत्रकारों के गुरमीत सिंह के लिए रिव्यू जो राम रहीम के हक में नहीं थे मुझे सिरसा ले गए। मानिये मैं हैरान थी यह सुनकर जब सिरसा में गांव के एक पंच ने मुझे कहा कि आप फलाना चैनल से आई हैं लेकिन आपकी मुलाकात बाबा जी से तो नहीं हो पाएगी। मैंने कहा कोई बात नहीं हम इस धरोहर को ही जान लेंगे, लोगों तक पहुंचाएंगे इसके बारे में। लेकिन मुझे पता नहीं था कि वह इंसान जो कह रहा था वह सच था। मेरी मुलाकात गुरमीत सिंह से नहीं हुई मीडिया मैनेजर ने कहा कि वह अभी सिरसा में नहीं हैं। हालांकि उस जगह का मुयायना मैंने जरुर किया। मैंने पाया कि पहले तो मीडिया के नाम पर कोई बोलने के लिए तैयार नहीं हो रहा था जैसे बोलना ही अपराध हो। हालांकि गुरमीत सिंह के मीडिया मैनेजर ने सवालों के जवाब में कई  बातें कही साथ ही बताया कि वह किसी मीडिया से नहीं मिलते, जो कहना होता है वह अपने समाचार पत्रिका के द्वारा कहते हैं। यह बात 2013 की है जब गुरमीत सिंह की कोई फिल्म नहीं आई थी। साथ ही कहा जब भी निकलते हैं एक काफिले के साथ निकलते हैं लेकिन उनके करीबियों को भी नहीं पता होता कि वह किस गाड़ी में जा रहे हैं, रास्ते में गाड़ियां बदलते रहते हैं। बाबा जहां रुकते हैं वह आलीशान महल की तरह है जहां सभी लग्जरी सुविधाएं हैं साथ ही बाबा की एक गुफा भी है जहां जाने के बाद वह किसी से नहीं मिलते और ना ही किसी को वहां जाने की इजाजत है। मैंने डैरा सच्चा सौदा को ऐतिहासिक धरोहरों से हटा दिया। लेकिन वहां से जाना की आस्था अंधी भी होती है जो जुर्म नहीं देखती।

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ओपिनियन पोस्ट एक राष्ट्रीय पत्रिका है जिसका उद्देश्य सही और सबकी खबर देना है। राजनीति घटनाओं की विश्वसनीय कवरेज हमारी विशेषज्ञता है। हमारी कोशिश लोगों तक पहुंचने और उन्हें खबरें पहुंचाने की है। इसीलिए हमारा प्रयास जमीन से जुड़ी पत्रकारिता करना है। जीवंत और भरोसमंद रिपोर्टिंग हमारी विशेषता है।
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