पोषक बाजरा अपनाने के लिए आंदोलन

ओपिनियन पोस्ट
Tue, 28 Nov, 2017 14:35 PM IST

देब दुलाल पहाड़ी।

कर्नाटक ने देश के बाकी हिस्सों में बाजरा आंदोलन शुरू करने की ठान ली है। बाजरा आंदोलन को देशव्यापी बनाने के मकसद से कर्नाटक के कृषि मंत्री कृष्ण बायरा गौड़ा ने बाजरे के अनेक गुण बताए और जन-जन से बतौर वैकल्पिनक आहार बाजरा अपनाने की अपील की। वह एसोचैम-कर्नाटक सरकार के संयुक्त रोडशो को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने ‘इंटरनेशनल ट्रेड फेयर-आर्गेनिक्स एण्ड मिलेट्स-2018’ की वेबसाइट और लोगो का अनावरण किया। यह व्यापार मेला 19 से 21 जनवरी तक बंगलुरु के पैलेस ग्राउंड में होगा।

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हाल ही में संयुक्तराष्ट्र को भेजे एक प्रस्ताव में कर्नाटक के कृषि मंत्री कृष्ण बायरा गौड़ा और केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 2018 को ‘अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित करने का आग्रह किया है। इसकी स्वीकृति मिलने से बाजरा के बारे में उपभोक्ताओं समेत नीति निर्माताओं,  उद्योग और शोध-विकास क्षेत्र में भी जागरूकता बढ़ेगी। इसका लक्ष्य दुनिया के बाकी देशों को ‘जैविक और बाजरा’ का स्वस्थ संदेश देना है।

‘जैविक और बाजार’ पर कर्नाटक सरकार के आह्वान पर पूरे देश के किसानों की उत्साहवर्द्धक प्रतिक्रिया रही है। साठ के दशक की ‘हरित क्रांति’ के बाद अनदेखी में भूले-बिसरे इन अनाजों की फिर से मांग बढ़ी है क्योंकि आज इनके पोषण के गुण जगजाहिर हैं। इन अनाजों पर सूखे का बुरा असर नहीं पड़ता है।

नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम-कर्नाटक सरकार के संयुक्त आयोजन में केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. एसके पटनायक ने कहा, “केंद्र सरकार स्कूल भोजन कार्यक्रमों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बाजरा को शामिल कराने का प्रयास कर रही है। नीति आयोग ने भी सुझाव दिया है कि बाजरा सार्वजनिक वितरण प्रणाली का हिस्सा होना चाहिए।”

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नेशनल रेनफैड एरिया अथॉरिटी (एनआरएए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अशोक दलवाई ने कहा कि राज्य सरकारों के साथ भारत सरकार बाजरा और जैविक उत्पादों की मांग बनाने की कोशिश कर रही है। उद्यमियों, औद्योगिक घरानों के लिए बाजरा की प्राथमिक और द्वितीयक प्रक्रिया के लिए मशीनरी में निवेश करने का अवसर है। प्राचीन काल में प्रचलित अन्न बजारे को चमत्कारी माना गया है पर धीरे-धीरे इसका हमारे खेतों और हमारे भोजन में मोटे तौर पर कोई अस्तित्व नहीं रह गया। हालांकि इसका प्रचलन दोबारा बढ़ा है जिसका श्रेय कर्नाटक सरकार को जाता है।’

बता दें कि बाजरे में गेहूं और चावल से बेहतर पोषण है। एमीनो एसिड प्रोफाइल भी अधिक संतुलित है। क्रूड फाइबर और आयरन, जिंक और फास्फोरस जैसे मिनरल के साथ यह पोषण सुरक्षा प्रदान करेगा और पोषण का अधूरापन भी दूर करेगा जो महिलाओं और बच्चों की बड़ी समस्या है।

इसी साल कर्नाटक के कृषि विभाग द्वारा बंगलुरु में आयोजित फूड इंडस्ट्री लीडर कंसोर्शियम फार आर्गेनिक्स एण्ड मिलेट्स (फिलकाम) की सफलता के मद्देनजर इंटरनेशनल ट्रेड फेयर- आर्गेनिक्स एण्ड मिलेट्स-2018 का आयोजन किया गया। कंसोर्शियम में फूड इंडस्ट्री के कई दिग्गजों जैसे ब्रिटानिया, आईटीसी, आईडी फ्रेश फूड्स, प्रो नेचर आर्गेनिक फूड्स, मदर इंडिया फार्म्‍स, फलदा एग्रो, श्रेष्ठ नैचुरल बायोप्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड आदि की भागीदारी देखी गई। आयोजन का मकसद बाजरे को दोबारा दैनिक आहार में स्थान देना है।

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