नई दिल्ली।

राजपूत युवा संगठन श्री राजपूत करनी सेना ने कहा है कि फिल्म की मेवाड़ रॉयल्टी के लिए स्क्रीनिंग की जानी चाहिए और अगर उन्हें भंसाली के राजपूत समुदाय के चित्रण में कोई आक्षेप नहीं मिला, तो वे पद्मावती के खिलाफ अपने विरोध को वापस ले लेंगे।

राजधानी में 22 नवंबर को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी आपत्ति कला के खिलाफ नहीं, इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने के खिलाफ है। “हम राजपूतों को हमारी विरासत पर गर्व है और हम ऐसी किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो हमारे आत्मसम्मान, अभिमान और सम्मान को चोट पहुंचाती हो।’’

श्री राजपूत करनी सेना के लोकेंद्र सिंह काल्वी ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने से पहले सभी तथ्यों और फिल्म में आपत्तिजनक दृश्यों को संपादित किया जाए। हम कला के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वास्तविकता में, कोई भी फिल्म निर्माता जो एक पीरियड ड्रामा का चित्रण कर रहा है, उसे सही तथ्यों को पेश करना चाहिए। हम कला के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वास्तविकता में, कोई भी फिल्म निर्माता जो एक पीरियड ड्रामा का चित्रण कर रहा है, उसे सही तथ्यों को पेश करना चाहिए।’

करनी सेना के अनुसार, भंसाली ने उन्हें लिखित रूप में आश्वासन दिया था कि वे राजपूत संगठनों के लिए ट्रेलर और फिल्म की प्री-स्क्रीन करेंगे लेकिन ऐसा करने में असफल रहे।

फिल्म की शूटिंग शुरू होने के बाद से ही संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती आंखों की किरकिरी बनी हुई है। 1 दिसंबर को रिलीज होने वाली फिल्म को अब निर्माताओं ने स्थगित कर दिया है। फिल्म को विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक संगठनों से विरोध मिला है क्योंकि उनका मानना है कि फिल्म का कंटेंट आपत्तिजनक है और भारत के इतिहास को गलत बताता है।

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दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर की प्रमुख भूमिकाओं में अभिनीत फिल्म महाकाव्य कविता “पद्मावत” पर आधारित है, जिसमें अपनी असाधारण सुंदरता के लिए प्रसिद्ध रानी पद्मिनी को पाने के लिए अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण की कहानी है। माना जाता है कि रानी पद्मिनी ने अपने गौरव और सम्मान की रक्षा के लिए 16 हजार शाही महिलाओं के साथ स्वयं को बलिदान कर ‘जौहर’  किया था।