पद्मभूषण व ज्ञानपीठ से सम्मानित कुंवर नारायण को भावभीनी श्रद्धांजलि

ओपिनियन पोस्ट
Wed, 15 Nov, 2017 16:59 PM IST

ओपिनियन पोस्ट साहित्य डेस्क

प्रख्यात कवि कुंवर नारायण के निधन पर पूरे देश की साहित्यिक बिरादरी में शोक की लहर छा गई। नई कविता को पहचान देने वाले कुंवर नारायण हालाँकि सिनेमा और संगीत में भी अच्छी पकड़ रखते थे लेकिन पहचान, नाम और शोहरत कवि के रूप में ही मिली। सोशल साइट्स पर साहित्यकारों ने उन्हें अपने दिल की गहराईयों से याद किया।

कुमार विश्वास : संभव हो तो लौट आना हमारे प्रिय कवि

बेहद दुखद ! मेरे आपके हमारे प्रिय कवि, पद्मभूषण, ज्ञानपीठ वरिष्ठ कवि श्री कुँवर नारायण श्वांस के छंद से मुक्त हो कर सुर के महालोक को प्रयाण कर गए ! संभव हो तो अपनी रचना में रची-बसी इसी आस्था से लबरेज़ लौट आना हमारे प्रिय कवि। (इसी के साथ कुमार ने कुंवर नारायण की यह कविता पोस्ट की)

अबकी बार लौटा तो…

अबकी बार लौटा तो

बृहत्तर लौटूंगा

चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं

कमर में बांधें लोहे की पूँछे नहीं

जगह दूंगा साथ चल रहे लोगों को

तरेर कर न देखूंगा उन्हें

भूखी शेर-आँखों से

अबकी बार लौटा तो

मनुष्यतर लौटूंगा

घर से निकलते

सड़को पर चलते

बसों पर चढ़ते

ट्रेनें पकड़ते

जगह बेजगह कुचला पड़ा

पिद्दी-सा जानवर नहीं

अगर बचा रहा तो

कृतज्ञतर लौटूंगा

अबकी बार लौटा तो

हताहत नहीं

सबके हिताहित को सोचता

पूर्णतर लौटूंगा !

यह भी पढ़ेंभूल जाओ हमें अब हमारा कोई ठिकाना नहीं

ओम निश्चल : एक हिसाब किताब उनसे अनचुकता ही रहा

कुंवर नारायण जी नहीं रहे। पिछली जुलाई से वे बीमार थे व हास्पिटल में थे। अाज सुबह ही मित्रों की खबर से मालूम हुआ कि नहीं रहे। उनके बारे में प्रिय अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी से लगभग नियमित रूप से खोज खबर लेता रहता था। गए कुछ सालों में उनसे कई बार मिलना हुआ। उनकी पुस्तकें आते ही उन्हें पढ़ने का चाव पीछा करता रहता। फिर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित ‘अन्वय’ और ‘अन्विति : (साहित्य के परिसर में कुंवर नारायण) ‘ के संपादन को लेकर 2012 से कार्यरत रहा। इस बारे में उनके साथ कई बार परामर्श के लिए मिलना जुलना होता रहा। पर आंतरिक इच्छा रखते हुए भी वे इसे प्रकाशित न देख सके।

READ  बड़ा हमला बड़ा बदला

Kunwar-Narayan_Poems2नियति कभी कभी हमें अपना ऋण चुकाने का समय नहीं देती। इस तरह एक हिसाब किताब उनसे अनचुकता ही रहा जो आजीवन सालता रहेगा। उनका न होना हिंदी के नहीं, भारतीय भाषाओं के सबसे बड़े कवि का अवसान है। वे नहीं हैं पर वे हैं, वे रहेंगे , क्योंकि कवि सदैव अमर रहता है। वे अपने शब्दों में सदैव अमर रहेंगे। ”वाजश्रवा के बहाने” –में उनका कहा ही याद आता है :

मृत्यु इस पृथ्वी पर जीव का अंतिम वक्तव्य नही है।

कुंवर जी, आपने समय समय पर अपनी कई पुस्तकें अपने हस्ताक्षर के साथ मुझे दीं। पर हाल में दो पुस्तकें लेखक का सिनेमा और न सीमाएं न दूरियां आईं तो शायद आप ऐसी स्थिति में न थे। भरसक कोशिश थी कि अन्वय और अन्विति आपके चैतन्य रहते आपके चरणों में भेंट कर सकूं। पर क्षमा कीजिएगा कि आपके रहते आपकी इस आखिरी अभिलाषा को साकार रूप न दे सका। क्षमस्व मे कविवर।

आपका यह कवि-कथन सदैव याद आता रहेगा :–

”किंचित श्लोक- बराबर जगह में भी पढ़ा जा सकता है एक जीवन –संदेश

कि समय हमें कुछ भी

अपने साथ ले जाने की अनुमति नहीं देता, पर अपने बाद

अमूल्य कुछ छोड़ जाने का पूरा अवसर देता है”

आप कितना कुछ अमूल्य हमारे मध्य छोड़ गए हैं । वे हमारे कमजोर क्षणों में शब्द-संबल बन कर आपकी याद दिलाते रहेंगे।

अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

मंगलेश डबराल : एक बेजोड़ नैतिक मनुष्य

अलविदा कुंवर नारायण।

हमारे समय के एक बेजोड़ नैतिक मनुष्य और उतने ही नैतिक कवि।

‘इतना कुछ था दुनिया में

लड़ने झगड़ने को

READ  सोहराई को सहेजने की जरूरत

पर ऐसा मन मिला

कि ज़रा-से प्यार में डूबा रहा

और जीवन बीत गया’

×