टूट की कगार पर इनेलो!

ओपिनियन पोस्ट
Tue, 11 Dec, 2018 14:45 PM IST

मलिक असगर हाशमी

हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल टूट की कगार पर है। चौटाला परिवार में छिड़ी वर्चस्व की जंग के चलते पार्टी के भविष्य को लेकर कार्यकर्ता सशंकित हैं। पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने इनेलो की कमान अपने छोटे बेटे अभय चौटाला को सौंप दी है जो परिवार और पार्टी के एक धड़े को मंजूर नहीं। इसके प्रति विरोध जताने का वे कोई मौका नहीं चूक रहे। गुरुग्राम मेंं आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में वे अपना विरोध दर्ज करवा चुके हैं। इसके बावजूद जब पार्टी मुखिया ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन के बाद पहली बार गोहाना में शक्ति प्रदर्शन के लिए आयोजित रैली में उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अपने गुस्से का इजहार करने के लिए पहले तो बिना अभय चौटाला के नाम और चित्र वाले पोस्टर पूरे गोहाना में लगाए। इसके बाद रैली में हूटिंग कर अभय चौटाला को बोलने नहीं दिया। मंच पर बसपा के प्रदेशस्तरीय नेताओं के साथ इनेलो के मुखिया ओमप्रकाश चौटाला भी मौजूद थे। मगर कार्यकर्ताओं ने उनका भी लिहाज नहीं किया। ऐसा नजारा इससे पहले इनेलो में कभी देखने को नहीं मिला था।

मंच पर वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में किसी नेता को बोलने न दिया जाए यह पार्टी नेताओं के लिए हैरान करने वाली बात थी। इस घटना से ओमप्रकाश चौटाला इस कदर गुस्सा हुए कि उन्होंने मंच से अनुशासनहीन कार्यकर्ताओं को निकालने की चतावनी दे दी। आरोप लगा कि रैली में हुड़दंगबाजी करने वाले युवा इनेलो और पार्टी की छात्र इकाई इनसो के कार्यकर्ता थे जिनकी कमान ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला के दोनों बेटों दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला के पास थी। रैली के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए ओमप्रकाश चौटाला ने इनसो और युवा इनेलो को भंग कर दिया। दादा के इस फैसले का दुष्यंत चौटाला ने जब यह कहकर विरोध जताया कि वे इनसो को भंग नहीं कर सकते क्योंकि यह एक अलग संगठन है, इसकी स्थापना उनके पिता ने की है। इस पर दादा और अधिक भड़क गए। उसके बाद उन्होंने सबसे पहले दुष्यंत चौटाला को पार्टी के सभी पदों से निलंबित कर दिया। फिर दिग्विजय को भी निलंबित कर तमाम महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से अलग कर दिया। इसके साथ पार्टी में व्यापक फेरबदल किए। कई जिलाध्यक्षों को हटा दिया। इसके साथ ओमप्रकाश चौटाला पार्टी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को यह संदेश देकर दिल्ली के तिहाड़ जेल लौट गए कि अगले दोनों महत्वपूर्ण चुनाव (लोकसभा और विधानसभा) अभय चौटाला के नेतृत्व में लड़े जाएंगे। ओमप्रकाश चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय चौटाला इस वक्त शिक्षक भर्ती घोटाले में दस साल की सजा काट रहे हैं।

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ओमप्रकाश चौटाला के फैसलों का अब तक किसी ओर से खुला विरोध नहीं हुआ है। मगर उनके दोनों पोतों के कड़े तेवर बताते हैं कि बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। इसके संकेत उन्होंने पार्टी से निलंबन के बाद ही दे दिए। दिल्ली स्थित अपने आवास पर बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने पर उन्होंने उनसे मुखातिब होते हुए स्पष्ट कर दिया कि वे उन्हें संघर्ष की प्रेरणा दे रहे हैं। निलंबन के बाद से दोनों भाइयों का प्रदेश भ्रमण भी प्रारंभ हो गया है। वे मुखतलिफ जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। इस बीच दुष्यंत के भाजपा में जाने की खबर आई जिसका उन्होंने खंडन नहीं किया। यानी दोनों भाई आगे की सियासी रणनीति बनाने में जुटे हैं। उनके भाजपा में शामिल होने पर प्रदेश के कृषि मंत्री तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश धनखड़ कहते हैं, ‘अच्छे लोगों के लिए भाजपा के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। इसमें दुष्यंत, दिग्विजय क्या कोई भी आ सकता है।’

इनेलो में इस उठा-पटक से पार्टी कार्यकर्ता बेहद मायूस हैं। प्रदेश सरकार के प्रति लोगों की बढ़ती नाराजगी, कांग्रेस में जारी सिर फुटव्वल और बसपा से गठबंधन के बाद उन्हें लगने लगा था कि अगले चुनाव में इनेलो बाजी मार ले जाएगी। मगर चौटाला परिवार में छिड़ी वर्चस्व की जंग से उनका यह सपना धूमिल होता दिख रहा है। इस बारे में ओपिनियान पोस्ट से बातचीत में इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष एवं चौटाला परिवार के करीबी अशोक अरोड़ा मायूस अंदाज में कहते हैं, ‘अभी पार्टी में जो कुछ चल रहा है शुभ संकेत नहीं है। चूंकि मामला ऐसा है जिसमें हर कोई हस्ताक्षेप नहीं कर सकता। इसके बावजूद मसले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला इसे एक पार्टी का अंदरूनी मसला बता रहे हैं। इसके बावजूद यह हकीकत है कि सूबे की प्रमुख विपक्षी पार्टी में बिखराब का सर्वाधिक लाभ इन्हीं दोनों दलों को मिलने वाला है। बसपा से समझौते के बाद इनेलो पहले से अधिक मजबूत हुई है। मगर फूट पड़ने पर सर्वाधिक घाटे में यही पार्टी रहने वाली है।

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हालांकि इंडियन नेशनल लोकदल में मौजूदा उठा-पटक को पार्टी के बुजुर्ग नेता खास अहमियत नहीं दे रहे। उनका दावा है कि वक्त रहते तमाम परिस्थितियां नियंत्रित हो जाएंगी। पार्टी से जुड़े रहे लोक जनसंपर्क विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आर एस दहिया कहते हैं, ‘इनेलो में ऐसी अफरा-तफरी देवीलाल के जमाने में भी देखने को मिली थी। तब पार्टी का सारा काम उनके बेटे रणजीत सिंह देखा करते थे। मगर जब सियासी विरासत सौंपने की नौबत आई तो रणजीत पर ओमप्रकाश चौटाला को तरजीह दी गई। तब भी कई नेता और कार्यकर्ताओं का एक धड़ा दूसरे दलों में चला गया था। मगर बाद में सभी इनेलो के झंडे तले आ गए।’ अजय चौटाला के जेल जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि समय बीतने के साथ उनके दोनों बेटों दुष्यंत और दिग्विजय को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। मगर ऐसा होता नहीं दिख रहा। आरोप है कि बसपा से गठबंधन में भी अभय चौटाला ने न तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और न ही अपने सांसद भतीजों को विश्वास में लिया। इसके अलावा अभय भतीजों की बजाय अपने दोनों बेटों अर्जुन और कर्ण को आगे करने में लगे हैं। चूंकि इस मसले पर अभी कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है इसलिए अभी यह कहना थोड़ा मुश्किल है कि भविष्य मेंं क्या होने वाला है। 

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