निशा शर्मा। पेशावर, ऐसा शहर जो पाकिस्तान के अंदरूनी संघर्ष को परिभाषित करने के लिए काफी है। यह शहर आतंकवादी हमलों का गवाह है। यहां के हजारों लोग ऐसे हमलों में अपनी जान गवा चुके हैं । जिसकी वजह से यह शहर अक्सर डर के साए में रहता है। लेकिन इस समय पेशावर के लोगों का डर आतंकवादी नहीं बल्कि चूहे बने हुए हैं।

इस शहर में चूहों के इंसाने पर हमले होना शुरू हो गए हैं। पेशावर के मेयर के मुताबिक चूहों ने पिछले साल से अब तक 8 बच्चों को मौत के घाट उतार दिया है । यही नहीं 374 लोगों को जख्मी किया है। रात के समय ये चूहे दीवारों और दरवाजों को कुतर कर खाने की चीजों तक ही नहीं पहुंचते बल्कि स्कूलों और अस्पतालों में भी अपना धावा बोले रखते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि ये साधारण चूहे नहीं हैं, ये आकार में बड़े ही नहीं बहुत बड़े हैं। पेशादर के लोग इनके आतंक से इतने खौफजदा हैं कि वो इसे षडयंत्र के तौर पर देखते हैं लोगों का कहना है कि वो  भरोसे के साथ कह सकते हैं कि ये चूहे यहां के नहीं हो सकते। ये बिल्लियों की तरह बड़े हैं जिनके दो नुकीले दांत हैं। जिनसे ये लोगों के जख्मी कर रहे हैं।

इतिहास बताता है कि वैज्ञानिकों ने बिल्ली के आकार के चूहों के बारे में तथ्य दिए हैं। पश्चिम नार्वे में चूहों का आकार 6 इंच से 8 इंच के बीच का माना गया है। लेकिन एशिया के चूहों की कुछ प्रजातियां ज्यादा बड़ी होती हैं। हालांकि ये कहना मुश्किल है कि चूहों कि कौन सी प्रजाति पेशावर में उपद्रव मचा रही है।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया के पुराने शहरों में करीब 1 मिलीयन लोग खराब घरों में रहते हैं। सीवरों की निकासी जहां गलियों में देखी जा सकती है यही नहीं मुर्गी पालन और डेरी फार्म घने आबदी वाली जगहों पर आसानी से पाए जा सकते हैं। ऐसे में चूहों के रहने के लिए ये जगह स्वर्ग है। फिर यहां के लोगों का चूहों को बाहरी साजिश बताना बेबुनियादी है। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि चूहों की तादाद 2010 और 2012 में आई बाढ़ के बाद से बढ़ी है। दरअसल, इन चूहों का घर पाकिस्तान और अफगानिस्तान की पहाड़ियों में था जो बाढ़ में नष्ट हो गए और ये चूहे बहकर यहां आ गए।

वहीं कई लोग मानते हैं कि यह चूहे अफगानिस्तान में बने अमेरिकी सेना के बेस में रहते थे। इन्हे ट्रकों में भरकर पाकिस्तान में छोड़ा गया है। एक विचार यह भी है कि यह बड़े आर्मी के आप्रेशन के दौरान काबायलियों के भगाने के लिए इस्तेमाल किए गए और ये तब से यहीं रह रहे हैं। पाकिस्तान के लोगों का गंभीर आरोप यह है कि चूहों को आनुवंशिक रूप से एक विदेशी शक्ति के द्वारा संशोधित कर मुसलमानों को आतंकित करने के लिए यहाँ छोड़ दियागया है। जिसकी वजह से चूहों ने यहां के लोगों का रहना दुभर कर दिया है। पाकिस्तान में चूहों की इस लड़ाई ने पेशावर को एक युद्ध का ऐसा मैदान बना दिया है जहां गोली बंदूकें नहीं चूहों के दांत ही खौफ फैलाने के लिए काफी हैं।