आईसीसी विश्‍व कप 2019 : किसमें कितना है दम

रेनु कुशवाह
Wed, 08 May, 2019 15:42 PM IST

आगामी 30 मई से इंग्लैंड की मेजबानी में खेले जाने वाले क्रिकेट विश्व कप के लिए सभी देशों ने अपनी-अपनी 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है. टूर्नामेंट में मेजबान इंग्लैंड के साथ भारत, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्र ीका को जीत के सबसे बड़े दावेदार के रूप में देखा जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया भी अपना विश्व खिताब बचाने की क्षमता रखता है. आइए जानते हैं किस टीम में कितना है दम.

भारत  : गेंदबाजों के हाथों में जीत की चाबी

तीसरी बार विश्व चैंपियन बनने के ख्वाब के साथ बीसीसीआई ने 15 अप्रैल को विराट कोहली की कप्तानी में 15 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी. चयन में सेलेक्शन कमेटी ने मुख्य रूप से अनुभव को वरीयता दी है. टीम में एमएस धोनी और दिनेश कार्तिक दो ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें 2007 के विश्व कप में भाग लेने का अनुभव है. विराट कोहली एवं धोनी विश्व विजेता टीम इंडिया के सदस्य रहे हैं. साल 2015 में सेमी फाइनल तक सफर तय करने वाले सात भारतीय खिलाड़ी इस बार भी विश्व कप की टीम में शामिल हैं, शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली, एमएस धोनी, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी एवं भुवनेश्वर कुमार. टीम में अंबाती रायुडू को बाहर करके केएल राहुल एवं विजय शंकर को शामिल करने पर सवाल उठ रहे हैं. टीम में जिन खिलाडिय़ों को शामिल किया गया, उससे नंबर चार पर बल्लेबाजी की समस्या का समाधान नहीं होता दिखा. हालांकि, इस पोजीशन के लिए विजय शंकर पर विश्वास जताया गया, जो तेज गेंदबाजी भी कर सकते हैं. केएल राहुल भी नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए दावेदार हैं, लेकिन उन्हें टीम में रिजर्व ओपनर के रूप में जगह मिली है.

भारतीय टीम का गेंदबाजी आक्रमण संतुलित नजर आता है. यही गेंदबाज पिछले दो सालों से जीत की धुरी रहे. टीम इंडिया को हार तभी मिली, जब उसके बल्लेबाज असफल रहे. कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की जोड़ी ने दुनिया के बल्लेबाजों को अपनी फिरकी पर खूब नचाया. उनका साथ देने के लिए रवींद्र जडेजा भी हैं. दूसरी तरफ जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार के साथ टीम के लिए पारी की शुरुआत और अंत में कंजूसी से गेंदबाजी करते रहे. बीच के ओवरों में विकेट लेने का काम मोहम्मद शमी ने किया. उन्हें हार्दिक पांड्या का साथ भी मिला. टीम में विजय शंकर एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिनके पास इंग्लैंड में खेलने का अनुभव नहीं है. अन्य खिलाड़ी इंग्लैंड का दौरा कर चुके हैं और वहां की परिस्थितियों से वाकिफ हैं. विजय शंकर, केएल राहुल एवं दिनेश कार्तिक को टीम में शामिल करने के निर्णय पर अलग-अलग राय हैं. दिग्गजों का मानना था कि कार्तिक की जगह रिषभ पंत को शामिल किया जाना चाहिए था. वहीं विजय शंकर की जगह अंबाती रायुडू को जगह दी जानी चाहिए थी. केएल राहुल को भी वनडे में खराब रिकॉर्ड के बावजूद जगह दी गई. टीम चयन की सूचना देते हुए एमएस के प्रयास यह जाहिर कर चुके हैं कि विजय शंकर को नंबर चार पर खिलाया जाएगा. अगर वह असफल होते हैं, तो केएल राहुल एवं दिनेश कार्तिक को आजमाया जाएगा.

न्यूजीलैंड: छुपे रुस्तम साबित हो सकते हैं कीवी

न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम 1975 से लेकर 2019 तक लगातार 12वीं बार विश्व कप में हिस्सा ले रही है, लेकिन यह अब तक एक बार भी खिताब अपने नाम नहीं कर सकी. हर टूर्नामेंट में डार्क हॉर्स यानी छुपा रुस्तम मानी जाने वाली कीवी टीम छह बार सेमी फाइनल में जगह बनाने में सफल हुई. ऑस्ट्रेलिया के साथ सह मेजबानी साल 2015 में उसे रास आई और वह पहली बार फाइनल में पहुंचने में सफल रही. लेकिन, खिताब जीतने का उसका सपना पूरा नहीं हो सका. कीवी क्रिकेट बोर्ड ने केन विलियमसन की कमान वाली 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की है. बोर्ड ने एक अनकैप्ड खिलाड़ी को टीम में जगह देकर दुनिया भर के क्रिकेट के प्रशंसकों को चौंका दिया, युवा विकेट कीपर बल्लेबाज टॉम ब्लंडेल, जो न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट और टी-20 क्रिकेट खेल चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक वनडे क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला. उन्होंने साल 2017 में वेस्टइंडीज के खिलाफ डेब्यू टेस्ट में शतक (107*) जड़ा था. टीम में सबसे अनुभवी खिलाड़ी के रूप में केन विलियमसन एवं रॉस टेलर शामिल हैं. टेलर का यह चौथा विश्व कप होगा, वहीं केन विलियमसन, टिम साउदी एवं मार्टिन गुप्टिल के लिए यह तीसरा विश्व कप होगा. आठ खिलाडिय़ों को पहली बार मौका मिला है. टीम में सबसे युवा खिलाड़ी ईश सोढ़ी हैं, जिनकी उम्र 26 साल है.

READ  पत्नी के परिधान पर किए कमेंट को लेकर मोहम्मद शमी का पलटवार

इंग्लैंड: बल्लेबाजी मजबूत पक्ष

पिछले दो सालों से वनडे क्रिकेट में दुनिया की नंबर एक टीम इंग्लैंड विश्व कप की मेजबानी कर रही है. इयोन मोर्गन की कप्तानी वाली इंग्लिश टीम ने 2017 में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी के बाद कोई वनडे सीरीज नहीं गंवाई है. इसी वजह से मेजबानों को इस बार जीत का सबसे बड़े दावेदार माना जा रहा है. इंग्लैंड के लिए 2015 का वल्र्ड कप बुरा सपना साबित हुआ था. मोर्गन की टीम को ग्रुप दौर के बाद ही घर वापस लौटना पड़ा था. ऐसे में उसके सामने पुराना प्रदर्शन भुलाकर विश्व विजय का सपना पूरा करने का शानदार मौका है. इस टीम में 2015 के विश्व कप में खेलने  वाली टीम के 6 खिलाड़ी, जिनमें मोर्गन के अलावा जो रूट, एलेक्स हेल्स, जोस बटलर, क्रिस वोक्स एवं मोईन अली के नाम शामिल हैं.

मौजूदा टीम में उन्हीं खिलाडिय़ों को शामिल किया गया है, जो पिछले 24 महीने से उसके लिए खेल रहे हैं. टीम का सबसे मजबूत पक्ष उसकी बल्लेबाजी है. आक्रामक क्रिकेट खेलते हुए इंग्लैंड ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड एवं पाकिस्तान जैसी टीमों को परास्त किया. गेंदबाज भी घरेलू पिच पर खेलेंगे, जहां उन्होंने क्रिकेट का ककहरा सीखा है. टीम में जहां जॉनी बेयर्स्टो, एलेक्स हेल्स, जेसन रॉय, जो रूट एवं इयान मोर्गन जैसे दिग्गज बल्लेबाज हैं, वहीं बेन स्टोक्स जैसा विश्वस्तरीय ऑलराउंडर भी है, जो गेंद और बल्ले, दोनों से मैच का रुख पलट सकता है. तेज गेंदबाजी की कमान क्रिस वोक्स, मार्क वुड एवं लियम प्लंकेट के हाथों में होगी, वहीं स्पिन आक्रमण का जिम्मा मोईन अली एवं आदिल राशिद जैसे खिलाड़ी संभालेंगे. टीम की बल्लेबाजी में भी गहराई है. नौ-दस नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले आदिल राशिद भी अच्छी क्षमता रखते हैं.

वेस्टइंडीज: गेल और रसेल पर भरोसा

वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने सबसे आखिर में अपनी टीम का ऐलान किया. पुराने दिग्गजों की टीम में वापसी की उम्मीद थी, लेकिन क्रिस गेल के अलावा आईपीएल में धमाल मचाने वाले आन्द्रे रसेल ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिनकी वल्र्डकप टीम में वापसी हुई है. टीम की कमान एक बार फिर जेसन होल्डर के हाथों में सौंपी गई है. टीम के अधिकांश खिलाड़ी वही हैं जिन्होंने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था. यह टीम संतुलित नजर आ रही है. ऐसे में टीम अप्रत्याशित रूप से कोई बड़ा धमाका कर दे जैसा उसने दो बार टी-20 विश्व कप जीतकर किया तो किसी को इसपर आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

अफगानिस्तान: उलटफेर का माद्दा

अफगान टीम की असली ताकत गेंदबाजी है. टीम में राशिद खान, मोहम्मद नबी और मुजीब उर रहमान जैसे विश्व स्तरीय स्पिनर हैं, जो किसी भी टीम को अपनी फिरकी में फंसा सकते हैं.  अफगानिस्तान के स्पिन आक्रमण की क्षमता से सभी वाकिफ हैं. वहीं उन्हें लक्ष्य का बचाव करने में दौलत जादरान, मीरवाईज अशरफ और आफताब आलम जैसे गेंदबाजों का साथ मिलेगा.

2015 में पहली बार विश्वकप के लिए क्वालीफाई करने वाली अफगानिस्तानी टीम तब केवल एक मैच जीत सकी थी. लेकिन चार साल में टीम की प्रदर्शन में बहुत सुधार हुआ है. क्वालीफायर्स के फाइनल में वेस्टइंडीज, आयरलैंड और जिंबाब्वे को मात देकर वो पहुंची है. ऐसे में अब कोई भी उसे हलके में नहीं लेगी. अफगान लड़ाके दुनिया की किसी भी टीम से लोहा लेने के लिए तैयार हैं और अपने दिन किसी भी टीम को मात देने की क्षमता रखती है.

READ  भारत में लगेगा क्रिकेट का मेला

दक्षिण अफ्रीका: ‘चोकर्स’ का टैग हटाने की चुनौती

दक्षिण अफ्रीका को हर विश्वकप में  खिताबी दावेदार के रूप में देखा जाता है, लेकिन शानदार प्रदर्शन के बावजूद बड़े मौकों पर यह टीम  बिखर जाती है. इस बार टीम की कमान फॉफ डुप्लेसी को सौंपी गई है. कागज पर यह टीम इस बार भी बेहद संतुलित दिख रही है. टीम की गेंदबाजी बल्लेबाजी की तरह मजबूत है, जिसकी कमान डेल स्टेन जैसे अनुभवी गेंदबाज के हाथों में है. उनका साथ देने के लिए कगिसो रबाडा एवं लुंगी नगिडि जैसे प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज हैं. स्पिन आक्रमण की जिम्मेदारी इमरान ताहिर के हाथों में होगी, उनका साथ देंगे तबरेज शम्सी. मार्डन डे क्रिकेट में ऑल राउंडर्स की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. ऐसे में एंडिले फेलुकवायो एवं ड्वेन प्रेटोरियस के रूप में दो तेज गेंदबाजी करने वाले ऑल राउंडर हैं. जेपी डुमिनी के रूप में स्पिन गेंदबाजी करने वाला ऑल राउंडर भी मौजूद है. हाशिम अमला के चयन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी, लेकिन चयन समिति ने अपने स्टार एवं अनुभवी खिलाडिय़ों पर एक बार फिर भरोसा जताया. 29 वर्षीय युवा बल्लेबाज रीजा हैंड्रिक्स को बाहर बैठना पड़ा. चयनकर्ताओं ने क्विंटन डि कॉक के रूप में केवल एक विकेट कीपर को जगह दी. उनकी गैर मौजूदगी में डेविड मिलर को दस्ताने पहनने होंगे. टीम में सात खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनके पास विश्व कप खेलने का अनुभव है, डिकॉक, डुप्लेसी, डुमिनी, अमला, मिलर, स्टेन एवं ताहिर. आठ खिलाड़ी युवा हैं, जिन्होंने पिछले कुछ सालों में खुद को साबित किया है.

बांग्लादेश : अनुभव को तरजीह

साल 2015 में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करने वाली बांग्लादेश की टीम के आठ खिलाडिय़ों के अलावा युवा खिलाडिय़ों को भी जगह मिली है. पहली बार विश्व कप खेलने जा रहे युवा खिलाडिय़ों में तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान एवं स्पिनर मेहंदी हसन मेराज मुख्य रूप से शामिल हैं. वनडे टीम में पहली बार शामिल अबु जायद ने न्यूजीलैंड दौरे पर अपनी स्विंग गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया था. जायद इस बार बांग्लादेश के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं.      टीम में युवा एवं अनुभवी खिलाडिय़ों का सही मिश्रण है, जो बेहद उपयोगी साबित होगा. पिछले विश्व कप के बाद बांग्लादेश का कद ऊंचा हुआ है, लेकिन उसके प्रदर्शन में बहुत उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं.  यह टीम ऐसी है, जो किसी को भी मात देने का माद्दा रखती है.

श्रीलंका : साख के लिए खेलेगी टीम

अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही इस टीम की कमान दिमुथ करुणारत्ने को सौंपी गई है. 30 वर्षीय करुणारत्ने ने विश्व कप 2015 के बाद से श्रीलंका के लिए कोई वनडे नहीं खेला. ऐसे में उन्हें कप्तान बनाया जाना हैरान करता है. टीम में पिछली बार विश्व कप खेलने वाले सात खिलाडिय़ों को बरकरार रखा है, जिनमें एंजेलो मैथ्यूज, लसिथ मलिंगा, थिसारा परेरा, जीवन मेंडिस, लहिरू थिरामाने एवं सुरंगा लकमल शामिल हैं. श्रीलंका का प्रदर्शन हाल के दिनों में बेहद खराब रहा है. पिछली चार सीरीज में चार अलग-अलग खिलाडिय़ों ने टीम की कमान संभाली, लेकिन परिणाम अच्छे नहीं आए. ऐसे में, श्रीलंकाई टीम का सेमी फाइनल तक पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है.

पाकिस्तान : ‘तुक्के’ के सहारे जीत की उम्मीद

साल 2017 में इंग्लैंड की मेजबानी में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली पाकिस्तान क्रिकेट टीम दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का सपना देख रही है. 1992 में इमरान खान की कप्तानी में विश्व कप जीतने के बाद से पाकिस्तान की झोली खाली है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाले 11 खिलाडिय़ों को टीम में बरकरार रखा है. टीम की घोषणा करते हुए मुख्य चयनकर्ता इंजमाम उल हक ने कहा, हमने उक्त खिलाडिय़ों को वरीयता इसलिए दी, क्योंकि उनमें दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता है. टीम का चयन इंग्लैंड की परिस्थितियों के आधार पर किया गया है, जिसमें विश्वसनीय बल्लेबाजों और विकेट लेने की क्षमता वाले गेंदबाजों के साथ-साथ बेहतरीन फील्डर्स को वरीयता दी गई है. इस टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर को शामिल नहीं किया गया. उनका प्रदर्शन भारत के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल के बाद बेहद खराब रहा. हालांकि, उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ वल्र्ड कप से पहले एक टी-20 और पांच वनडे मैचों की टीम में शामिल किया गया है. यदि इस दौरान वह ‘फॉर्म’ में वापसी करने में सफल होते हैं, तो 23 मई से पहले टीम में उनकी एंट्री हो सकती है.

READ  पीएम मोदी आज करेंगे, 'खेलो इंडिया स्कूल गेम्स' का उद्घाटन

इमाम उल हक, फखर जमान एवं बाबर आजम पिछले कुछ समय से पाक बल्लेबाजी की रीढ़ हैं. टीम में युवा आबिद अली भी हैं, जिन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का शानदार आगाज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हालिया सीरीज में किया. उनके आने से कप्तान सरफराज के पास विकल्प बढ़ गए हैं. टीम में शामिल केवल चार खिलाडिय़ों के पास इससे पहले विश्व कप खेलने का अनुभव है. सरफराज एवं हारिस सोहेल साल 2015 में विश्व कप टीम में शामिल थे. शोएब मलिक एवं मोहम्मद हफीज भी विश्व कप खेल चुके हैं. तेज गेंदबाज हमेशा से पाकिस्तान की ताकत रहे हैं, लेकिन इस बार उसमें अनुभव की कमी दिखाई पड़ रही है. गेंदबाजी की कमान संभालने वाला कोई खिलाड़ी नजर नहीं आ रहा है, जो विपरीत परिस्थितियों में युवा खिलाडिय़ों के लिए मैदान में मददगार साबित हो सके.

ऑस्ट्रेलिया : खिताब बचाने का दम

पांच बार की विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया टीम ‘फॉर्म’ में वापस आ गई है. बॉल टेंपरिंग विवाद का टीम पर बेहद खराब प्रभाव पड़ा था. विवाद में संलिप्त पाए जाने के चलते पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ एवं उपकप्तान डेविड वॉर्नर पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था. विश्व कप से ठीक पहले इन दोनों खिलाडिय़ों की गैर मौजूदगी में भारत और पाकिस्तान क्रिकेट टीम को क्रमश: 2-3, 0-5 के अंतर से मात देकर ऑस्ट्रेलिया ने विश्व खिताब बचाने की घोषणा कर दी. इसके बाद टीम में डेविड वॉर्नर एवं स्टीव स्मिथ की वापसी का ऐलान भी कर दिया गया. इस बार ऑस्ट्रेलियाई टीम की कमान एरोन फिंच को सौंपी गई है. तेज गेंदबाजी की कमान बाएं हाथ के अनुभवी गेंदबाज मिचेल स्टार्क के हाथों में होगी. उनका साथ देंगे नाथन कुल्टर नाइल, पैट कमिंस, जेसन बेहरेन डॉर्फ एवं जे रिचर्डसन. स्पिन गेंदबाजी की जिम्मेदारी अनुभवी नाथन लॉयन एवं एडम जांपा संभालेंगे. उनका साथ देंगे ग्लैन मैक्सवेल, जिन्हें बैटिंग ऑल राउंडर के रूप में टीम में शामिल किया गया है. ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड के चयनकर्ताओं ने ऑल राउंडरों से ज्यादा विशेषज्ञ खिलाडिय़ों पर भरोसा जताया. टीम में उन्हीं खिलाडिय़ों को जगह दी गई है, जो पिछले एक-दो साल से आते-जाते रहे हैं. हालांकि, विश्व कप टीम में विकेट कीपर बल्लेबाज पीटर हैंड्सकॉम्ब एवं जे हेजलवुड को शामिल न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं. हैंड्सकॉम्ब ने हालिया भारत दौरे पर अपने शानदार प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया था. जे हेजलवुड की गैर मौजूदगी भी चर्चा का विषय है. उनकी जगह जे रिचर्डसन को टीम में शामिल किया गया है. एरोन फिंच, डेविड वॉर्नर, स्टीव स्मिथ, ग्लैन मैक्सवेल, मिचेल स्टार्क एवं पैट कमिंस 2015 में विश्व चैंपियन बनने वाली टीम के सदस्य रहे हैं. नौ खिलाड़ी ऐसे हैं, जो पहली बार विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की नुमाइंदगी करेंगे.

×