युवा वोटर करेंगे उम्मेदवारों की किस्मत का फैसला

साल 2014 में देवभूमि उत्तराखंड की सभी पांच संसदीय सीटों पर केसरिया फहराने वाली भाजपा को इस बार दिन में तारे नजर आ रहे हैं. पौड़ी, टिहरी एवं नैनीताल सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवारों को लगातार मिल रही बढ़त ने भाजपाई दिग्गजों को पसीना-पसीना कर दिया है. हरिद्वार में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को सपा के उम्मीदवार अंतरिक्ष सैनी से कड़ी चुनौती मिल रही है. गौरतलब है कि निशंक को स्थानीय भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं का भी जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा. उनका आरोप था कि निशंक बाहरी एवं पैराशूट उम्मीदवार हैं. हाईकमान के हस्तक्षेप से मामला फिलहाल तो ठंडा पड़ गया है, लेकिन भितरघात की आशंका अब भी बरकरार है. कांग्रेस ने यहां अमृश कुमार को मैदान में उतार कर सपा के उम्मीदवार सैनी का रास्ता साफ कर दिया है. सवाल यह है  कि ‘नमो मंत्र’ के सहारे चुनाव में उतरे निशंक क्या इस बार संसद पहुंचने में कामयाब हो पाएंगे? हालत यह है कि 14 लाख वोटरों वाले हरिद्वार संसदीय क्षेत्र में भाजपा को नाको चने चबाने पड़ रहे हैं.

१४ विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनी पौड़ी संसदीय सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है. कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूरी के पुत्र मनीष खंडूरी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं भाजपा ने पूर्व शिक्षा मंत्री तीरथ सिंह रावत को मैदान में उतारा है. मनीष कहते हैं कि नरेंद्र मोदी ने मेरे पिता को अपमानित करके देवभूमि के साथ-साथ देश के सैनिकों का भी अपमान किया. इसलिए उन्हें कांग्रेस का दामन थाम कर राजनीति में उतरना पड़ा. मनीष को अपने पिता की बेदाग छवि और उनके द्वारा की गई जनसेवा का लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है. भाजपा उम्मीदवार तीरथ सिंह रावत का मानना है कि नरेंद्र मोदी का कोई जोड़ नहीं है, जनता उन्हें नायक मानती है और जीत भी उन्हीं की होगी, वह तो सिर्फ उनके चौकीदार हैं. खंडूरी के पुत्र मनीष की बगावत को बेेअसर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में एक जनसभा के दौरान ‘सैन्य परिवारों’ को चौथा धाम करार दिया. इस पर मनीष कहते हैं कि मोदी की कथनी और करनी का अंतर ही उनके राजनीतिक पतन का कारण बनेगा.

टिहरी-गढ़वाल सीट श्रीमती माला राजलक्ष्मी शाह के पास है. उन्हें 2014 में भाजपा के टिकट पर जनता ने राजघराने का सम्मान करते हुए जिताया था. भाजपा ने इस बार फिर उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है, लेकिन जनता अब राजघराने से मुक्ति की राह तलाश रही है. इस सीट पर कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जो जौनसार के विधायक भी हैं. यहां भी भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है. रानी माला राजलक्ष्मी शाह के लिए संसद की राह इस बार आसान नहीं है. हल्द्वानी सुरक्षित सीट पर भाजपा-कांग्रेस, दोनों ने टम्टा बंधुओं पर भरोसा जताया है. कांग्रेस ने अपने दलित चेहरे अजय टम्टा को उम्मीदवार बनाया है, तो भाजपा ने प्रदीप टम्टा को. भाजपा इस सीट पर अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है. नैनीताल सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अपना उम्मीदवार बनाया है, उन्हें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से टक्कर लेनी है.हरीश रावत इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं. साल 2014 के चुनाव के वक्त राज्य में 78 लाख वोटर थे. 2019 में सात लाख नए वोटर जुडऩे के बाद यह आंकड़ा तकरीबन ८५ लाख बैठता है. मोदी सभी पांच सीटों पर भाजपा की जीत के प्रति आश्वस्त हैं, लेकिन युवाओं का एक बड़ा हिस्सा अपनी उपेक्षा और बेरोजगारी के चलते हताश है, जिसकी नाराजगी किसी न किसी राजनीतिक दल-उम्मीदवार पर भारी जरूर पड़ेगी.

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