न्यूज फ्लैश

जय हो, अवेंजर्स भी सीख रहे हिंदी

14 सितम्बर को हिंदी दिवस पर विशेष

अजय विद्युत।

हिंदी दिवस पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री राजनेताओं से लेकर लेखकों पत्रकारों, कलाकारों और समाज के जाने माने व्यक्तियों ने अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

Avengers Hindi Diwasअवेंजर्स, हल्क, आयरन मैन, स्पाइडर मैन सीरीज और थॉर जैसी फिल्मों के जरिए दुनिया में धूम मचाने वाले हॉलीवुड के बड़े प्रोडक्शन हाउस मार्वेल्स स्टूडियो ने भी ट्वीट करते हुए हिंदी दिवस पर शुभकामनाएं दी हैं। मार्वेल्स की हिंदी में डब फिल्मों ने भी भारत में खासी कमाई की है।

उसने हिंदी दिवस की खुशखबरी सुनाते हुए कहा है कि वह अवेंजर्स- इंफिनिटी वॉर हिंदी में दो अक्टूबर को री रिलीज़ कर रहा है। हिंदी भारत के साथ ही दुनिया के तमाम हिस्से में करोड़ों भारतीयों की बोली बानी है। हिंदी में बढ़ते कारोबार और पैसे की ताकत ही है जिसने दुनिया को हिंदी का सम्मान करने के लिए विवश किया है।

Marvel India, ‏14-09-2018

Hindi Diwas ki khush khabri sunoge? You’ve got one last chance to re-live the epic experience of ‘द अव्हेन्जर्स’ !!

Avengers: #InfinityWar Hindi – Re-releasing IN THEATRES, 2nd October 2018!!

Happy #HindiDiwas to you too!

इससे पहले पांच सितम्बर को शिक्षक दिवस पर भी मार्वल इंडिया ने अपने ट्विटर हैंडल पर अवेंजर्स को हिंदी सीखते हुए दिखाया था ….आश्चर्य है ये अवेंजर्स टीचर्स डे पर हिंदी क्यों सिख रहे हैं।

Marvel India, ‏05-09-2018

Hmm.. wonder why the Avengers are learning Hindi on Teacher’s Day!

Stay Tuned! Coming soon – A मंगल अवसर |

केवल भाषा नहीं अपितु सनातन वाक् सत्ता 

 Swami Avdheshanand जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द ने ट्विटर पर हिंदी को भारत की संस्कृति सभ्यता की सुषुम्ना बताया है।

Swami Avdheshanand 14-09-2018

हिन्दी केवल भाषा नहीं अपितु सनातन वाक् सत्ता एवं भारतीय अस्मिता की सुषुम्ना है जिसमें भारत की संस्कृति सभ्यता और संस्कारों के स्वर समाहित हैं ।भाषा की विविधताओं में वैखरी के सभी सारस्वत स्वरूप आदरणीय हैं। #हिन्दी_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ #हिंदी

जय हिन्दी, जय भारती 

हिंदुस्तान दैनिक के प्रधान संपादक शशि शेखर ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा-

Shashi Shekhar हिन्दी दिवस पर मेरी बधाई स्वीकार करें। अकारण उल्लास और बेवजह की हाय-तौबा के इस कठिन वक्त में यह बताना जरूरी है कि हमारी मातृभाषा की करोड़ों संतानें हैं। इतनी संतानों की मां को निरीह मानना भारी भूल होगी।

सदियों ने इसे गढ़ा है और सदियों तक इसे चलाने की जिम्मेदारी अब हम पर है। यहां यह भी जान लें। भाषाओं के संरक्षण के लिए सरकारों की ओर ताकना बेकार है। सत्ता सदन अगर भाषा के माई-बाप होते तो संस्कृत को प्राकृत अथवा पाली और फारसी को हिन्दुस्तानी ने कभी बेदखल न किया होता।

सवाल उठता है तो फिर हाय-तौबा क्यों? आपको थोड़ा पीछे ले चलता हूं। पचास साल होने को आए। भारतेंदु हरिश्चंद्र का आलेख पढ़ा था- ‘हा! हत्भागिनी हिन्दी’। पिता कवि थे और सरकारी अधिकारी भी। हर तीन बरस में उनका तबादला हो जाता। उन दिनों छोटे शहरों में होटल नहीं होते थे, इसलिए हमें अक्सर किसी न किसी नामचीन कवि या साहित्यकार का आतिथेय बनने का अवसर प्राप्त होता। वे तब भी हिन्दी की दुर्दशा की चर्चा करते। ये वो दौर था, जब बंगाल और तमिलनाडु सहित कुछ अन्य राज्यों में हिन्दी के खिलाफ आंदोलन हो रहे थे।

मरहूम राममनोहर लोहिया ने उसी के बाद ‘अंग्रेजी हटाओ’ आंदोलन छेड़ा था। कुछ लोग तब भी कहते थे कि हिन्दी हमारी मां है और अन्य भाषाएं उसकी बहनें। इसी मां और मौसियों के सियासी बेटों ने उन्हें अपने स्वार्थ का मुद्दा बना रखा था।

एक तरफ हम झगड़ रहे थे, दूसरी तरफ हमारा मातृकुल चुपचाप अपना रास्ता तय कर रहा था। आज तमिलनाडु जाइए या केरल, कोलकाता जाइए या कामरूप, आपको हिन्दीभाषी होने का दंश नहीं भोगना पड़ता। जो काम बड़े-बड़े साहित्यकार और आंदोलन नहीं कर सके उसे हिन्दी सिनेमा, फिल्मी गीतों और कवि सम्मेलनों ने कर दिखाया। भाषा के लिए आडंबर और पाखंड से कहीं ज्यादा जरूरी है कि उसे प्रवाह में रखा जाए। हम हिन्दीभाषी गर्व कर सकते हैं कि हमारी मातृभाषा किसी महासागर की तरह तरंगित, गहरी और विशाल है। वह समूचे बड़प्पन के साथ अपने प्रति उथले और ओछे विचारों को भी लील जाती है।

चाहूं तो यहां तमाम आंकड़े गिना सकता हूं पर आज बस इतना ही कहना चाहूंगा कि कुंठा में मत रहिए, अपना रास्ता बनाने की कोशिश कीजिए। हमारा आगे बढ़ना जरूरी है क्योंकि हमारे ही जरिए हिन्दी भी आगे बढ़ती है। हां, जो लोग अपने कर्म या विचार से आगे नहीं बढ़ सके, उन्हें हिन्दी को दोष देना बंद कर देना चाहिए। पुरानी कहावत है- पूत भले ही कपूत हो जाए, माता कुमाता नहीं हो सकती।

रोजी रोटी है हिंदी

rohit sardana टीवी एंकर रोहित सरदाना ने हिंदी दिवस पर ट्वीट करते हुए अंग्रेजी को अंग्रेजी को टशन और हिंदी को रोजी रोटी बताया है।

Rohit Sardana 14-09-2018

अंग्रेजी टशन है, रोजी रोटी है हिंदी/ पिज़्ज़ा-पेप्सी नहीं, घर का राशन है हिंदी।

ये जीवन ऋणी है हिंदी तुम्हारा/ सितम्बर की एक तारीख भर नहीं,

जो उंगली पे गिन दी। #हिंदी_दिवस

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